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Home बिहार सारण दूसरे मंडियों से नहीं आ रहे व्यापारी, सब्जी उत्पादकों के सामने संकट

दूसरे मंडियों से नहीं आ रहे व्यापारी, सब्जी उत्पादकों के सामने संकट

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दूसरे मंडियों से नहीं आ रहे व्यापारी, सब्जी उत्पादकों के सामने संकट

मांझी : कोरोना को लेकर प्रखंड के अधिकांश हिस्सों में लागू लॉकडाउन की चपेट में सब्जी उत्पादक भी आ गये है. प्रखंड के फतेहपुर से लेकर फुलवरिया तक के दियारा क्षेत्रों में किसानों ने सब्जी की खेती की है. सबसे ज्यादा खेती परवल की हुई है. लॉकडाउन के कारण सीमावर्ती बलिया व अन्य जिलों से बड़े व्यापारी नहीं आ रहे हैं, जिससे किसानों के उचित कीमत पर सब्जियों को बेचने की चुनौती है. प्रखंड के दियारा क्षेत्र में होने वाली खीरा, ककड़ी समेत हरी सब्जियों के भाव करीब 40 से 60 प्रतिशत कम मिल रहे है. ऐसे में इन उत्पादकों पर दोहरी मार पड़ रही है. जानकारी के अनुसार गर्मी के सीजन की सब्जियां बाजार में आ रही है. अभी इनकी बिक्री का पीक टाइम है, लेकिन गत माह से लॉकडाउन होने से इन सब्जियों के दाम सही नहीं मिल पा रहे है.

उत्पादकों को ना तो स्थानीय स्तर पर आशा के अनुसार भाव मिल रहे है, ना बड़ी फल व सब्जी मंडियों में बिक्री हो पा रही है. इसके चलते इसके उत्पादकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. सब्जी उत्पादकों की इन दिनों हालात इस तरह से बिगड़ी हुई है कि उन्हें सब्जियों की लागत भी नहीं मिल रही है. मजबूरन कई किसानों ने खेतों में ही सड़ने के लिए सब्जियों को छोड़ दिया है. ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्रों में न तो बाजार लग रहे है और न कोई मंडी. ऐसी स्थिति में उनके उपज को पूछने वाला नहीं है. पूर्व के उनके उत्पाद को जिला व राज्य के बाहर भी बड़े व्यापारियों द्वारा ट्रक के माध्यम से विभिन्न मंडियों में ले जाया जाता था.किसान कर्ज लेकर करते है हरी सब्जियों की खेतीप्रखंड के दर्जनों गांव के किसान मांझी के दियारा क्षेत्र में हरी सब्जियों के अलावा ककड़ी, तरबूज की खेती करते है. सब्जियां तैयार हो गयी है.

लेकिन उनके दाम में आधे से अधिक की गिरावट आने के कारण किसान इस साल भी कर्ज में रहेंगे. लगभग पांच सौ बीघे से ज्यादा परवल के अलावा ककड़ी, तरबूजा की खेती मांझी के दियारा क्षेत्र में किसानों ने की है.50 प्रतिशत तक भाव कम मिल रहे उत्पादकों कोकिसानों ने बताया कि सब्जी व फल उत्पादकों को लॉकडाउन के चलते सब्जी मंडियों में खरीदार नहीं मिल रहे है. सीवान और छपरा के बॉडर सील हो जाने के कारण सीवान जिले के कई जगहों से आने वाले व्यापारी नहीं आ रहे है. व्यापारियों के नहीं आने के कारण हरी सब्जियों के दाम आधे के भी कम हो गयी है. खीरा ककड़ी 8-10 रुपये किलो के हिसाब बिक रही है. जबकि लॉकडाउन से पहले खीरा 20 रुपये किलो बिकी थी.

इस सीजन में परवल 35-40 रुपये प्रतिकिलो से हिसाब से बिकता. लेकिन लाकडाउन होने के कारण दूसरे जिले के व्यापारियों के नहीं आने के कारण 15-20 रुपये किलो परवल बेचने को मजबूर है. लौकी की आधे से कम दाम भी बेचना पड़ रहा है.लॉकडाउन के कारण दूसरे जगह के व्यापारी नहीं आ रहे है, इससे परवल औने-पौने दाम पर बेचना पड़ रहा है. लोकल बाजार में उत्पादन के अनुपात में खपत नहीं हो रही है.मुनिलाल यादव, किसान कर्ज लेकर परवल की खेती हम लोग किये है. सीजन में परवल की कीमत आधे से भी कम हो गयी है. इस कारण काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

इस साल के खेती में काफी नुकसान हो रहा है.राम बहादुर बीन, किसानलॉकडाउन से काफी नुकसान हो रहा है. खेत में सब्जी तैयार है. बाहर के जिले के व्यापारियों के नहीं आने से आर्थिक नुकसान हो रहा है. सबसे अधिक व्यापारी सीवान जिले से आते थे. बॉडर सील के कारण बाहर के व्यापारी नहीं आ रहे है. स्थानीय बाजार में मूल्य नहीं मिल पा रही है.रामजीत बीन, किसान

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