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सरकारी स्तर पर सोनपुर मेले का समापन, लेकिन रौनक अब भी बरकरार

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सरकारी स्तर पर सोनपुर मेले का समापन, लेकिन रौनक अब भी बरकरार
सांकेतिक तस्वीर

सोनपुर. विश्वप्रसिद्ध सोनपुर मेला का औपचारिक समापन भले ही सारण प्रशासन द्वारा 10 दिसंबर को कर दिया गया हो, लेकिन हकीकत में मेला क्षेत्र की रौनक अब भी कायम नजर आयी. शुक्रवार की शाम यह स्पष्ट रूप से देखा गया कि मेला समाप्ति के बावजूद थियेटर, झूले और अन्य मनोरंजन के साधन लगातार संचालित थे, जहां बड़ी संख्या में दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी. लोग मेला खत्म होने से पहले अंतिम बार मनोरंजन का आनंद लेने के लिए परिवार और बच्चों के साथ पहुंचते रहे. आमतौर पर समापन के बाद मेला क्षेत्र धीरे-धीरे खाली हो जाता है. लेकिन इस बार स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत रही. थियेटरों और झूलों पर दर्शकों की संख्या पहले से अधिक नजर आयी. थियेटरों के बाहर लंबी कतारें लगी रहीं. जहां महिलाओं, युवाओं और परिवारों की भारी मौजूदगी दिखी. टिकट काउंटरों पर अत्यधिक दबाव के कारण लोगों को टिकट लेने में काफी समय तक इंतजार करना पड़ा. थियेटरों के भीतर सीटें कम पड़ गयी और कई दर्शकों को खड़े होकर कार्यक्रम देखने पड़े. हालांकि, इतनी बड़ी भीड़ के बीच सबसे गंभीर चिंता का विषय सुरक्षा व्यवस्था का अभाव रहा. थियेटरों, मुख्य सड़कों और मेला परिसर में पुलिस बल की उपस्थिति बेहद कम दिखाई दी. भीड़ नियंत्रण और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नजर नहीं आये, जिसे स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक लापरवाही करार दिया. स्थिति तब और गंभीर हो गयी जब मेला क्षेत्र में रोशनी की व्यवस्था भी पूरी तरह ठप पड़ी रही. अधिकांश स्ट्रीट लाइटें बंद होने से पूरा इलाका अंधेरे में डूबा रहा. लोग मोबाइल और टॉर्च की रोशनी से रास्ता तलाशते दिखे. घना अंधेरा और भीड़ का मेल असुरक्षा की भावना को और बढ़ाता नजर आया. अंधेरे के बावजूद महिलाओं का आवागमन लगातार जारी रहा. जिससे संभावित खतरे की आशंका कई गुना बढ़ गयी. कई महिला दर्शकों ने बताया कि भारी भीड़ और रोशनी की कमी के कारण निकलना काफी भयावह अनुभव रहा. वहीं शनिवार को हरिहरनाथ थाना अध्यक्ष बिमलेश कुमार सिंह ने स्पष्ट रूप से बताया कि मेला क्षेत्र में थियेटर, झूला सहित सभी मनोरंजन साधनों को पूर्ण रूप से बंद करा दिया गया है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी भी संचालक द्वारा प्रशासनिक निर्देशों का उल्लंघन किया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी. स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक मेला क्षेत्र में भीड़ पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती, तब तक सुरक्षा व्यवस्था और प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त रखा जाये लोगों का कहना है कि भीड़भाड़ वाले स्थानों और मुख्य मार्गों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती आवश्यक है, ताकि आमजन सुरक्षित वातावरण में मेला क्षेत्र से लौट सकें और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव हो सके.

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