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इमरजेंसी विभाग में आये मरीजों के इलाज के लिए एसओपी लागू

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इमरजेंसी विभाग में आये मरीजों के इलाज के लिए एसओपी लागू
सांकेतिक तस्वीर

छपरा. सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी ) लागू होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में पहल शुरू हो गयी है. इस क्रम में उपाधीक्षक डॉ केएम दुबे ने स्वयं इमरजेंसी विभाग का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और संबंधित कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश समेत प्रशिक्षण भी दिया. एसओपी लागू होने के बाद मरीजों के उपचार को व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने के लिए ट्रायज प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू किया गया है. इसके तहत मरीजों को उनकी स्थिति की गंभीरता के आधार पर तीन श्रेणियों मे रेड (गंभीर), येलो (मध्यम) और ग्रीन (सामान्य)में विभाजित किया जा रहा है. रेड श्रेणी में आने वाले गंभीर मरीजों का तत्काल इलाज शुरू किया जाता है. वहीं येलो श्रेणी के मरीजों को 10 से 15 मिनट के भीतर उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है इसमें मध्यम स्तर की सांस की तकलीफ, तेज बुखार के साथ कमजोरी, फ्रैक्चर या नियंत्रित रक्तस्राव जैसे मामले शामिल हैं. ग्रीन श्रेणी के सामान्य मरीजों का उपचार 30 से 60 मिनट के भीतर किया जाता है, जिनमें मामूली चोट या सामान्य बुखार जैसे केस शामिल होते हैं. वही नर्सिंग स्टाफ की भूमिका भी तय की गयी है. वैसे मरीजों के वाटल सिग्नस (महत्वपूर्ण शारीरिक संकेत) लेते हैं, उनकी लगातार निगरानी करते हैं, डॉक्टर को सूचित करते हैं और प्राथमिक उपचार शुरू करते हैं. सामान्य मरीजों को ओपीडी की तरह प्रबंधन कर वेटिंग रूम में भेजा जाता है. ट्रायाज प्रक्रिया के तहत प्रवेश द्वार पर स्क्रीनिंग नर्स की तैनाती की गयी है, जो प्रत्येक मरीज के एयरवे, ब्रीदिंग, सर्कुलेशन और चेतना स्तर की जांच करती है. इसके बाद एक से दो मिनट के भीतर मरीज को श्रेणी में रखकर टैग किया जाता है और इमरजेंसी रजिस्टर में उसकी प्रविष्टि दर्ज की जाती है. इस नयी व्यवस्था से इमरजेंसी सेवाओं में तेजी, पारदर्शिता और बेहतर उपचार से मरीजों को भी सहूलियत हो रही है.

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