मढ़ौरा में 41 हजार बच्चों तक पहुंचेगी स्वास्थ्य विभाग की टीम, पिलाई जाएगी पोलियों की खुराक

Saran Pulse Polio Campaign: मढ़ौरा अनुमंडलीय अस्पताल में रविवार को पांच दिवसीय राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. वीरेश कुमार ने बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाकर अभियान की शुरुआत की.

By Sakshi kumari | June 28, 2026 2:40 PM

सारण से मनोकामना सिंह की रिपोर्ट
Saran Pulse Polio Campaign:
सारण के मढ़ौरा में रविवार से पांच दिवसीय राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत हो गई. स्थानीय अनुमंडलीय अस्पताल में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. वीरेश कुमार ने बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाकर अभियान का शुभारंभ किया. स्वास्थ्य विभाग ने इस बार क्षेत्र के करीब 41 हजार बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया है. अभियान 2 जुलाई तक चलेगा.

41 हजार बच्चों को पोलियो से सुरक्षित बनाने का लक्ष्य

स्वास्थ्य प्रबंधक विश्वजीत कुमार ने बताया कि यह अभियान 28 जून से 2 जुलाई तक संचालित किया जाएगा. अभियान का मुख्य उद्देश्य 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो से सुरक्षित करना है. इस बार स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र के लगभग 41 हजार बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया है.

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घर-घर पहुंचेंगी स्वास्थ्य विभाग की टीमें

अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक तैयारी की है. घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने के लिए 90 विशेष टीमों का गठन किया गया है. ये टीमें निर्धारित क्षेत्रों में जाकर बच्चों तक पहुंचेंगी.

ट्रांजिट और मोबाइल टीमों की भी तैनाती

स्वास्थ्य विभाग ने अभियान के दौरान यात्रियों और दूरदराज के इलाकों के बच्चों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 16 ट्रांजिट टीम और दो मोबाइल टीमों की भी तैनाती की है. सभी टीमें तय लक्ष्य को पूरा करने के लिए सक्रिय रहेंगी.

स्वास्थ्य कर्मियों की रही मौजूदगी

अभियान के शुभारंभ अवसर पर बीसीएम आलोक कुमार, एएनएम कंचन कुमारी, ममता कुमारी समेत स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे. सभी ने अभिभावकों से अपने बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य दिलाने की अपील की.

क्यों जरूरी है पोलियो की खुराक

विशेषज्ञों के अनुसार पोलियो एक गंभीर बीमारी है, जो बच्चों को स्थायी रूप से दिव्यांग बना सकती है. नियमित टीकाकरण और पल्स पोलियो अभियान के माध्यम से ही इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है.

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