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Home बिहार सारण कालाजार मुक्त अभियान के तहत सिंथेटिक पाइरोथाइराइड का छिड़काव शुरू

कालाजार मुक्त अभियान के तहत सिंथेटिक पाइरोथाइराइड का छिड़काव शुरू

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कालाजार मुक्त अभियान के तहत सिंथेटिक पाइरोथाइराइड का छिड़काव शुरू

कालाजार मुक्त अभियान के तहत सिंथेटिक पाइरोथाइराइड का छिड़काव शुरू

कालाजार के मरीज़ों को प्रोत्साहन राशि के साथ ही किया जाता है जागरूक: डॉ दिलीप कुमार

नोट: फोटो नंबर 17 सीएचपी 9 है कैप्सन होगा-जागरूकता अभियान चलाते स्वास्थ्य कर्मी

संवाददाता, छपरा. कालाजार मुक्त करने के लिए जिले के विभिन्न प्रखंड क्षेत्रों के अतिप्रभावित गांवों के लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष रूप से अभियान चलाया जा रहा है. फिलहाल कालाजार के मरीज़ों की संख्या मात्र 32 रह गई हैं, जिसमें विसराल लीशमैनियासिस के 16 और पोस्ट कालाजार डरमल लिश्मैनियासिस के 16 शामिल है. हालांकि इसकी जागरूकता के लिए स्वास्थ्य विभाग के द्वारा लगातार बैनर, पोस्टर के साथ ही प्रचार वाहन के माध्यम से गांव के हर गली व चौक चौराहों पर जिलेवासियों को जागरूक किया जाता है. जिस कारण कालाजार के मामलों में लगातार कमी आ रही है. जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ दिलीप कुमार ने बताया कि छिड़काव कार्य को शत प्रतिशत कराने को लेकर विभागीय स्तर पर कार्यरत जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सलाहकार सुधीर कुमार सिंह को परसा और मकेर जबकि वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी अनुज कुमार को एकमा, तरैया और इसुआपुर, शशिकांत कुमार को मढ़ौरा, मशरख और नगरा, सुमन कुमारी को मांझी, जलालपुर और दिघवारा, सतीश कुमार को पानापुर, बनियापुर और लहलादपुर, पंकज तिवारी को सोनपुर, गड़खा और दरियापुर, मीनाक्षी सिंह को छपरा सदर और रिविलगंज प्रखंड का पर्यवेक्षीय पदाधिकारी बनाया गया है.वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी अनुज कुमार ने बताया कि विसराल लीशमैनियासिस, पोस्ट कालाजार डरमल लिश्मैनियासिस और एचआईवी , वीएल मरीजों की बात की जाए तो विगत वर्ष 2021 में 331 थी तो 2022 में 156 जबकि 2023 में 133 मरीजों का शिनाख्त हुई थी। वहीं वर्ष 2024 में अभी तक मात्र 32 कालाजार मरीजों का इलाज स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जा रहा है. हालांकि जड़ से मिटाने के उद्देश्य से जिले के 204 पंचायतों के 330 राजस्व गांवों में 11, 30, 996 जनसंख्या के 2,20,133 घरों के 7,10,310 कमरों में कालाजार छिड़काव कार्य चल रहा .जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ दिलीप कुमार ने बताया कि ज़िले के सभी प्रखंडों में सर्वे के बाद 330 अतिप्रभावित गांवों का चयन किया गया है। जिसमें लगभग 11 लाख, 30 हज़ार, 09 सौ 96 जनसंख्या वाले आक्रांत गांवों में 72 भ्रमणशील टीम के द्वारा सिंथेटिक पाइरोथाइराइड का छिड़काव 25 मई से अगले लगभग 60 से 65 दिनों तक किया जाएगा.कालाजार के लक्षण के संबंध में सिविल सर्जन डॉ सागर दुलाल सिन्हा ने बताया कि कालाजार रोग लिशमेनिया डोनी नामक रोगाणु के कारण होता है.जो बालू मक्खी के काटने से फैलता है. साथ ही यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी प्रवेश कर जाता है. दो सप्ताह से अधिक बुखार व अन्य विपरीत लक्षण शरीर में महसूस होने पर अविलंब जांच कराना अति आवश्क होता है.नमी एवं अंधरे वाले स्थान पर कालाजार की मक्खियां ज्यादा फैलती हैं यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से ज्यादा से बुखार हो, उसकी तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो और उपचार से ठीक न हो तो उसे कालाजार हो सकता है. मुख्य रूप से पोस्ट कालाजार डरमल लिश्मैनियासिस एक त्वचा रोग है जो कालाजार के बाद होता है.

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