[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home बिहार सारण जेपीयू के शिक्षकों ने लिया ग्रीष्मावकाश में कार्य नहीं करने का निर्णय, कुलपति को सौंपा ज्ञापन

जेपीयू के शिक्षकों ने लिया ग्रीष्मावकाश में कार्य नहीं करने का निर्णय, कुलपति को सौंपा ज्ञापन

0
जेपीयू के शिक्षकों ने लिया ग्रीष्मावकाश में कार्य नहीं करने का निर्णय, कुलपति को सौंपा ज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर

छपरा. जयप्रकाश विश्वविद्यालय के पीजी विभागों तथा विभिन्न कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक ग्रीष्मावकाश में कोई भी कार्य नहीं करेंगे. शिक्षकों का कहना है कि हर साल सत्र सुधारने के नाम पर ग्रीष्मावकाश को रद्द कर दिया जाता है. यह परंपरा गलत है. इस संदर्भ में स्नातकोत्तर शिक्षक संघ जेपीयू ने कुलपति को ज्ञापन देकर अपनी मांग रखी है. विदित हो कि हाल ही में स्नातकोत्तर शिक्षक संघ, जय प्रकाश विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित और सारण, सीवान व गोपालगंज अवस्थित जेपीयू के अंगीभूत महाविद्यालयों द्वारा समर्थित धरना के परिणामस्वरूप शिक्षकों की प्रतिदिन सात घंटे की कार्यावधि से संबंधित निर्गत आदेश को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा निरस्त कर दिया गया. धरना की समाप्ति के पश्चात विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय प्राध्यापकों की ओर से एक ज्ञापन कुलपति कार्यालय को समर्पित किया गया. इस ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने अपनी अन्य प्रमुख मांगों को भी विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष रखा है. शिक्षकों का कहना है कि सत्र-सुधारने के नाम पर शिक्षकों के ग्रीष्मावकाश को रद्द करने की परंपरा पर तत्काल रोक लगे. डीएवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सीवान के सभी शिक्षक विगत माह से प्राचार्य की निरंकुशता, भ्रष्टाचार, प्रताड़ना, प्रशासनिक विफलता आदि कारणों से आंदोलनरत हैं. प्राचार्य को तत्काल प्रभाव से पद मुक्त करते हुए उनके खिलाफ लगाये जा रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और अविलंब कार्रवाई की जाये. शिक्षकों के एनपीएस खाता में नियोक्ता के बकाया अंशदान को जमा कराया जाये. भविष्य में भी शिक्षकों के वेतन मद से एनपीएस अंशदान की रकम कटौती के साथ-साथ नियोक्ता अंशदान को भी ससमय एनपीएस खाता में जमा किया जाये. शिक्षकों का उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन से संबंधित पारिश्रमिक वर्षों से लंबित है. जबकि छात्र-छात्राओं से नामांकन के समय ही मूल्यांकन मद में अपेक्षित राशि ले ली जाती है. अतः शिक्षकों का बकाया भुगतान सुनिश्चित किया जाये. विगत कई परीक्षाओं में शिक्षकों द्वारा किये गये वीक्षण कार्य हेतु मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है. अगर विश्वविद्यालय स्तर से महाविद्यालयों को परीक्षा आयोजित करने हेतु रकम निर्गत नहीं किया गया है, तो अपेक्षित राशि निर्गत की जाये, ताकि वीक्षण कार्य का मानदेय भुगतान हो सके. प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में वेतन देना सुनिश्चित किया जाये. शिक्षकों के डीए डिफरेंसेज एरियर का बकाया भुगतान भी सुनिश्चित किया जाये. नवनियुक्त शिक्षकों की सेवा-संपुष्टि एक वर्ष में की जाये. इन नवनियुक्त शिक्षकों का बकाया वेतन एरियर भी जारी किया जाये. विश्वविद्यालय प्रशासन और महाविद्यालय प्रशासन द्वारा शिक्षकों की गरिमा का सम्मान करते हुए उन्हें निलंबित अथवा स्थानांतरित करने का दबाव नहीं दी जाये. विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में क्वालिटी एजुकेशन के लिए आवश्यक और अपेक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर तथा रिसर्च ओरिएंटेड वातावरण एवं अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाये. ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने कहा है कि मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अगर एक सप्ताह के अंदर निर्णय नहीं लिया जाता है, तो वह अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे और इसकी जिम्मेवारी कुलपति की होगी.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel