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Home बिहार सारण रमजान के दूसरे जुमा पर मस्जिदों में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़

रमजान के दूसरे जुमा पर मस्जिदों में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़

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रमजान के दूसरे जुमा पर मस्जिदों में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़
सांकेतिक तस्वीर

छपरा. पाक महीने रमजान के दूसरे जुमा की नमाज अदा करने के लिए शहर की मस्जिदों में रोजेदारों की खासी भीड़ उमड़ पड़ी. नमाज के लिए अकीदतमंदों का आना दोपहर 12 बजे से ही शुरू हो गया था. हजारों रोजेदारों ने नमाज अदा कर देश में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी. मस्जिदों में वक्ताओं और इमामों ने रमजान की फजीलत पर रोशनी डालते हुए कहा कि रमजान का पहला अशरा समाप्ति की ओर है और 11वें रोजे से दूसरा अशरा, यानी मगफिरत का अशरा शुरू हो जाता है. यह कालखंड अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगने और आत्मशुद्धि का विशेष समय माना जाता है.

गुनाहों से तौबा और हमदर्दी का संदेश

इमामों ने कहा कि हर रोजेदार को गुनाहों से तौबा कर अल्लाह तआला से माफी मांगनी चाहिए और नयी जिंदगी शुरू करने का संकल्प लेना चाहिए. रमजान का सबसे बड़ा पैगाम जरूरतमंदों के साथ हमदर्दी और सहयोग है. उन्होंने कहा कि हर रोजेदार को ईद से पूर्व फितरा अदा करना चाहिए. फितरे के रूप में पौने दो किलोग्राम गेहूं या उसकी कीमत 72 रुपये, तीन किलोग्राम खजूर या उसकी कीमत 1372 रुपये अथवा तीन किलोग्राम किशमिश या उसकी कीमत 2045 रुपये ईद की नमाज से पहले जरूरतमंदों को देना चाहिए. इससे रोजे में रह गयी कमियों की भरपाई होती है और गरीबों की ईद भी खुशहाल बनती है.

मौला मस्जिद के इमाम का संदेश

मौला मस्जिद के इमाम मौलाना जाकिर ने कहा कि इस्लाम मजहब में मगफिरत के लिए तकवा यानी संयम और सत्कर्म जरूरी है. तकवा की राह रोजे से होकर गुजरती है. रोजा अल्लाह की इबादत का माध्यम है और मगफिरत का रास्ता भी. उन्होंने बताया कि रमजान के ग्यारहवें रोजे से बीसवें रोजे तक का समय मगफिरत का अशरा कहलाता है, जिसमें खास तौर पर माफी की दुआ की जाती है.

जामा मस्जिद में कुरान की आयत पर प्रकाश

बड़ा तेलपा जामा मस्जिद में खिताब करते हुए मौलाना रज्जबुल कादरी ने कहा कि पवित्र कुरान में जिक्र है कि जो लोग बिना देखे अपने परवरदिगार से डरते हैं, उनके लिए मगफिरत और अजर-ए-अजीम मुकर्रर है. उन्होंने कहा कि ग्यारहवां रोजा मगफिरत के अशरे की शुरुआत का संकेत है. इबादत के मार्ग पर चलकर ही इंसान अल्लाह की रहमत और माफी का हकदार बन सकता है. वक्ताओं ने कहा कि मगफिरत और मोक्ष का संदेश हर मजहब में दिया गया है. रमजान का महीना आत्मसंयम, इबादत और इंसानियत की सेवा का महीना है, जो समाज में प्रेम और भाईचारे को मजबूत करता है.

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