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प्राकृतिक विधि से खेती करने पर किसानों की आय बढ़ी: राज्यपाल

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प्राकृतिक विधि से खेती करने पर किसानों की आय बढ़ी: राज्यपाल

पूसा : डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के विद्यापति सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई. विषय था बदलते जलवायु परिदृश्य में प्राकृतिक खेती और उसके महत्व. शुभारंभ मुख्य अतिथि बिहार के राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने दीप जलाकर किया. संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती कोई नयी नहीं है. इसे लोगों ने भुला दिया है. उन्होंने कहा कि फसल में रसायनिक खाद के उपयोग ने कुछ समय के लिए फसल के उत्पादन क्षमता को बढ़ा दिया है. लेकिन खेतों की उर्वरा शक्ति का क्षयण हुआ है. प्रधानमंत्री द्वारा घोषित किसान की आय दोगुनी करने में प्राकृतिक खेती का महत्व बहुत बढ़ गया है. हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक विधि से खेती करने पर किसानों की आय बढ़ी है. खेती के मूल पद्धति के त्याग ने फसल के उत्पादन क्षमता को काफी कम कर दिया है. प्राचीन पद्धति से उत्पादित खाद्य पदार्थ पोषणयुक्त होते हैं. उन्होंने कहा कि वृक्ष के बेहतर स्वास्थ्य के लिए वृक्ष आयुर्वेद की पद्धति है. इसकी जानकारी आमलोगों को नहीं है. यह जानकारी लोगों को होना चाहिए. छोटे-छोटे स्कूली बच्चों को वृक्ष आयुर्वेद और प्राकृतिक खेती के विषय में बतानी चाहिए. उन्होंने कहा कि देश के पास विश्व गुरु बनने की सभी शक्तियां हैं. केवल हमें मिलकर उस कार्य को करने की जरूरत है. मुख्य अतिथि ने कुलपति डा पीएस पांडेय को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस तरह की कार्यशाला का आयोजन समय-समय पर होते रहना चाहिए. जिससे कृषि से जुड़े क्षेत्र में बेहतर दिशा मिल सके. उन्होंने कहा कि हमें स्वसंस्कृति, स्वविचार और स्वपद्धति से जुड़ना चाहिए. इसे हमलोगों ने पिछले कुछ वर्षों में भुला दिया है. उन्होंने वामन वृक्ष पर भी चर्चा की. इस अवसर पर बीएससी आनर्स प्राकृतिक खेती कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ करते हुए नेचुरल फार्मिंग ब्रोशर व लीची शहद ब्लिस्टर पैकेजिंग का शुभारंभ राज्यपाल ने किया. कार्यक्रम की संचालन डॉ ऋतंभरा सिंह व कुमारी अंजनी ने किया. धन्यवाद ज्ञापन कृषि स्नातकोत्तर महाविद्यालय अधिष्ठाता डॉ मयंक राय ने किया. मौके पर निदेशक अनुसंधान डॉ एके सिंह, निदेशक बीज डॉ डीके रॉय, निदेशक शिक्षा डॉ उमाकांत बेहरा, डॉ उषा सिंह, पुस्तकालय अध्यक्ष राकेश मणि शर्मा, सूचना पदाधिकारी डॉ कुमार राज्यवर्धन सहित किसान, वैज्ञानिक एवं छात्र-छात्रा उपस्थित थे.

भारत ऋषि व कृषि का देश : कुलपति

डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पीएस पांडेय ने कहा कि भारत ऋषि एवं कृषि का देश है. कृषि धन और ज्ञान को प्रदान करती है. उन्होंने कहा कि कृषि की पारिस्थितिकी भूमि जल, अग्नि, आकाश एवं वायु पर निर्भर करती है. उन्होंने पूसा के इतिहास पर चर्चा करते हुए कहा कि कृषि शिक्षा व शोध की जन्मस्थली पूसा का इतिहास वेदकालीन पोषण देवता से है जो कृषि एवं पशु के देवता माने जाते हैं.

प्राकृतिक खेती की ओर मुड़ने की जरुरत : डा. सिंह

केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के कुलपति डॉ अशोक कुमार सिंह ने कहा कि कृषि रसायन के प्रयोग से मानव जीवन प्रभावित हो रहा है. साथ ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है. इसलिए कृषि वैज्ञानिकों व किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर मुड़ने की जरूरत है.

प्रकृति के रहस्य को समझना जरुरी : कुलकर्णी

भारतीय किसान संघ के संगठन मंत्री दिनेश दत्तात्रेय कुलकर्णी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में प्रकृति के रहस्य को समझते हुए खेती करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती सनातन नियम पर आधारित खेती है.

मानव स्वास्थ्य प्रभावित : डा चंदेल

वाइएस परमार विश्वविद्यालय सोलन के कुलपति डॉ राजेश्वर सिंह चंदेल ने कहा कि रासायनिक खादों के उपयोग से भूमि बंजर होने की स्थिति में है. इससे मानव स्वास्थ्य व पर्यावरण बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है. ऐसे में प्राकृतिक खेती और देसी गाय पर किसानों को ध्यान देने की जरूरत है.

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