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Home बिहार समस्तीपुर फाइलेरिया उन्मूलन : आईडीए-एमडीए कार्यक्रम के तहत दिया गया प्रशिक्षण

फाइलेरिया उन्मूलन : आईडीए-एमडीए कार्यक्रम के तहत दिया गया प्रशिक्षण

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फाइलेरिया उन्मूलन : आईडीए-एमडीए कार्यक्रम के तहत दिया गया प्रशिक्षण

समस्तीपुर : फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर जिले में 10 अगस्त से कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इसको लेकर शुक्रवार को सदर अस्पताल के एएनसीयू हॉल में जिला स्तरीय टीओटी प्रशिक्षण का आयोजन किया गया. प्रशिक्षण कार्यक्रम में बीसीएम और बीएचएम ने भाग लिया. प्रशिक्षक डॉ. विजय कुमार, संताेष कुमार, रंधीर कुमार, पीरामल के आदित्य कुमार थे. कहा गया कि सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम से पूर्व सभी प्रखंडों में नाइट ब्लड सर्वे कराया गया है. यह कार्य 5 से 10 जुलाई तक चलाया गया. प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि प्रखंड स्तर पर ड्रग एडमिस्ट्रेटर आशा को प्रशिक्षण देना है. डोज चार्ट टीम का गठन करना है.माइक्रोप्लान बनाना है.बूथ प्लान बनाना है. दवा की स्थिति, फैमिली रजिस्टर की संख्या की आवश्यकता, रैपिड रिस्पांस टीम का गठन करना है. प्रशिक्षण में बताया गया कि दो साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाओं, अति गंभीर बीमार को दवा नहीं खिलानी है. बताया गया कि फाइलेरिया को हाथी पांव भी कहा जाता है. फाइलेरिया बीमारी संक्रमण आमतौर पर बचपन में होता है. मगर इसके लक्षण 8 से 9 साल के बाद दिखाई देते हैं. यदि बीमारी की पहचान समय से नहीं की गयी यह पूरे शरीर को पूरी तरह से खराब कर देता है.सावधानी बरतकर फाइलेरिया बीमारी को रोका जा सकता है. इसके हर साल सर्वजन दवा सेवन अभियान (एमडीए) चलाया जाता है. जिसमें फाइलेरिया की रोकथाम के लिये लोगों को दवा की खुराक खिलायी जाती है. इसके ट्रिपल ड्रग दिया जाता है, इसमें आइवरमेक्टिन, डीईसी तथा एल्बेंडाजोल खिलाया जाता है. विदित हो कि फाइलेरिया बीमारी क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है. फाइलेरिया पीड़ित व्यक्ति को काटने के बाद वो मच्छर यदि दूसरे व्यक्ति को काटता है, तो ऐसे में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में यह बीमारी फैलने की अधिक संभावना बनी रहती है. प्रशिक्षण में सिविल सर्जन डॉ. एसके चौधरी के अलावा पंकज कुमार, अमरेन्द्र कुमार गुप्ता, मो. नौशाद, आर्यन कुमार, राधास्वामी, प्रीति आदि मौजूद थे.

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