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Samastipur : बाल विवाह व देवदासी प्रथा के विरोधी थे पेरियार

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Samastipur : बाल विवाह व देवदासी प्रथा के विरोधी थे पेरियार

समस्तीपुर . शहर के आरएनएआर काॅलेज में स्नातकोत्तर राजनीतिक विज्ञान विभाग के तत्वावधान में इरोड वेंकट रामासामी ‘पेरियार’ के पुण्यतिथि के अवसर पर वर्तमान परिपेक्ष्य में पेरियार के सामाजिक-राजनीतिक विचारों की प्रासंगिकता विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो दिलीप कुमार ने तथा मंच संचालन स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राजीव रौशन ने किया. कार्यक्रम की शुरुआत दार्शनिक,समाज सुधारक एवं राजनीतिज्ञ पेरियार के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि देकर की गई. मंच संचालक डॉ राजीव रौशन ने संगोष्ठी के विषय वस्तु पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि इरोड वेंकट नायकर रामास्वामी पेरियार बाल विवाह और देवदासी प्रथा के विरोधी थे. वह सामाजिक कार्यकर्ता थे. पेरियार स्त्रियों और दलितों के शोषण के विरोधी भी थे. उन्होने अपने को सत्ता की राजनीति से अलग रखा तथा आजीवन बहुजनों तथा स्त्रियों की दशा सुधारने के लिए प्रयास किया. प्रधानाचार्य प्रो दिलीप कुमार ने कहा कि पेरियार ने भारत में विशेषकर दक्षिण भारत में जातिवादी छुआछूत व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई, पिछड़े एवं दबे कुचले के लिए जनसंख्या के अनुपात में नौकरियों में भागीदारी के लिए संघर्ष कर आरक्षण दिलवाया. साथ ही उन्होंने वैज्ञानिक चेतना एवं भाईचारे के साथ भारत को उन्नत बनाने का मार्ग प्रशस्त किया. पूर्व प्रधानाचार्य प्रो सुरेंद्र प्रसाद ने पेरियार द्वारा चलाए जा रहे हैं आत्म सम्मान आंदोलन,देवदासी प्रथा का विरोध,जातिवादी उन्मूलन की विशेष रूप से चर्चा की. जंतु विज्ञान के सहायक प्राध्यापक डॉ उमाशंकर प्रसाद ने कहा कि पेरियार साहब का सामाजिक– राजनीतिक बदलाव में बड़ा महत्वपूर्ण योगदान रहा है, वह तमिलनाडु में ब्राह्मणवादी प्रभुत्व,अज्ञानता,अंधविश्वास, निरर्थक प्रथा का घोर विरोध किया. संगोष्ठी में डॉ संजय कुमार महतो, संतोष कुमार, डॉ अर्चना कुमारी,डॉ विनय कुमार सिंह, डॉ प्रमोद कुमार ,डॉ अमित आनंद, डॉ रामकुमार रमन, डॉ रत्न कृष्ण झा, डॉ पिंकी कुमारी, डॉ अभिनव साकेत, पुस्तकालय सहायक श्रीमती श्वेता एवं दर्जनों की संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे. इन वक्ताओं ने कहा कि पेरियार ने हिंदू धर्म और जाति व्यवस्था से उत्पन्न असमानता व अन्याय का पुरजोर विरोध किया. अंत में स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ प्रणति ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया.

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