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पिंजरे से आजाद तोता जमीं पर भर रहा स्वामिभक्ति की उड़ान

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पिंजरे से आजाद तोता जमीं पर भर रहा स्वामिभक्ति की उड़ान

विद्यापतिनगर : ये सच है. उन्मुक्त गगन के पंछी पिंजरबद्ध ना गा पायेंगे. रीयल लाइफ में रुपहले पर्दे पर तोता व नायिका का दृश्य मनोरंजन का केंद्र रहा है. वास्तव में बाजिदपुर बाजार में सब्जी बेचने वाली महिला के साथ तोता की स्वामिभक्ति लोगों को रोमांचित कर रहा है. इससे सब्जी बाजार में जायके का मान बढ़ गया है. विद्यापतिनगर प्रखंड का बाजिदपुर सब्जी बाजार इस तोते की स्वामिभक्ति का दीवाना हो चुका है. दीवानगी का आलम यह है कि जायके के शौकीनों के लिए तोता वाली सब्जी दुकान पसंदीदा हो गया है. कहते हैं यहां दादी-अम्मा वाली तोता-मैना की कहानी तो पुरानी हो गयी. अब जायके के शौकीनों की तोता ललिता वाली कहानी जुबानी हो गयी है. पिंजरे में कैद तोता से प्रेम जताने वाले इसे स्वतंत्र खुले में देख दांतों तले उंगली दबा रहे हैं. बाजितपुर बाजार निवासी अमरनाथ साह की पत्नी ललिता देवी वर्षों से सब्जी बेचती है. ललित को किसी ने कहा था तोता पालना बहुत शुभ होता है. तोते आकर्षक पंछी के साथ बुद्धिमान और मनोरंजक होते हैं. इसी ख्यालात को लेकर दो वर्ष पूर्व सब्जी बेचने वाली ललिता ने एक शैशवकाल का तोता खरीदा था. समय के साथ चार बच्चे व तोता की परवरिश एक साथ वो करती रही. धीरे-धीरे बच्चों के साथ तोता भी जवान हुआ. बच्चों में जैसे मां की पहचान व अहमियत का ज्ञान गहराया. ठीक वैसा ही तोता भी सीख पाया. बाल्यावस्था से ही परवरिश ने तोता को स्वामिभक्त बना दिया. पंख बढ़ा. पर नीले गगन में उड़ने के बजाय तोता जमीं पर स्वामिभक्ति की ऊंची उड़ान भरने लगा. घर हो या भीड़ भाड़ वाला सब्जी की दुकान. पिंजरे से स्वतंत्र तोता मालकिन के इर्द-गिर्द विचरण करता रहता है. किसी दूसरे में इसे पकड़ने का साहस नहीं. मालकिन की आवाज पर दौरा आता है. इतना ही नहीं यह तोता सब्जी दुकान का सशक्त पहरेदारी करते देखा जाता है. इसके हरे चमकीले पंख से जैसे दुकान में रखी ताजी सब्जियों का रंग निखर जाता है. इससे बाजिदपुर बाजार का तोता ललिता सब्जी दुकान ग्राहकों के भीड़ का कारण बन जाती है. कहते हैं मूक प्राणी भी मानवीय साथ पाकर संवेदनशील हो जाते हैं. तोता इसका जीवंत उदाहरण है. पिंजरे से स्वतंत्र तोता की चमत्कारिक दिनचर्या देख सब्जी बाजार में जायके के खरीदार रोमांचित हो उठते हैं.

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