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Home बिहार समस्तीपुर अधिकारियों का पासवर्ड कंप्यूटर ऑपरेटरों के हवाले

अधिकारियों का पासवर्ड कंप्यूटर ऑपरेटरों के हवाले

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अधिकारियों का पासवर्ड कंप्यूटर ऑपरेटरों के हवाले

समस्तीपुर . जिले में कई विभागों के अधिकारियों की लॉगिंग का आईडी व पासवर्ड कंप्यूटर ऑपरेटरों के हवाले है. जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड कार्यालयों तक अधिकारी अपने लॉगिंग का आईडी पासवार्ड कंप्यूटर ऑपरेटरों को दे रखें हैं. विभागों का करोड़ों का ट्रांजेक्शन भी होता है. कंप्यूटर ऑपरेटरों के पास अधिकारियों की लॉगिंग का आईडी व पासवर्ड होने से सारा काम उनपर ही निर्भर रहता है. अधिकारी बस ओटीपी बताते हैं. बाकी का सारा काम कंप्यूटर ऑपरेटर ही करते हैं.

सूत्रों के मुताबिक एक-एक अधिकारी की 50-50 लॉगिंग होती है. ऐसे में सारा काम अधिकारी अपने बूते कर ले यह मुश्किल होता है. अधिकारी की मजबूरी होती है कि वे कार्यों के निष्पादन के लिये अपने लॉगिंग का आईडी व पासवर्ड संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटरों को देकर कार्यों का निष्पादन करायें. अब सभी कार्यों का निष्पादन कंप्यूटर के जरिये ही होने लगा है.

मामला आवास योजनाओं का हो, मनरेगा का हो, इलेक्शन का हो, परिवहन विभाग हो, राजस्व व भूमि सुधार का हो करीब-करीब सभी विभागों का काम लॉगिंग के जरिये ही होने लगा है. ऐसी स्थिति में किसी भी बड़ी गड़बड़ी संभावना हमेशा बनी रहती है. अधिकारियों की जान भी हमेशा सांसत में रहती है. अगर किसी तरह की गड़बड़ी जाने व अनजाने में होती है तो अधिकारी भी फंस सकते हैं. अधिकारियों के बूते की बात नहीं है कि वे अपने हर लॉगिंग को खुद हैंडिल करें.

सरवर की भी समस्या रहती है. वहीं कार्य की भी अधिकता रहती है. अगर अधिकारी खुद से अपनी सारी लॉगिंग को हैंडिल करेंगे तो उनके विभाग के कार्यों का निष्पादन शायद संभव नहीं हो पायेगा. सभी विभाग को निर्धारित समय सीमा में अपने कार्यों को पूरा करना होता है. कई विभागों के कार्यों के निष्पादन के आधार पर उनकी रैंगिग भी राज्य स्तर पर तय होती है.ऐसे में कार्यों के तेजी से निष्पादन के लिये अधिकारियों को कंप्यूटर ऑपटेरों पर ही निर्भर रहना पड़ता है.

क्या कहते हैं अधिकारी

अकेले उनके पास 50 से अधिक लॉगिंग है. इलेक्शन से लेकर मनरेगा, आवास योजना, स्वच्छता सहित कई संभागों की अलग-अगल लॉगिंग हैं. यही हाल सभी विभागों का है. ऐसी स्थिति में कंप्यूटर ऑपरेटरों को अपने लॉगिंग का आईडी व पासवर्ड देना मजबूरी होता है. करोड़ाें का ट्रांजेक्शन भी विभागों का होता है. -संदीप शेखर प्रियदर्शी, उपविकास आयुक्त, समस्तीपुर

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