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बिहार में जल संरक्षण प्रथाओं को बढ़ाने की जरूरत : डा जाट

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बिहार में जल संरक्षण प्रथाओं को बढ़ाने की जरूरत : डा जाट

पूसा : वर्ल्ड बैंक के वैज्ञानिकों के दल ने दक्षिण एशिया के लिए स्थित बोरलॉग संस्थान (बीसा) का दौरा किया. ताकि इसकी शोध गतिविधियों का निरीक्षण किया जा सके. जलवायु अनुकूल कृषि (सीआरए) कार्यक्रम के प्रभाव को देखा जा सके. दल में वरिष्ठ विशेषज्ञ जूप स्टाउटजेसडिज्क, अजीत राधाकृष्णन, सत्य प्रिया और फनिश सिन्हा शामिल थे. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के डॉ. रत्नेश कुमार झा, बिहार कृषि विश्वविद्यालय साबौर के डॉ. संजय कुमार सिंह और बिहार के मृदा संरक्षण के सहायक निदेशक डॉ. चंचला प्रिया ने इसमें भाग लिया. इस दौरान, बीसा पूसा के प्रमुख डॉ. राज कुमार जाट ने संस्थान की उपलब्धियों को प्रस्तुत किया. इसमें बिहार में जल संरक्षण प्रथाओं को बढ़ाने में सीआरए कार्यक्रम की सफलता पर जोर दिया गया. वर्ल्ड बैंक दल ने जल-कुशल कृषि प्रबंधन पर आगे सहयोग की संभावनाओं में गहरी रुचि व्यक्त की. वैज्ञानिकों ने बीसा के फार्म में अनुसंधान और बीज उत्पादन क्षेत्र का दौरा किया. वैज्ञानिक सत्य प्रिया ने शून्य जुताई खेती प्रथाओं के दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में पूछताछ की. कुशल जल प्रबंधन, कृषि में ड्रोन का उपयोग, सेंसर आधारित तकनीक व उनकी सटीकता और अवशेष प्रबंधन प्रथाओं की लागत पर चर्चा केंद्रित रही. डॉ. जाट ने किसानों के लिए अनुसंधान और क्षमता निर्माण में बीसा के कार्यों को रेखांकित किया. उन्होंने वैशाली में सीआरए गांवों का भी दौरा किया. जहां बीसा सीआरए प्रथाओं का प्रदर्शन कर रहा है. वर्ल्ड बैंक बिहार सरकार के सहयोग से जलवायु अनुकूल प्रथाओं के माध्यम से क्षेत्र में छोटे और सीमांत किसानों के लिए संसाधन का उपयोग, अधिक उत्पादकता और लाभ बढ़ाने के लिए एक परियोजना को लागू करने की योजना बना रही है. डॉ. राजेश, डॉ सुनील, डॉ. पज़निसामी, अमित कुमार लेंका, डॉ. शुभम और श्री सुभयान दास थे.

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