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Samastipur : लंबित मांगों को ले मदरसा शिक्षकों ने बुलंद की आवाज

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Samastipur : लंबित मांगों को ले मदरसा शिक्षकों ने बुलंद की आवाज

समस्तीपुर . मदरसा डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन के बैनर तले मदरसा शिक्षकों ने शिक्षा भवन परिसर में अपनी लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद की. जिलाध्यक्ष मो. रिजवानुल हक ने कहा कि मदरसा शिक्षकों की समस्याएं लंबे समय से अनसुनी की जा रही हैं. जब तक सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. मदरसा शिक्षकों की प्रमुख मांगों में सभी श्रेणी के शिक्षक और कर्मचारियों के लिए वेतन वृद्धि एवं चिकित्सा भत्ता, नये जेआईटी शिक्षकों के वेतनमान में वृद्धि, मदरसों का वेतन जारी करना शामिल है, जिनकी ऑडिट रिपोर्ट बोर्ड को उपलब्ध है. इसके अलावा हाजिज के वेतन का एकीकरण (मौलवी के पद के समकक्ष मान्यता), 2011 के बाद बहाल क्लर्क और चपरासी के वेतन में संशोधन, पुराने वेतनमान पर बहाल शिक्षकों के लिए पीएफ लागू करने की मांग की गई है. जिला सचिव मो. तनवीर आलम ने कहा कि अधिनियम 1981 के आलोक में बनी अधिसूचना 2022 में संशोधन जरूरी है, ताकि प्रबंध परिषद, शिक्षकों और बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड की स्वायत्तता सुरक्षित रहे. सरकार भी समस्याओं के समाधान में रुचि रखती है, लेकिन जब तक शिक्षकों की आवाज एकजुट होकर नहीं उठेगी, तब तक दबाव नहीं बनेगा. लोकतंत्र में सामूहिक आवाज ही सबसे बड़ी ताकत होती है. इसलिए एमडीओ बिहार ने यह निर्णय लिया है कि आंदोलन को राज्यव्यापी स्वरूप दिया जाएगा. संगठन ने सभी मदरसा शिक्षकों से अपील की है कि वे 17 सितंबर से पटना में होने वाले आंदोलन में सक्रिय भागीदारी करें. एमडीओ का कहना है कि यह संघर्ष न केवल शिक्षकों के हक की लड़ाई है, बल्कि मदरसा शिक्षा की गरिमा और स्वायत्तता की रक्षा का भी आंदोलन है.1128 कोटि के मदरसों में कार्यरत हाफ़िज का वेतन मौलवी के बराबर किया जाए, जो वर्तमान में परिचारी से भी कम है. इसके बाद डीएम को मांग पत्र सौंपा गया. मौके पर खालिद हसीब रिजवी, मौलाना अब्दुल सत्तार कासमी, अनवर हुसैन, मौलाना तौसीफ आलम सहित दर्जनों शिक्षक मौजूद थे.

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