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Samastipur : काेमल फिल्म जागरूक करेगा बच्चों को

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Samastipur : काेमल फिल्म जागरूक करेगा बच्चों को

समस्तीपुर. बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराध के कारण बच्चों को सुरक्षा सिखाना जरूरी है. बच्चों को यौन शोषण से बचाव के लिए उन्हें काेमल फिल्म दिखाकर जागरूक किया जायेगा. प्रारंभिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को गुड टच व बैड टच पर आधारित फिल्म के माध्यम से यौन शोषण से बचाव की जानकारी दी जायेगी. बिहार शिक्षा परियोजना विभाग के एसपीडी ने डीईओ इसका आदेश दिया है. एनिमेटेड फिल्म कोमल के जरिए गुड और बेड टच क्या होता है, इससे कैसे बचाव करें इसकी जानकारी छात्राओं को दी जायेगी. लड़कियों व बच्चियों के साथ यौन अपराध पर रोकथाम के लिए यह कार्यक्रम स्कूलों में चलेगा. स्कूलों में शिक्षा विभाग लड़कियों व बच्चों को यौन उत्पीड़न से बचाव पर बनी बाल फिल्म कोमल दिखायेगा. छात्राओं को बैड टच एवं गुड टच की जानकारी देने के लिए फिल्म की सीडी उपलब्ध कराई जायेगी. कस्तूरबा विद्यालयों में भी फिल्म दिखाई जायेगी. विभाग का मानना है कि छोटी उम्र की बच्ची नासमझी के कारण कई बार बाल यौन अपराध का शिकार हो जाते हैं. फिल्म से बच्चों को बचाव के तरीके बताए जायेंगे. बच्चे जैसे-जैसे बड़े हो रहे हैं उन्हें इस बात की जानकारी होनी बेहद जरूरी है कि कोई अगर उन्हें छूने की कोशिश करे तो क्या कदम उठाना चाहिए. हम बच्चों को जितनी जल्दी अपने शरीर का सम्मान करना सिखायेंगे उतना ही ये उनकी सुरक्षा के लिए बेहतर होगा.

फिल्म को मिल चुका है राष्ट्रीय पुरस्कार

फिल्म को दिखाने के पीछे उद्देश्य छात्राओं को आत्मरक्षा में सक्षम बनाना है. इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है. इस शॉर्ट एनिमेटेड फिल्म को भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की चाइल्ड लाइन संस्था ने बनाई है. फिल्म ने शैक्षिक फिल्म की श्रेणी में वर्ष 2015 का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता है. कोमल एक ऐसी बच्ची की कहानी है, जो न केवल पढ़ाई, बल्कि खेलकूद में भी आगे रहती है. पर एक दिन अचानक उसकी जिंदगी में तूफान आता है, जब उसका पड़ोसी बख्शी नामक व्यक्ति उसके साथ गंदी हरकत करता है. 10 मिनट की वीडियो में बच्चों को नो टच एरियाज के साथ बताया गया है कि यह शरीर केवल आपका है और अगर कोई बिना बताए उन्हें छूता है तो आप विरोध करें हैं. बड़ों को भी बता सकते हैं. या फिर अगर किसी भी बच्चे के साथ ऐसा हो रहा है तो वह चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर संपर्क कर सकते हैं. यह राष्ट्रीय फोन सेवा मुफ्त है. या फिर www.childlineindia.org.in पर शिकायत भी दर्ज करवा सकते हैं. त्वरित कार्रवाई की जायेगी. डीईओ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने कहा कि हर बच्चे को बढ़ने, सीखने और फलने-फूलने के लिए एक सुरक्षित और संरक्षित वातावरण मिलना चाहिए. बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण पहलू उन्हें अच्छे और बुरे स्पर्श के बीच का अंतर सिखाना है. यह न केवल उन्हें नुकसान से बचाने के बारे में है, बल्कि उन्हें सीमा तय करने और कुछ गलत होने पर आवाज उठाने के लिए ज्ञान और आत्मविश्वास से सशक्त बनाने के बारे में भी है. मध्य विद्यालय सिंघियाखुर्द के एचएम देवेंद्र चौधरी बताते है कि स्कूल एक सुरक्षित, खुला वातावरण बना सकते हैं जहां बच्चे संवेदनशील विषयों पर सहजता से चर्चा कर सकें. बदमाशी-विरोधी कार्यक्रम और बाल सुरक्षा कार्यशाला अच्छे स्पर्श और बुरे स्पर्श की शिक्षा के पूरक हो सकते हैं और भावनात्मक और शारीरिक कल्याण सुनिश्चित करने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान कर सकते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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