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बच्चों को एफएलएन किट के साथ स्कूल आने का निर्देश

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बच्चों को एफएलएन किट के साथ स्कूल आने का निर्देश

समस्तीपुर : जिले के सरकारी प्रारंभिक स्कूलों में पहली से पांचवीं तक के बच्चों को एफएलएन किट उपलब्ध कराया गया है. विभाग ने सभी बच्चों को एफएलएन किट के साथ उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश स्कूलों के एचएम को दिया है. विभाग का कहना है कि निरीक्षण के दौरान कई स्कूलों में बच्चे एफएलएन किट के साथ स्कूलों में उपस्थित नहीं देखे गये. जिले में सभी प्रारंभिक स्कूलों के कक्षा एक से पांच तक के बच्चों के बीच एफएलएन किट का वितरण किया जा चुका है. बिहार शिक्षा परियोजना की ओर से यह अभिनव पहल किया गया है. इसके तहत सभी प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के बीच स्कूल बैग में रखकर पानी की बोतल, स्लेट, पेंटिंग एवं ड्राइंग की सामग्रियां, पेंसिल बाक्स आदि दी गयी है, ताकि उनकी सह शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके. बच्चों को पोशाक के साथ स्कूल बैग की कमी महसूस की जा रही थी. बिहार शिक्षा परियोजना ने इस कमी को न सिर्फ पूरा किया बल्कि साथ में और कई उपयोगी चीजें भी दी है, जिनका बच्चे बेहतर उपयोग कर सकेंगे. जिले के प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ाने और बेहतर प्रदर्शन करने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग की ओर से फाउंडेशनल लिट्रेसी एंड न्यूमेरिक किट (एफएलएन) किट मुहैया करायी है. डीपीओ एसएसए मानवेंद्र कुमार राय ने प्रधानाध्यापकों को प्रत्येक कक्षा का भ्रमण करने का भी निर्देश दिया गया है. इसे होगा कि प्रधानाध्यापक को यह पता चलेगा कि किस कक्षा में किस विषय के शिक्षक पढ़ा रहे हैं. बच्चों में उक्त विषय की समझ आ रही या नहीं. बच्चों को दिये गये एफएलएन किट का प्रयोग पढ़ाने में हो रहा या नहीं, यह पता चल पायेगा. आदर्श मध्य विद्यालय सिंघिया खुर्द के एचएम देवेंद्र प्रसाद चौधरी ने बताया कि एफएलएन का अर्थ है कि बच्चों को वो योग्यता हासिल हो जिसके जरिये छात्र पढ़ने-लिखने, बोलने और व्याख्या करने में सक्षम हो सके. इसके साथ ही दिन-प्रतिदिन की समस्याओं को हल करने के लिए मूलभूत संख्यात्मक विधियों और विश्लेषण का उपयोग करने की क्षमता ग्रहण कर सके. इन कौशलों में आयु-उपयुक्त पाठ को समझने की क्षमता और आयु-उपयुक्त गणित करने की क्षमता शामिल है. वर्तमान में शिक्षा प्रणाली में बच्चों को प्रभावी ढंग से ‘सीखकर पढ़ने’ से पहले ‘पढ़कर सीखना’ आना जरूरी है. विभिन्न शोध में यह बात स्थापित की है कि एफएलएन को आदर्श रूप से कक्षा तीन तक हासिल किया जाना चाहिए क्योंकि प्रारंभिक वर्षों के दौरान यह तार्किक सोच को विकसित करता है. कक्षा तीन तक पढ़ने और लिखने के बुनियादी सिद्धांतों और बुनियादी गणित को समझने में असफल होने के कारण, वे उच्च कक्षा में अधिक कठिन विषयों का सामना करने में असमर्थ हो जाते हैं, जिससे अंततः उन्हें शिक्षा छोड़नी पड़ती है. उत्क्रमित मध्य विद्यालय लगुनियां सूर्यकण्ठ के एचएम सौरभ कुमार ने बताया कि एफ एल एन कौशल को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मिशन अधिगम के पांच क्षेत्रों पर ध्यान देगा. पहला बच्चों को उनकी स्कूली शिक्षा के प्रारंभिक वर्षों में पहुंच प्रदान कराना और उनको स्कूलों में बनाए रखना. दूसरा, शिक्षक क्षमता निर्माण, तीसरा, उच्च गुणवत्ता एवं विविधता पूर्ण छात्र एवं शिक्षण संसाधनों/ अधिगम सामग्री का विकास, अधिगम परिणाम उपलब्धि में प्रत्येक छात्र की प्रगति को ट्रैक करना तथा बच्चों का पोषण और स्वास्थ्य (मानसिक स्वास्थ्य सहित) पहलुओं के समाधान पर ध्यान देना. इसका उद्देश्य हमारे बच्चों को समग्र, आनंददायक और उत्पादक शिक्षण अनुभव के माध्यम से सीखने और बढ़ने के लिए एक अनुकूल वातावरण प्रदान करना है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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