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चोटीबेधक कीट से बचाव को वैज्ञानिक ने दी जानकारी

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चोटीबेधक कीट से बचाव को वैज्ञानिक ने दी जानकारी

हसनपुर : गन्ना फसल को चोटीबेधक के प्रकोप से बचाव के लिए देसी जुगाड़ की जानकारी किसानों को दी गयी. पांडीचेरी से आये वैज्ञानिक डॉ एम. थिरुमलाई ने रामपुर के किसान अरुण कुमार राय व अमित कुमार राय के डढिया बंधार में गन्ने के पौधे में चोटीबेधक के प्रकोप को उन्होंने देखा. वैज्ञानिक ने बताया कि एक पीले रंग की बोरी में दोनों ओर गिरीश लगायें. फिर गन्ने के दोनों पंक्तियों के बीच फट्टी लगाकर बोरे को टांग दें. इसके लिए उन्होंने एक एकड़ में पांच जगह बोरी लगाने की बात कही. कहा कि चोटीबेधक तितली बोरी के ग्रीस में चिपक जायेगी. पौधों को भी नुकसान नहीं होगा. वैज्ञानिक ने बताया कि इसी मौसम में गन्ने की फसल में इसका प्रकोप शुरू होने लगता है. छोटे-छोटे कीट पौधे के ऊपरी भाग गोवी को नीचे से खाकर नष्ट कर देते हैं. जिससे पौधे सूख जाते हैं. जिसका गन्ना की गुणवत्ता पर असर पड़ता है. चीनी मिल के उप महाप्रबंधक गन्ना सुग्रीव पाठक ने बताया कि यह कीट तीन पीढ़ियों तक फसल पर प्रहार करता है. कीट लार्वा बनकर फसल को नुकसान पहुंचता है. इसको लेकर पहली पीढ़ी के कीट को खत्म कर देने से फसल को फायदा पहुंचेगा. टीके मंडल ने बताया कि इस रोग से प्रभावित गन्ने की फसल की पत्तियों पर चित्र बना दिखाई देता है. जिसके प्रकोप की स्थिति में मध्य शिरा के पत्तियों में छर्रे जैसे कई चित्र दिखेंगे. जिससे फसल का विकास रुक जाता है, ऐसे में इसका उपचार बेहद जरूरी होता है. वैज्ञानिकों ने ढरहा सर्किल के ढरहा गांव में क्षेत्र भ्रमण के दौरान गन्ना किस्म सीओ 15023 प्रभावित टॉप बोरर के विभिन्न खेतों का निरीक्षण किया. सीओ 0238 प्रभेद के लालसरन रोग से बचाव की भी जानकारी दी. मौके पर रमण सिंह, मोहन राय, मनोज कुमार, संजीव राय, रंजीत सिंह आदि मौजूद थे. —

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