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किसान लंबी अवधि वाले धान का बिचड़ा 10 जून तक गिराएं

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किसान लंबी अवधि वाले धान का बिचड़ा 10 जून तक गिराएं

समस्तीपुर : डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने मौसम को देखते हुये किसानों के जरूरी सुझाव जारी किये हैं. कहा गया है कि अगले 2 से 3 दिनों के दौरान किसान मूंग एवं उड़द की तैयार फसलों की तुड़ाई, रबी मक्का की दौनी व दाने सुखाने का कार्य संपन्न कर लें. 1 से 2 जून के आसपास कहीं-कहीं हल्की वर्षा की संभावना को देखते हुए कृषि कार्यों में सर्तकता बरतें. किसान धान का बिचड़ा बीजस्थली में लगाने का काम शुरु करें. 10 जून तक लंबी अवधि वाले धान का बिचड़ा गिराने का उपयुक्त समय है.लंबी अवधि वाले धान की अनुशंसित किस्मों में राजश्री, मंसूरी, राजेन्द्र स्वेता, किशोरी, स्वर्णा,स्वर्णा सब-1,वीपीटी-5204 तथा सत्यम की नर्सरी लगा सकते हैं. नर्सरी तैयार करने में पौधा होने के लिये किसान खेत में सड़ी गोबर की खाद का व्यवहार करें. नर्सरी में क्यारी की चौड़ाई 1.25 से 1.5 मीटर तथा लंबाई सुविधानुसार रखें. एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में रोपाई के लिये 800 से 1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की नर्सरी तैयार करें. बीज गिराने से पूर्व बीजोपचार जरूर करें. 10 से 25 जून तक मध्यम अवधि वाले धान का बिचड़ा बोने के लिये अनुकूल समय है. जो किसान धान की सीधी बोआई करना चाहते हैं, वे लंबी अवधि वाले धान की किस्म की बोआई अगले सप्ताह में कर सकते हैं, इसके लिये उनके पास सिंचाई की उचित व्यवस्था होनी चाहिये. खरीफ मक्का की बोआई के लिये मौसम अनुकूल है. इसके लिये सुआन, देवकी, शक्तिमान-1, शक्तिमान-2, राजेन्द्र संकर मक्का-3, गंगा-11 किस्मों की बोआई करें. बोआई के समय प्रति हेक्टेयर 30 किलो नेत्रजन, 60 किलो स्फुर एवं 50 किलो पोटाश का व्यवहार करें. प्रति किलोग्राम बीज को 2.5 ग्राम थीरम द्वारा उपचारित कर बोआई करें. बीज दर 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें. खरीफ प्याज की खेती के लिये नर्सरी (बीजस्थली) की तैयारी करें. स्वस्थ पौध के लिये नर्सरी में गोबर की खाद डालें. छोटी-छोटी उथली क्यारियां, जिसकी चौड़ाई एक मीटर एवं लंबाई सुविधानुसार रखें. खरीफ प्याज के लिये एन-53, एग्रीफाउण्ड र्डाक रेड, अर्का कल्याण, भीमा सुपर किस्में अनुशंसित है. बीज गिराने के पूर्व बीजोपचार कर लें. बीज की दर 8-10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें. किसान हल्दी और अदरक की बोआई करें. हल्दी की राजेन्द्र सोनिया, राजेन्द्र सोनाली किस्में तथा अदरक की मरान एवं नदिया किस्में उत्तर बिहार के लिये अनुशंसित है.

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