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Home बिहार समस्तीपुर अच्छी सुगंध के लिए किसान सुगंधित धान का बिचड़ा 20 जून से 10 जुलाई तक गिराएं

अच्छी सुगंध के लिए किसान सुगंधित धान का बिचड़ा 20 जून से 10 जुलाई तक गिराएं

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अच्छी सुगंध के लिए किसान सुगंधित धान का बिचड़ा 20 जून से 10 जुलाई तक गिराएं

समस्तीपुर : डॉ. राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के द्वारा दिये गये समसामयिक सुझाव के मुताबिक किसान सुगंधित धान का बिचरा नर्सरी में 20 जून से 10 जुलाई तक गिराएं. सुगंधित किस्मों का बिचड़ा बीजस्थली में पहले से गिराने से उसकी सुगंध खत्म हो जाती है. वहीं अल्प अवधि वाले धान का बिचड़ा भी अच्छी उपज के लिए इसी अवधि में नर्सरी में गिरायें. मध्यम अवधि के धान के किस्मों को बीजस्थली में गिराने का काम करें. इसके लिए संतोष, सीता, सरोज, राजश्री, प्रभात, राजेन्द्र सुवासनी, राजेन्द्र कस्तुरी, राजेन्द्र भगवती, कामिनी, सुगंधा किस्में अनुशंसित है. एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में रोपाई के लिए 800-1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बीज गिराएं. नर्सरी में क्यारी की चौड़ाई 1.25-1.5 मीटर व लंबाई सुविधा अनुसार रखें. बीज को गिराने से पहले बाविस्टिन 2.0 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से बीजोपचार करें. जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा पर्याप्त हो तथा लंबी अवधि वाले धान लगाना चाहते हैं वे राजश्री, राजेन्द्र मंसुरी, राजेन्द्र स्वेता, किशोरी, स्वर्णा, स्वर्णा सब-1 वीपीटी-5204 एवं सत्यम आदि किस्में 10 जून तक बीजस्थली में गिराने का प्रयास करें. जितने क्षेत्र में धान का रोप करना हो, उसके दशांश हिस्सों में बीज गिराएं. बीज को गिराने से पहले 1.5 ग्राम बाविस्टीन प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें. अल्प अवधि वाले धान की किस्म एवं सुगंधित धान का किस्म का बिचड़ा बीजस्थली में 20 जून से 10 जुलाई तक बोने के लिए अनुशंसित है. हल्दी एवं अदरक की बोआई करें. हल्दी की राजेन्द्र सोनिया, राजेन्द्र सोनाली किस्में तथा अदरक की मरान एवं नदिया किस्में उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित है. हल्दी के लिए बीज दर 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर व अदरक के लिए 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखें. बीज प्रकंद का आकार 30-35 ग्राम जिसमें 3 से 5 स्वस्थ कलियां हो. रोपाई की दूरी 30 गुणा 20 सेमी रखें. बीज को उपचारित करने के बाद बोआई करें. लीची तोड़ने के बाद लीची के बगीचाें की जुताई कर खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करें. प्रति प्रौढ़ पेड़ 60 से 80 किलोग्राम कम्पाेस्ट अथवा गोबर की सड़ी खाद, 2.5 किलोग्राम यूरिया, 1.5 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट, 1.3 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पाेटाश तथा 50 ग्राम सुहागा के मिश्रण को वृक्ष के पूरे फैलाव में समान रूप से बिछा कर मिट्टी में मिला दें. खरीफ प्याज की खेती के लिए नर्सरी (बीजस्थली) की तैयारी करें. स्वस्थ पौध के लिए नर्सरी में गोबर की खाद अवश्य डालें. खरीफ प्याज के लिये एन-53, एग्रीफाउण्ड डार्क रेड, अर्का कल्याण, भीमा सुपर किस्में अनुशंसित है. बीज गिराने के पूर्व बीजोपचार कर लें. बीज की दर 8-10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें. गरमा सब्जियों भिन्डी, नेनुआ, करैला, लौकी (कद्दू), और खीरा की फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई एवं निकाई-गुड़ाई करें. कीट-व्याधियों से फसल की बराबर निगरानी करते रहें. प्रकाेप दिखने पर अनुशंसित दवा का छिड़काव करें. भिंडी और बोरा जैसी फल वाली सब्जियों में भी नेत्रजन का उपरिवेशन करें एवं कीट नियंत्रण के लिए मैलाथियान 2 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 7 से 10 दिनों के अन्तराल पर फल तोड़ने के बाद दो बार छिड़काव करें. कद्दू वर्गीय सब्जियों में चूर्णिल असिता के आक्रमण होने पर केराथेन 1.5 ग्राम प्रति लीटर या 25 किलो सल्फर पाउडर प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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