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Samastipur News:अब डीपीओ करेंगे बच्चों की उपस्थिति का अनुमोदन

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Samastipur News:अब डीपीओ करेंगे बच्चों की उपस्थिति का अनुमोदन

Samastipur News:समस्तीपुर : जिले के सरकारी विद्यालयों में नामांकित छात्र- छात्राओं को लाभुक आधारित योजना की राशि देने से पूर्व शिक्षा विभाग पूरी तत्परता के साथ जांच कर यह सत्यापन करना चाह रही है. ताकि गलत छात्रों के खाते में राशि नहीं जा सके. इसलिए हेडमास्टर, बीईओ के बाद डीपीओ बच्चों की उपस्थिति के आंकड़ों का अनुमोदन करेंगे. डीपीओ के अनुमोदन के बाद ही लाभुक योजनाओं की राशि लेने के लिए बच्चों का डाटा फ्रीज होगा. छात्र-छात्राओं की 75 फीसदी उपस्थिति का रिकार्ड देने के लिए हेडमास्टर को 20 अगस्त तक का मौका दिया गया है. अप्रैल से जुलाई के आधार पर 75 फीसदी उपस्थिति का रिकार्ड हेडमास्टर देंगे. डीईओ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत विभिन्न प्रकार की लाभुक योजनाओं की राशि के हस्तांतरण को लेकर ई-शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से 75% उपस्थिति का आंकड़ा एनआईसी को उपलब्ध कराया जायेगा. इसके आधार पर लाभुक योजना की राशि सीधे लाभुक के बैंक खाते में दी जायेगी. प्रधानाध्यापक द्वारा ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर एक अप्रैल से 31 जुलाई तक नामांकित छात्र-छात्राओं में 75% अथवा उससे अधिक की उपस्थिति वालों के सामने यस व उससे कम उपस्थिति वाले के सामने नो अंकित करना है. बताते चलें कि शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों का आधार बैंक खाते से सीडिंग कराना अनिवार्य कर दिया है. बच्चों को छात्रवृति, पोशाक व नैपकिन समेत सभी तरह के लाभ लेने के लिए आधार बैंक खाता सीडिंग जरूरी हो गया है. सरकार के नये आदेश के बाद बैंक खाते का बिना आधार सीडिंग हुए विभिन्न लाभुक योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा. बताते चलें कि 75 फीसदी उपस्थिति के आधार पर बच्चों को मिलने वाली लाभुक योजनाओं को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक सह डीबीटी नोडल अधिकारी ने इस संबंध में पत्र लिखकर निर्देश दिया था. इसके बाद जिला स्तर से जिले के प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक एवं अनुदानित सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को पत्र लिख कर इसे सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. दरअसल, बहुत सारे बच्चों का आधार बैंक खाता से सीडिंग नहीं है. सनद रहे सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए इस साल से ई-शिक्षाकोष पोर्टल को माध्यम बनाया गया है. इससे पहले मेधा सॉफ्ट पोर्टल के माध्यम से बच्चों को लाभुक आधारित योजना का लाभ मिलता था. बहरहाल, बच्चों की 75 फीसदी उपस्थिति की रिपोर्ट पिछले माह ई-शिक्षाकोष पर मांगी गई थी. ई-शिक्षा कोष पर दिये गये उपस्थिति के आंकड़ों से बैंक खाते का सत्यापन राज्य स्तर पर किया गया है. जिसके बाद यह मामला सामने आया है कि बहुत सारे बच्चों का बैंक खाता उनके आधार से सीडिंग नहीं है. बताते चले केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारों ने लाभुक आधारित योजनाओं का लाभ सीधे लाभुक के खाते में भेज रही है. इसमें किसी तरह का कोई फर्जीवाड़ा न हो, इसे लेकर अब बैंक खाते को आधार से सीडिंग कराया जा रहा है. सरकार ने बच्चों के आधार को भी उनके बैंक खाते से साीडिंग कराने के बाद ही योजनाओं का लाभ देने का फैसला लिया है. ताकि इसमें हो रहे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी. विभाग ने बच्चों के दोहरे नामांकन पर रोक लगाने और सरकारी स्कूल में पढ़ रहे सही बच्चों को ही लाभ देने का फैसला लिया है.

6362 बच्चों का डाटा पेंडिंग

शिक्षा विभाग ने लाभुक आधारित योजनाओं के संदर्भ में सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय में पढ़ रहे विद्यार्थियों की उपस्थिति से संबंधित आंकड़ों की त्रुटियों के समाधान के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारियों को तीन दिन का समय दिया था. विभाग द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में छात्रों को लाभ प्रदान करने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है, इसलिए पुराने डेटा को अपडेट करना आवश्यक है. बचे हुए बच्चों के डेटा को त्रुटिमुक्त करके ई-शिक्षकोष पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया. यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि पात्र छात्रों को जल्द से जल्द योजनाओं का लाभ मिल सके और किसी भी तरह की देरी से बचा जा सके. विदित हो कि जिले के 2858 विद्यालयों में नामांकित 89211 बच्चों का डाटा करेक्शन के लिए दिया गया था. विदित हो कि जिले 8 लाख 16 हजार 142 नामांकित छात्र-छात्राओं की जांच के बाद लाभुक आधारित योजना की राशि दी जायेगी.

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