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Samastipur News: शोर और प्रदूषण से मुक्त शांत और सुंदर होगी दिवाली

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Samastipur News: शोर और प्रदूषण से मुक्त शांत और सुंदर होगी दिवाली

Samastipur News: Diwali will be peaceful and beautiful, free from noise and pollution. प्रभात खबर की पहल पर पीआरडी प्लस टू उच्च माध्यमिक विद्यालय कर्पूरीग्राम की छात्राओं व छात्रों ने पटाखों से परहेज कर मिट्टी का दीया जला कर हरित दिवाली मनाने का संकल्प लिया.

Samastipur News: Diwali will be peaceful and beautiful, free from noise and pollution. “प्रदूषणमुक्त दीपावली मनाने में मिट्टी के दीये का विशेष महत्व होता है. यह अंधेरा समाप्त करने के साथ ही पर्यावरण को प्रभावित करने वाले कीटों को भी समाप्त कर देता है. पुरानों में भी मिट्टी के दीये को काफी महत्ता बताई गई है. स्वच्छ व स्वस्थ दीपावली मनाएं.आज हम पर्यावरण बचाएंगे तो आगे की पीढ़ी को स्वस्थ जीवन देकर जाएंगे. ”

Samastipur News: Diwali will be peaceful and beautiful, free from noise and pollution.समस्तीपुर : समृद्धि के पर्व दीपावली पर आतिशबाजी करने की परंपरा है, लेकिन पटाखों की वजह से एक ही दिन में पर्यावरण प्रदूषण का स्तर चरम पर पहुंच जाता है. पर्यावरण और सेहत को ध्यान में रखते हुए हमें प्रदूषण मुक्त दीपावली मनानी चाहिए. प्रदूषण न फैले इसके लिए इको-फ्रेंडली दीपावली मनाने की जरूरत है, सभी को इस दिशा में जागरूक होना चाहिए. हमें खुशियों के साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखना होगा. सरसों के तेल के दीये जलाएं जिससे प्रदूषण न हो तथा धुएं व तेज आवाज वाले पटाखों से दूरी बनानी चाहिए. प्रभात खबर प्रतिनिधि प्रकाश कुमार ने उपस्थित विद्यार्थियों को बताया कि पटाखों की वजह से पर्यावरण तो प्रदूषित होता ही है, कई बार चिंगारी की वजह से हादसे भी होने का खतरा बना रहता है. खुशियों को पर्व को बेहतर तरीके से मनाने की जरूरत है. आतिशबाजी से फायदा कम नुकसान अधिक है. बच्चों को खतरनाक आतिशबाजी से दूर रखने की जरूरत है. दीपावली भारत का सबसे बड़ा त्योहार है. इस दिन हम जाने-अनजाने में पर्यावरण प्रदूषण बढ़ाने में भागीदार हो जाते हैं. दीपावली के अवसर पर पटाखे जलाने से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है. क्षणिक आनंद के लिए हम पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रदूषित करते है. प्रभात खबर की पहल पर शनिवार को पीआरडी प्लस टू उच्च माध्यमिक विद्यालय कर्पूरीग्राम की छात्राओं व छात्रों ने पटाखों से परहेज कर मिट्टी का दीया जला कर हरित दिवाली मनाने का संकल्प लिया.

Samastipur News: Diwali will be peaceful and beautiful, free from noise and pollution. दीपक जलाने से रोग मुक्त होते हैं, वातावरण स्वच्छ होता है

प्रभारी एचएम किरण झा ने बताया कि दीप शुभ और मंगल का प्रतीक है. साथ ही कल्याणकारी भी है. दीपक जलाने से रोग मुक्त होते हैं, वातावरण स्वच्छ होता है, हवा हल्की होती है. ऐसा केवल हमारा प्राचीन ज्ञान ही नहीं वरन देश के श्रेष्ठ विज्ञान संस्थानों के केमिकल इंजीनियरों का भी यही कहना है. सरसों के तेल में मैग्नीशियम, ट्राइग्लिसराइड और एलाइल आइसो थायोसाइनेट होता है. जो एलाइल जलने पर कीट-पतंगों को अपनी ओर आकर्षित करता है. वे लौ की चपेट में आकर जल जाते हैं. तेल में मौजूद मैग्नीशियम हवा में मौजूद सल्फर और कार्बन के आक्साइड के साथ क्रिया कर सल्फेट और कार्बोनेट बना लेता है. यह विषैले भारी तत्व इस तरह जमीन पर आ गिरते हैं. इसीलिए जले दीपक के आसपास हल्की सफेद राख सी दिखती है. भारी तत्व जमीन पर आने से हवा हल्की हो जाती है और सांस लेना आसान हो जाता है.

शिक्षक सुभीत कुमार सिंह,शिक्षिका डॉ बेबी कुमारी, कुमारी शशिवाला, कीर्ति किरण,पूनम कुमारी,मुस्कान गुप्ता,धीरज कुमार, रंजन ठाकुर ने बताया कि वास्तव में दीपावली में सब कुछ प्रदूषण मुक्त होना चाहिए. न धुआं जनित प्रदूषण, न शारीरिक प्रदूषण,न मानसिक प्रदूषण अर्थात् हर तरह से साफ-सफाई पूर्ण होना चाहिए. इस पर्व को सही मायने में मनाना है तो प्रदूषण मुक्त दीपावली मनानी होगी. दीपावली खुशियों का पर्व है न कि प्रदूषण फैलाकर दुखी करने का. दीपावली दीपों का पर्व है, बेशक दीप जलाएं. ‘दीपावली’ दो शब्दों दीप आवली ‘पंक्ति’ शब्द से मिलकर बना है, इसका वास्तविक अर्थ है ‘दीपों की पंक्ति’. घर के बाहर दीप जलाना बहुत रमणीय लगता है. दीप के साथ-साथ हमें अपने भीतर भी ज्ञान का दीप जलाना चाहिए. न जाने कब इसमें इस तरह का परिवर्तन आ गया कि लोग दीप मात्र ना जलाकर पटाखे भी जलाने लगे. दमघोटू पटाखे की आवाज से सारा वातावरण भयाक्रांत हो जाता है. कहां लोग पहले रावण के भय से मुक्त होने की वजह से दीपावली मना रहे थे, अब दीपावली में आज का रावण रूपी प्रदूषण युक्त पटाखे की आवाज से भयाक्रांत हो रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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