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Samastipur News: सक्षमता परीक्षा पास 654 शिक्षकों के प्रमाणपत्र पर संदेह

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Samastipur News: सक्षमता परीक्षा पास 654 शिक्षकों के प्रमाणपत्र पर संदेह

Samastipur News, Doubt on certificates of 654 teachers who passed competency exam: प्रकाश कुमार, समस्तीपुर : जिले में सक्षमता परीक्षा पास वैसे सैकड़ों शिक्षक जिनका सभी अभिलेख जमा नहीं हो पाया था उनकी फिर से काउंसलिंग की जायेगी. मालूम हो कि जिले के 654 प्रथम सक्षमता पास शिक्षकों का प्रमाण पत्र संदेहास्पद पाया गया था. डीईओ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि निदेशक माध्यमिक शिक्षा के अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि संबंधित शिक्षकों की पुन: काउंसलिंग की जायेगी. इसको लेकर गाइडलाइन भी जारी किया गया है. किसी कारण से काउंसलिंग से गैरहाजिर और वैध कारण वाले शिक्षकों को दोबारा काउंसलिंग का मौका दिया जायेगा. इसी प्रकार नाम, जन्म तिथि, लिंग, आधार संख्या एवं मोबाइल संख्या आदि में त्रुटि वाले मामले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना को दिये गये आवेदन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी. जिन शिक्षकों का प्रमाण पत्र संदिग्ध पाया गया है, उन्हें सही प्रमाण पत्र पोर्टल पर अपलोड करने के लिए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की तरफ से सॉफ्टवेयर में विकल्प प्रदान किया जायेगा. साथ ही पोर्टल पर शिक्षक के द्वारा पहले अपलोड किये गये प्रमाण पत्रों को वैसे ही रखा जायेगा. नवंबर में पुन: काउंसलिंग का मौका दिये जाने की संभावना है. जिले के विभिन्न विद्यालयों में पदस्थापित 8543 शिक्षक अभ्यर्थी सक्षमता परीक्षा में सम्मिलित हुए थे. इसमें 8393 मार्क काउंसलिंग में उपस्थित हुए जबकि 7966 की काउंसलिंग पूरी की गई. 831 शिक्षकों के एक या एक से अधिक अभिलेख में समस्या पायी गई. 1 का फर्जी प्रमाण पत्र था व 176 ने ओरिजनल अभिलेख का प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं करवाया था. मालूम हो कि सक्षमता परीक्षा प्रथम फरवरी माह में आयोजित की गई थी जिसकी काउंसलिंग अगस्त से लेकर सितंबर के मध्य तक की गई थी. लेकिन, कुछ शिक्षक नेताओं ने सवाल उठाया कि जब शिक्षकों का प्रमाण-पत्र पर संदेह के घेरे में था तो उसका भुगतान कैसे किया गया. इन लोगों ने मांग की कि मामले की पूरी जांच होनी चाहिए व जो भी दोषी है उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि इन शिक्षकों की हुई काउंसलिंग में भी कई सवाल खड़े हुए थे व कई बार हंगामा भी हुआ था. विदित हो कि इन शिक्षकों की काउंसलिंग डीआरसीसी में पूर्ण की गई थी.

Samastipur News, Doubt on certificates of 654 teachers who passed competency exam: प्रमाणपत्र संदेहास्पद रहने पर फिर से हुई थी जांच

गत मई माह में जिले के आठ शिक्षक शिक्षा विभाग के रडार पर थे. शिक्षकों द्वारा अपलोड किए गए कागजातों से मामला उजागर हुआ था. तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा निदेशक कन्हैया प्रसार श्रीवास्तव ने आदेश जारी किया था कि जिला शिक्षा पदाधिकारी शिक्षक अभ्यर्थी को विभागीय जांच समिति के समक्ष उपस्थित कराने के लिए सूचना का तामिला कराना सुनिश्चित करेंगे. जिला शिक्षा पदाधिकारी के निर्देश के बावजूद कोई शिक्षक अभ्यर्थी यदि उक्त निर्धारित अवधि में अपने प्रमाण पत्रों की जांच के लिए उपस्थित नहीं होंगे तो विभाग उस शिक्षक अभ्यर्थी को फर्जी घोषित करने का निर्णय ले सकता है. जिसकी सारी जवाबदेही संबंधित शिक्षक अभ्यर्थी की होगी. विभागीय पत्राचार के मुताबिक जाले के प्राथमिक विद्यालय चांधरपुर के प्रकाश कुमार सिंह, उत्क्रमित मध्य विद्यालय मोरवा डीह की चांदनी कुमारी और प्राथमिक विद्यालय जितवरिया पूर्वी की किरण कुमारी, उत्क्रमित मध्य विद्यालय फत्तेहपुर के दीपक कुमार, उत्क्रमित मध्य विद्यालय पुरुषोत्तमपुर मिल्की के मुकेश सहनी, नवसृजित प्राथमिक विद्यालय सुगापाकड़ कोयरी टोल की रुणा कुमारी को मूल प्रमाण पत्र के साथ तलब किया था. जिले के दो शिक्षक अभ्यर्थी का शिक्षक प्रशिक्षण प्रमाण पत्र पर एक ही क्रमांक अंकित मिला. जिले के उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिंघियाघाट की अर्चना कुमारी और मुजफ्फरपुर जिले के मध्य विद्यालय माधोपुर सिरसिया की अर्चना कुमारी का टीईटी प्रमाण पत्र एक समान मिला है. वहीं प्राथमिक विद्यालय साह टोल की सोनी कुमारी का बीटीईटी प्रमाण पत्र पटना और नवादा की भी सोनी कुमारी एक जैसा था.

sakshamata pareeksha paas 654 shikshakon ke pramaanapatr par sandeh: 3545 शिक्षकों का फोल्डर नहीं मिला

जिले में कितने फर्जी शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं? इसकी अपडेट जानकारी शिक्षा विभाग के पास नहीं है. जिला नियोजित शिक्षकों की बहाली में जो फर्जीवाड़ा हुआ है, वो गुत्थी अभी तक निगरानी विभाग नहीं सुलझा सका. 11,454 नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक व प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्र की जांच होनी है. अब तक करीब 3545 शिक्षकों का फोल्डर नहीं मिल पाया है. ऐसे में फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई करने में निगरानी विभाग के पसीने छूट रहे हैं.

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