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Samastipur News:समस्तीपुर विधान सभा क्षेत्र: घात प्रतिघात की आशंका से कई प्रत्याशी हलकान

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Samastipur News:समस्तीपुर विधान सभा क्षेत्र: घात प्रतिघात की आशंका से कई प्रत्याशी हलकान

Samastipur News:समस्तीपुर : समस्तीपुर विधान सभा क्षेत्र में पहले चरण में होने वाले चुनाव के लिए चुनावी गहमागहमी तेज होती जा रही है. मतदाताओं की चुप्पी से सभी बेचैन है. वोट मांगने के लिए दरवाजे पर पहुंच रहे विभिन्न दलों एवं निर्दलीय उम्मीदवारों का लोग हामी तो भर रहे हैं, पर किसके पक्ष में वोट देना है, इसपर कुछ नहीं बोल रहे हैं. नतीजतन इत्मीनान न एनडीए में है न ही महागठबंधन में. चुनाव के पुराने समीकरण में फेर बदल से चिंता की लकीरें हर उम्मीदवार के चेहरे पर दिख रही हैं. मतदाताओं की दुविधा व घात-प्रतिघात से हवा के रुख किसी भी समय बदलने के आसार बने हुए हैं. भीतरघात का खतरा हर ओर मंडरा रहा है. जिन नेताओं को टिकट नहीं मिला, वे अपने ‘भविष्य’ को सुरक्षित रखने की कूटनीति में भीतर ही भीतर जुटे हुए हैं. नामांकन से लेकर जनसंपर्क अभियान व फिर अब तक हुए बड़े नेताओं की सभाओं से जो संकेत मिल रहे हैं, उससे भी कई दिग्गजों को अपनी चुनावी रणनीति को बदलने को बाध्य होना पड़ रहा है. हर वर्ग व समाज तक पहुंचने की बेताबी चुनावी मैदान के हर लड़ाकों में दिख रही है. किसी को मुद्दों की कसौटियां ढीली पड़ने का भरोसा है तो किसी को ‘सुबह के भूले’ को लौट आने की आशा भी.

*दस्तक दे रहे प्रत्याशियों को हामी भर रहे लोग

गांवों के चौक-चौराहों से लेकर खेत-खलिहानों और शहर के सार्वजनिक स्थानों पर बहस-मुबाहिसा से मिल रहे अलग-अलग संकेतों से फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चुनावी माहिरों के लिए भी मुश्किल बना हुआ है. जिले में पहले चरण में आगामी 6 नवंबर को मतदान है. लेकिन,खासकर एनडीए व महागठबंधन के उम्मीदवार हर पल मतदाताओं को गोलबंद करने के लिए अपने तरकश के हर वाण को आजमा रहे हैं. प्रत्याशियों के वार रुम में अर्जेंट रजिस्टर खोल रखा है. ऐसे रजिस्टर में दर्ज क्षेत्र व गांव के माहौल के हिसाब से ‘भ्रमण व भेंट’ की प्राथमिकता दी जा रही है. वहीं समीकरण के हिसाब से मतदाताओं को रिझाने के लिए विश्वस्त व तपे-तपाये कार्यकर्ताओं व नेताओं को लगाया जा रहा है. महागठबंधन व एनडीए के लड़ाके कई स्तरों पर चुनाव प्रचार व जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं. वही जन सुराज व निर्दलीय प्रत्याशी एक दूसरे को शिकस्त देने के लिए सुबह से ही डोर टू डोर भ्रमण कर रहे है.

प्रवासी वोटरों को रोकने के लिए हो रही गुफ्तगू

दूसरे राज्यों में रोजी-रोजगार करने वाले प्रवासी घर पहुंचने लगे हैं, छठ महापर्व मनाकर अगले एक-दो दिन में वापस चले जाएंगे. ऐसे में प्रवासी मतदाताओं को इतने दिनों तक मतदान के लिए रोकना आसान नहीं होगा. नौ दिनों तक अप्रवासियों को रोकना मुश्किल जान पड़ता है. इन वोटरों को रोकने की चिंता में जिले की सियासी पार्टियां डूबी हैं. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि प्रवासियों को चुनाव तक रोकने के लिए सभी दलों ने पुरजोर तैयारी की है. इसमें उनको कितनी सफलता मिलती है, यह तो आने वाला समय ही बता पाएगा. यही नहीं, दलों की यह भी रणनीति है कि पर्व-त्योहार के दौरान घर आए प्रवासी बिहारियों से व्यक्तिगत सम्पर्क साधा जाए. उनसे अनुरोध किया जाए कि एक जिम्मेदार नागरिक के नाते वे पांच साल पर हो रहे चुनावी पर्व में जरूर अपनी भागीदारी निभाएं. देश के भीतर और बाहर लाखों की संख्या में मौजूद ये वोटर चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं. चुनाव की तिथि नजदीक आते देख विभिन्न दलों के उम्मीदवार आम मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए लुभावने वादे कर रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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