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Home बिहार समस्तीपुर Samastipur: जिले के 45 फीसदी मध्य स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी

Samastipur: जिले के 45 फीसदी मध्य स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी

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Samastipur: जिले के 45 फीसदी मध्य स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी

– हो रही स्मार्ट क्लास रूम में कंप्यूटर की ज्ञान देने की तैयारी

समस्तीपुर .

शिक्षा विभाग ने मध्य विद्यालयों के बच्चों के लिए कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य कर दिया है. लेकिन के मध्य विद्यालयों में आधारभूत संरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) की कमी एक गंभीर समस्या है. कई स्कूलों में वर्ग कक्ष और उचित बेंच-डेस्क जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. शिक्षा विभाग ने स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए एक पहल शुरू की थी, जिसमें प्रधानाध्यापकों को स्कूलों का सर्वे कर अपनी जरूरतों को ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर अपलोड करने की जिम्मेदारी दी गई थी. बावजूद करीब पांच सौ विद्यालयों के एचएम ने अपने विद्यालय के जरूरतों को ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर अपलोड नहीं किया. यू-डायस पर अपलोड किये गये आंकड़ों के मुताबिक जिले के 45 फीसदी मध्य स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर की काफी कमी है. जिले में 989 मध्य विद्यालयों में से अधिकांश विद्यालयों की स्थिति अच्छी नहीं है. मध्य विद्यालयों में कंप्यूटर की पढ़ाई नये सत्र से शुरू करने की तैयारी की जा रही है. इसका उद्देश्य बिहार के स्कूली शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाना है. लेकिन वर्ग कक्ष की कमी सबसे बड़ी बाधा है. यू-डायस 2024-25 के अनुसार वर्ग 6 में 69297,वर्ग 7 में 69643,वर्ग 8 में 69928 बच्चे नामांकित है. शिक्षा के क्षेत्र में भारी-भरकम राशि खर्च किए जाने के बावजूद कक्षा के अनुरूप पढ़ाई अभी भी चुनौती है. इसी चुनौती को देखते हुए गर्मी की छुट्टी में शिक्षा विभाग और गैर सरकारी संगठन प्रथम की ओर से समर कैम्प का संचालन किया जा रहा है.

डिजिटल साक्षरता के मामले में सुधार हो रहा

एएसईआर यानी ””अस्थायी वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट”” से जिले में शिक्षा के गुणात्मक सुधार को नापा जा सकता है. 63.5 फीसदी ऐसे छात्र या छात्राएं हैं जो डिजिटल कार्य के लिए स्मार्टफोन ला सकते हैं. 76.6% बच्चे ही स्मार्टफोन का प्रयोग कर सकते हैं. सबसे खास बात ये है कि इनमें से 59.7% बच्चे मोबाइल का पासवर्ड बदलना भी जानते हैं. यह दर्शाता है कि डिजिटल साक्षरता के मामले में सुधार हो रहा है. डीपीओ एसएसए मानवेंद्र कुमार राय बताते है कि समय-समय पर इंफ्रास्ट्रक्चर में वृद्धि की गई है. बिजली, कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्टिविटी की उपयोगिता, उपलब्धता और प्रभाव आधुनिक दुनिया में महत्वपूर्ण कारक हैं, जिसमें शिक्षा क्षेत्र भी शामिल है. इन संसाधनों ने हमारे सीखने, संवाद करने और जानकारी तक पहुंचने के तरीके में क्रांति ला दी है. ये संसाधन आधुनिक शिक्षा का एक अभिन्न अंग बन गए हैं, और उनकी उपलब्धता छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है. बिजली की कमी छात्रों के सीखने के अनुभवों को काफी प्रभावित कर सकती है, क्योंकि यह संसाधनों और प्रौद्योगिकी तक उनकी पहुंच को सीमित कर सकती है. बिजली सप्लाई सुनिश्चित की जा सके इसके लिए शिक्षा विभाग छात्रहित में तत्पर है. शिक्षा में कंप्यूटर एक आवश्यक उपकरण बन गये हैं, जिससे छात्र बड़ी मात्रा में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, अपनी डिजिटल साक्षरता बढ़ा सकते हैं और भविष्य के नौकरी बाजार के लिए महत्वपूर्ण कौशल विकसित कर सकते हैं. एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, विभाग मुख्यालय स्तर से स्कूलों में कंप्यूटर लैब स्थापित करने से पहले, शिक्षकों को कंप्यूटर में दक्ष बनाने का काम भी शुरू करेगा. मध्य विद्यालयों में कंप्यूटर की पढ़ाई नए सत्र से शुरू करने की तैयारी की जा रही है. इसका उद्देश्य जिले के स्कूली शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाना है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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