सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट
Saharsa Modern Crematorium: नगर निगम क्षेत्र के कोरलाही वार्ड संख्या-44 में लगभग 7.77 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित आधुनिक गैस आधारित शवदाह गृह का शुक्रवार को शुभारंभ कर दिया गया. उद्घाटन के साथ ही यहां पहला अंतिम संस्कार भी संपन्न हुआ. हालांकि, शवदाह गृह में अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित 3500 रुपये शुल्क को लेकर विवाद शुरू हो गया है. स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कुछ संगठनों ने गरीब परिवारों के लिए शुल्क माफ या रियायती व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई है.
नगर निगम का कहना है कि आधुनिक शवदाह गृह शुरू होने से लोगों को अंतिम संस्कार के लिए स्वच्छ, व्यवस्थित और आधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी.
3500 रुपये शुल्क पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार रहते हैं. ऐसे में किसी परिजन की मृत्यु के बाद 3500 रुपये की शुल्क राशि जुटाना कई परिवारों के लिए मुश्किल होगा.
लोगों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक सेवा आम लोगों की पहुंच में होनी चाहिए और शुल्क निर्धारण में गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति का भी ध्यान रखा जाना चाहिए.
गरीब परिवारों के लिए रियायत की मांग
फ्रेंड्स ऑफ आनंद के नेता रोहिन दास ने निर्धारित शुल्क का विरोध करते हुए कहा कि कई गरीब परिवारों के पास कफन खरीदने तक के पैसे नहीं होते. ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए 3500 रुपये शुल्क लेना उचित नहीं है.
उन्होंने नगर निगम प्रशासन से शुल्क की समीक्षा कर गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए निःशुल्क अथवा रियायती व्यवस्था लागू करने की मांग की.
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी उठाई आवाज
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से बीपीएल, आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों के लिए विशेष राहत देने की मांग की है, ताकि आर्थिक अभाव के कारण कोई भी परिवार आधुनिक शवदाह गृह की सुविधा से वंचित न रहे.
ईशा फाउंडेशन करेगा संचालन
कोरलाही स्थित आधुनिक गैस आधारित शवदाह गृह का निर्माण बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम के माध्यम से कराया गया है. इसके संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी ईशा फाउंडेशन को सौंपी गई है.
राज्य सरकार के सात निश्चय-2 कार्यक्रम के तहत संस्था को 33 वर्षों के संचालन एवं रखरखाव के लिए एक एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है.
प्रमुख बातें
- कोरलाही में 7.77 करोड़ रुपये की लागत से बना आधुनिक शवदाह गृह शुरू.
- उद्घाटन के साथ पहला अंतिम संस्कार भी हुआ.
- 3500 रुपये शुल्क को लेकर स्थानीय लोगों ने जताया विरोध.
- गरीब एवं बीपीएल परिवारों के लिए शुल्क माफ या रियायत देने की मांग.
- ईशा फाउंडेशन को 33 वर्षों के लिए संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी.
