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Home बिहार सहरसा सहरसा के किसान अमरेंद्र को सोशल मीडिया से अरहल दाल की खेती का मिला आइडिया

सहरसा के किसान अमरेंद्र को सोशल मीडिया से अरहल दाल की खेती का मिला आइडिया

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सहरसा के किसान अमरेंद्र को सोशल मीडिया से अरहल दाल की खेती का मिला आइडिया

एक हजार के खर्च में की तीन लाख की कमाई सहरसा . अभी के दौर में इंटरनेट की दुनिया में हर कोई इससे प्रभावित हो रहा है. कई की जिंदगी भी सोशल मीडिया ने बदल दी है. ऐसे में अब किसान भी सोशल मीडिया से आइडिया ले रहे हैं. सोशल मीडिया से आइडिया लेकर वे नये तरीके से खेती कर रहे हैं. ऐसे में जिले के पतरघट प्रखंड के तिलाठी गांव के किसान अमरेंद्र कुमार ने सोशल मीडिया से अरहर दाल की खेती करने का आईडिया लिया. इस खेती में एक हजार रुपये की लागत लगी व तीन लाख की कमाई हो गयी. सोशल मीडिया से दिए गये आइडिया से किसान अमरेंद्र कुमार की किस्मत बदल गयी. किसान अमरेंद्र कुमार ने अरहर दाल की खेती करके एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसे जानकर हर किसान प्रेरित हो सकता है. अमरेंद्र बताते हैं कि उन्होंने खेती का यह आइडिया सोशल मीडिया से लिया था. वीडियो देखने के बाद उन्हें अरहर दाल की उन्नत खेती एवं उसकी उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की जानकारी मिली. इसी जानकारी के आधार पर उन्होंने मध्य प्रदेश से मात्र एक हजार रुपये में अरहर दाल का बीज ऑनलाइन मंगवाया. उनके पास एक ऐसी जमीन थी, जो काफी समय से बंजर पड़ी हुई थी. उन्होंने जोखिम उठाकर इसी भूमि पर अरहर दाल की खेती की शुरुआत की. बीज बोने के बाद उन्होंने पौधों की देखभाल में किसी भी तरह की कमी नहीं होने दी. उन्होंने कहा कि अरहर दाल की खेती में बहुत अधिक लागत नहीं आती है. सिर्फ सही तरीके से देखभाल एवं सिंचाई की जरूरत होती है. करीब एक साल बाद, उनकी मेहनत रंग लायी एवं फसल तैयार हो गयी. दो एकड़ में बोये गये बीजों से उन्हें कुल 30 क्विंटल का उत्पादन प्राप्त हुआ. बाजार में अरहर दाल की अच्छी कीमत मिलने की वजह से उन्होंने इस फसल से लगभग तीन लाख रुपये की कमाई की. केवल एक हजार रुपये के बीज से इतनी बड़ी आमदनी होना किसी भी किसान के लिए एक बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है. अमरेंद्र कुमार ने कहा कि सहरसा जिले में अरहर दाल की खेती शायद पहली बार इतने बड़े पैमाने पर की गयी जो यह पूरी तरह सफल रहा. उनसी फसल को देखकर आसपास के किसान भी प्रेरित हुए हैं. उन्होंने कहा कि अरहर दाल की खासियत यह है कि एक बार बीज बोने पर यह तीन साल तक उत्पादन देती रहती है. जिससे हर साल दोबारा बीज खरीदने का खर्च भी नहीं आता है. उनकी मानें तो अरहर दाल की खेती खासतौर पर उन किसानों के लिए बेहद फायदेमंद है जिनके पास खाली या कम उपजाऊ जमीन है. इस फसल को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती है एवं इसके पौधे खुद ही मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सक्षम होते हैं.

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