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Home बिहार सहरसा सावन में भी बारिश गायब, किसानों में बेचैनी व तपती धूप से लोग परेशान

सावन में भी बारिश गायब, किसानों में बेचैनी व तपती धूप से लोग परेशान

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सावन में भी बारिश गायब, किसानों में बेचैनी व तपती धूप से लोग परेशान

खेतों में सूखने लगे हैं धान के बिचड़े, बिजली की आंख मिचौनी से रोपनी हो रही प्रभावित

सहरसा. सुबह होते ही आसमान में खिल रही धूप जहां किसानों के छाती पर हथौड़े की तरह चोट पहुंचा रही है. वहीं आम लोग उमस भरी तेज गर्मी से परेशान हैं. आधा सावन महीना बीत चुका है. लेकिन 25 प्रतिशत किसान अभी तक धान की रोपनी नहीं कर पाये हैं. मानसून की बेरुखी से अब जिले में धान की फसल पर असर पड़ता दिखने लगा है. धान के बिचड़े सूखने लगे हैं एवं खेतों में दरारें पड़नी शुरू हो गयी है. किसान परेशान एवं हताश दिख रहे हैं. अहले सुबह से देर रात्रि तक किसान व उनके परिवार आसमान को निहार रहे हैं कि किधर से बारिश हो एवं धान रोपनी शुरू हो सके, लेकिन कजरारे बादल भी अब नजर तक नहीं आ रहे. मौसम विभाग ने अभी बारिश की संभावनाओं से इंकार नहीं किया है. किसान पिछले 10 दिनों से बारिश की आस लगाए बैठे हैं. लेकिन उनके आशा पर तुषारापात हो रहा है. तापमान दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. ऐसे में कुछ दिन और बारिश नहीं हुई तो किसानों के पास धान रोपनी के लिए बिचड़े नहीं होंगे, जो किसान चाहकर भी धान की रोपनी नहीं कर सकेंगे.

अगले तीन दिन मध्यम बारिश की है संभावना

मौसम विभाग ने आगामी तीन दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जतायी है, लेकिन बुधवार के तापमान को देखते नहीं लग रहा कि कहीं से भी बारिश की संभावना है. अब तक पिछले वर्ष की अपेक्षा जुलाई महीने में आधी से भी कम बारिश हुई है. जुलाई महीना भी समाप्त होने को है एवं अब भी किसान बारिश का इंतजार किसान कर रहे हैं. जिससे जिले में धान की रोपनी प्रभावित हो गयी है, जबकि जिले का मुख्य फसल धान की खेती ही है एवं धान की रोपनी जिले में बारिश पर ही आधारित है. ऐसे में बारिश नहीं होने से किसान आसमान की ओर टकटकी लगाये हैं. वहीं कृषि विभाग द्वारा 20 प्रतिशत से अधिक जिले में धान की रोपनी की बात कही गयी है. लेकिन अब तक 10 प्रतिशत धान की रोपनी नहीं हो सकी है. कुछ संपन्न किसान पंप सेट के सहारे धान रोपनी में जुटे हैं. लेकिन अधिकांश किसान आज भी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. जो रोपनी हुई भी है, वह बारिश नहीं होने से सूखने के कगार पर हैं. कोसी क्षेत्र के किसानों में इतनी क्षमता नहीं कि वे पंपसेटों के सहारे जलते धान की फसल को बचा सके. अगवानपुर कृषि विज्ञान केंद्र मौसम विभाग के तकनीकी पदाधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि जिले में बारिश की संभावना जतायी जा रही है. जबकि इन दिनों अधिकतम तापमान में वृद्धि हो रही है.

जिले में अब तक 10 प्रतिशत भी नहीं हो सकी धान की रोपनी

पिछले लगभग 10 दिनों से बारिश नहीं होने से किसानों के हाथ पांव फूल रहे हैं. किसानों द्वारा तैयार किये गये बिचड़े पानी के अभाव में खेतों में सूखने लगे हैं, जिससे किसानों की परेशानी काफी बढ़ गयी है, जबकि अब तक निर्धारित धान रोपनी के लक्ष्य लगभग 76 हजार हेक्टेयर के करीब आधे से अधिक लक्ष्य के धान की रोपनी हो जानी चाहिए. हालात यह है कि अब तक जिले में 10 प्रतिशत भी धान की रोपनी नहीं हो सकी है. जिन किसानों ने पंपसेटों के सहारे धान की रोपनी की है. उनके चेहरे से रौनक गायब है, उनकी फसल सूखने लगी है. बारिश शुरू नहीं होती है तो जिले में धान की फसल पर बड़ा असर पड़ेगा. किसानों के तैयार धान के बिचड़े सूख रहे हैं. जिले में धान की खेती किसानों की जीविका का मुख्य आधार भी है. इसके अच्छे पैदावार से पूरे वर्ष भर किसानों के परिवार का गुजर-बसर एवं बच्चों की पढ़ाई होती है.

भीषण गर्मी में बिजली दे रही दगा

इस बीच जारी भीषण गर्मी में बिजली विभाग का खेल भी बदस्तूर जारी है. जिससे भी धान रोपनी पर असर पड़ रहा है. सरकार की योजना हर खेत में बिजली के पंपसेट से पानी भी कोसी क्षेत्र में आधा अधूरा ही सफल हो पाया है. जिन खेतों के निकट यह सुविधा है भी तो बिजली कटौती से लाभ नहीं मिल पाता है. दिन में घंटों बिजली गुल रहती है, जिससे रोपनी कार्य प्रभावित हो रहा है. खेती के लिए दिन में बिजली उपलब्ध कराने की जरूरत है, जिससे किसानों को लाभ मिल सकता है, लेकिन दिनों दिन में ही लगातार घंटों बिजली कटौती की जा रही है, जिससे किसानों को धान रोपनी में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. दिन तो दिन रात में भी घंटों बिजली गायब रहने से लोग रातजगा करने पर भी विवश हैं. सरकार के 24 घंटे विद्युत आपूर्ति का वादा नकारा साबित हो रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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