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Home बिहार सहरसा विसरा कांड के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था, महीनों से बेकार पड़ा नया मोर्चरी बॉक्स

विसरा कांड के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था, महीनों से बेकार पड़ा नया मोर्चरी बॉक्स

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विसरा कांड के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था, महीनों से बेकार पड़ा नया मोर्चरी बॉक्स

एसपी के निरीक्षण और प्रशासनिक सक्रियता के बावजूद अस्पताल प्रबंधन शुरू नहीं कर सका उपयोग

सहरसा. मॉडल सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में सामने आये विसरा कांड के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उठे गंभीर सवालों के बीच अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है. अस्पताल परिसर स्थित पारा मेडिकल भवन के एएनएम गर्ल्स हॉस्टल परिसर में रखा गया दो शवों की क्षमता वाला नया मोर्चरी बॉक्स कई माह बीत जाने के बाद भी उपयोग में नहीं लाया जा सका है. करोड़ों रुपये की लागत से संचालित अस्पताल में शवों को सुरक्षित रखने के लिए उपलब्ध आधुनिक सुविधा अब भी धूल फांक रही है. बीते 28 मई को वायरल हुए विसरा कांड और लगातार प्रकाशित खबरों के बाद पुलिस अधीक्षक हिमांशु ने मॉडल सदर अस्पताल पहुंचकर पोस्टमार्टम हाउस की व्यवस्था का निरीक्षण किया था. निरीक्षण के दौरान पोस्टमार्टम हाउस की स्थिति, शव संरक्षण व्यवस्था, फॉरेंसिक साक्ष्यों के रखरखाव और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की गयी थी. इसी क्रम में पारा मेडिकल भवन परिसर में रखे गये नये मोर्चरी बॉक्स का भी जायजा लिया गया था, जहां वह बिना उपयोग के पड़ा मिला था.

वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर खड़े हुए थे सवाल

गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व पोस्टमार्टम हाउस से जुड़ा एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कथित तौर पर मानव विसरा खुले में पड़ा दिखाई दिया था और कुत्ते उसे नोचते नजर आये थे. इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये थे. मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली भी कटघरे में आ गयी थी. विसरा कांड के बाद उम्मीद जतायी जा रही थी कि पोस्टमार्टम हाउस की व्यवस्था में तत्काल सुधार होगा और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग शुरू किया जायेगा. लेकिन निरीक्षण के कई दिन बाद भी नया मोर्चरी बॉक्स चालू नहीं हो सका है. इससे स्पष्ट है कि अस्पताल प्रबंधन मामले की गंभीरता को लेकर अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखा रहा है.

जानकारों का कहना है कि मोर्चरी बॉक्स के उपयोग में आने से शवों के सुरक्षित संरक्षण की व्यवस्था बेहतर हो सकती है. इसके बावजूद महीनों से इसे चालू नहीं किया जाना प्रशासनिक उदासीनता और प्रबंधन की लापरवाही को दर्शाता है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सुविधा उपलब्ध है तो आखिर उसे शुरू करने में देरी क्यों की जा रही है. विसरा कांड के बाद उजागर हुई अनियमितताओं ने पहले ही अस्पताल की छवि को नुकसान पहुंचाया है. इसके बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार की रफ्तार बेहद धीमी नजर आ रही है. यदि जल्द ही मोर्चरी बॉक्स को चालू कर पोस्टमार्टम हाउस की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गयी तो स्वास्थ्य विभाग के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर और स्पष्ट हो जायेगा.

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