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Home बिहार सहरसा Saharsa पांच मिनट का सफर बन जाता है तीन घंटे की मजबूरी, नवहट्टा के चचरी पुल पर टिकी हजारों लोगों की जिंदगी

Saharsa पांच मिनट का सफर बन जाता है तीन घंटे की मजबूरी, नवहट्टा के चचरी पुल पर टिकी हजारों लोगों की जिंदगी

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Saharsa पांच मिनट का सफर बन जाता है तीन घंटे की मजबूरी, नवहट्टा के चचरी पुल पर टिकी हजारों लोगों की जिंदगी

सहरसा से राजेश डेनजील की रिपोर्ट : Saharsa News : सहरसा जिले के महिषी विधानसभा अंतर्गत नवहट्टा प्रखण्ड में आज भी लाखो लोगों की जिंदगी अस्थायी चचरी पुल के सहारे चल रही है.यह पुल जहां कुछ महीनों तक राहत देता है, वहीं बरसात आते ही लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है. जनवरी से लेकर 15 जून तक चचरी पुल के माध्यम से आवागमन सुचारु रहता है. इस दौरान लोग महज 5 मिनट में नदी पार कर अपने गंतव्य तक पहुंच जाते हैं. लेकिन जैसे ही जलस्तर बढ़ता है, ये पुल नदी में बह जाते हैं और लोगों को दो-दो नदियों को पार करते हुए करीब 3 घंटे का लंबा और जोखिम भरा सफर तय करना पड़ता है.

लोगों का आरोप, नवहट्टा प्रखंड को विकास के नाम पर ठगा गया

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले 25 वर्षों में क्षेत्र के सांसद और विधायक केवल चुनावी राजनीति तक ही सीमित रहे. नवहट्टा प्रखण्ड को विकास के नाम पर ठगा गया और आज तक स्थायी पुल का निर्माण नहीं हो सका. प्रखंड क्षेत्र में चचरी पुल की स्थिति बेहद अहम है। हाटी घाट पर लगभग एक किलोमीटर लंबा चचरी पुल बनाया जाता है. वहीं असैय कैदली घाट पर दो चचरी पुल तैयार किए जाते हैं, जिनमें एक की लंबाई करीब 800 मीटर और दूसरे की 500 मीटर है.

कई क्षेत्रों की जीवनरेखा है यह चचरी पुल

इन पुलों का निर्माण किसी सरकारी योजना के तहत नहीं होता, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों और नाविकों द्वारा आपसी सहयोग से किया जाता है.इसके लिए वे अपनी जेब से रकम लगाते हैं और आवागमन करने वालों से शुल्क वसूलते हैं. पैदल चलने वाले से 50 रुपये और बाइक सवार से 100 रुपये लिए जाते हैं, जिसके बदले रसीद भी दी जाती है. यह चचरी पुल केवल नवहट्टा प्रखंड के लिए ही नहीं, बल्कि कई जिलों के लोगों के लिए जीवनरेखा बना हुआ है.सुपौल जिले के 4-5 पंचायत, मधुबनी जिले के 4 पंचायत, नवहट्टा प्रखण्ड के 7 पंचायत के करीब 40 गांव और महिषी प्रखण्ड के 4 पंचायत के लोग इसी रास्ते से सहरसा और मधेपुरा के लिए आवागमन करते हैं.

बरसात के समय रोजगार पर पड़ता है असर

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्थायी पुल का निर्माण नहीं किया जाता, तब तक हर साल यही समस्या बनी रहेगी. बरसात के दिनों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सभी पर इसका गहरा असर पड़ता है. इस बड़ी समस्या पर वर्ष 2026 में जदयू के स्थानीय सांसद दिनेश चंद्र यादव ने वैशाली से दरभंगा तक बन रही ग्रीन ऐक्सप्रेव का विस्तार कर दरभंगा के लहरिया सराय से किरतपुर नवहट्टा बिहरा पंचगछिया होते हुए मधेपुरा कॉलेज चौक तक विस्तार करने का लोक सभा मे आवाज उठाकर मांग किया है.

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