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Home बिहार सहरसा मैथिली भाषा के संरक्षण द मिथिलांचल की उन्नति के समक्ष कई चुनौतियां

मैथिली भाषा के संरक्षण द मिथिलांचल की उन्नति के समक्ष कई चुनौतियां

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मैथिली भाषा के संरक्षण द मिथिलांचल की उन्नति के समक्ष कई चुनौतियां

मुर्धन्य साहित्यकार प्रो मायानंद मिश्र की पुण्यस्मृति में 28 को होगा दो तरह के कार्यक्रम सहरसा . मैथिली व हिंदी के मुर्धन्य साहित्यकार प्रो मायानंद मिश्र की पुण्य स्मृति में दो तरह के कार्यक्रमों को समन्वित रूप से एक ही दिन सफलतापूर्वक आयोजित करने को लेकर बैठक की गयी. बैठक विद्यापति नगर में बीएन मंडल विश्वविद्यालय के मैथिली के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ कुलानंद झा की अध्यक्षता में रविवार को की गयी. प्रो. मायानंद मिश्र की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में 28 दिसंबर को संध्याकाल छह बजे से सुबह छह बजे तक सगर राति दीप जरय संबंधित कार्यक्रम पूर्व निर्धारित था. उसी तिथि को ही दिन के एक बजे से संध्या छह बजे तक प्रो मायानंद मिश्र की जीवनी पर अन्य मुख्य वक्ताओं की उपस्थिति में एक अन्य कार्यक्रम को अलग से रखकर दोनों कार्यक्रमों को समन्वित रूप से मनाने का निर्णय लिया गया. 1990 में ही मैथिली अभियानी प्रभास कुमार चौधरी द्वारा सगर राति दीप जरय कार्यक्रम की शुरुआत की गयी थी. लगभग 35 वर्षों से यह कार्यक्रम बिहार, झारखंड एवं भारत के विभिन्न भागों में मैथिली भाषा भाषी द्वारा आयोजित किया जाता रहा है. अभिनव विवाह भवन विद्यापति नगर में मनाये जाने वाले 28 दिसंबर के कार्यक्रम में दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, मधेपुरा एवं सहरसा जिला के विभिन्न विद्वान एवं साहित्यकार भाग लेंगे. कार्यक्रम के संयोजक गोसाईं मंडल, रामेश्वर प्रसाद मंडल एवं दिग्विजय कुमार सिंह को बनाया गया है. इस कार्यक्रम के अलावा अलग से एक अन्य कार्यक्रम अभिनव विवाह भवन में इस तिथि को ही दिन के एक बजे से संध्या छह बजे तक आयोजित होना सुनिश्चित किया गया. इसके संयोजक डॉ केएस ओझा एवं सह संयोजक निर्मल मिश्र को बनाया गया है. दोनों कार्यक्रमों के संदर्भ में बिहार के पूर्व डीजीपी राकेश कुमार मिश्र, पूर्व डीजीपी बीके रवि, मधेपुरा के पूर्व कुलपति आरकेपी रमण, मुजफ्फरपुर के पूर्व कुलपति ज्ञानेंजय द्विवेदी को आमंत्रित किया गया है. कई अन्य नामवर विद्वानों से भी संपर्क किया जा रहा है. दोनों आयोजनों की सफल और यादगार बनाने के लिए नवजागरण मंच संस्थापक प्रो भवानंद मिश्र ने कहा कि आज के समय में मैथिली भाषा के संरक्षण एवं मिथिलांचल की उन्नति के समक्ष कई चुनौतियां हैं. नयी चेतना एवं अभियान को नये आयाम देने की जरूरत है. बैठक में प्रो विनय कुमार चौधरी, प्रो डॉ अशोक कुमार झा, किसलय कृष्ण, डॉ अक्षय कुमार चौधरी, डॉ शांतिलक्ष्मी चौधरी, डॉ आलोक कुमार झा, डॉ सुप्रिया कश्यप, डॉ सतीश कुमार दास, ज्योतिषाचार्य तरुण झा, निर्मल मिश्र, डॉ सुमंत राव, डॉ बिलो राम, दीनानाथ पटेल, केशव कुमार सिंह, मंत्रेश्वर मिश्र, राधेश्याम साह सहित अन्य मौजूद थे.

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