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दो से तीन सप्ताह के अंतराल में एक भाषा हो रही लुप्त : डॉ ऊषा सिन्हा

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दो से तीन सप्ताह के अंतराल में एक भाषा हो रही लुप्त : डॉ ऊषा सिन्हा

आरजेएम कॉलेज में सात दिवसीय मैथिली भाषा अनुवाद पर्याय कार्यशाला आयोजित

सहरसा. रमेश झा महिला कॉलेज में राष्ट्रीय अनुवाद मिशन भारतीय भाषा संस्थान मैसूरू द्वारा भारतीय भाषाओं में अनुवाद पर्याय श्रृंखला के तहत शिक्षा शास्त्र विषय में मैथिली भाषा के अनुवाद पर्याय के लिए पुनरीक्षण कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार से किया जा रहा है. कार्यक्रम समन्वयक महाविद्यालय प्रधानाचार्य प्रो डॉ ऊषा सिन्हा के निर्देशन में आगामी 10 सितंबर तक सात दिवसीय कार्यशाला का आयोजन होगा. कार्यशाला को संबोधित करते प्रधानाचार्य प्रो डॉ ऊषा सिन्हा ने कहा कि भाषा का हमारे जीवन में बहुत महत्व है. भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम है. आज कंप्यूटर युग में बहुत सी भाषाएं मृतप्राय होती जा रही है. भाषा के मृत होने पर पूरी संस्कृति ही नष्ट हो जाती है. उन्होंने कहा कि अनुवाद के जरिए भाषा को जीवित रखा जा सकता है. अनुवाद कार्यशाला भारतीय भाषा संस्थान मैसूरू का यह बहुत ही सराहनीय कदम है. उन्होंने कहा कि राष्ट्र संघ के 2002 गणना के अनुसार पूरे विश्व में चार सौ लिपियां एवं 6141 भाषा थी. लेकिन दिनों-दिन क्षेत्रीय भाषा मृतप्राय होती जा रही है. कोरोना काल के पहले प्रत्येक तीन महीने पर एक क्षेत्रीय बोली लुप्त हो जाती थी. अभी के समय में दो से तीन सप्ताह के अंतराल में एक भाषा लुप्त हो रही है, जो चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि प्रत्येक भाषा की अपनी संस्कृति, अपना भूगोल एवं अपना इतिहास होता है. अपना भारत देश विविधताओं में एकता का देश है. सीनियर रिसोर्स पर्सन राष्ट्रीय अनुवाद मिशन भारतीय भाषा संस्थान मैसूरु डॉ शंभू कुमार सिंह ने कहा कि अनुवाद श्रृंखला के क्षेत्र में अनुवाद उपकरण की कमी की पूर्ति करने की दिशा में इस तरह के शब्दावली का निर्माण भविष्य में मील का पत्थर साबित होगा. कार्यशाला में डॉ अभय कुमार, डॉ राजेश कुमार, डॉ मृगेंद्र कुमार, डॉ शशि रंजन कुमार, डॉ प्रशांत कुमार मनोज, पुरुषोत्तम वत्स, किशलय कृष्ण सहित अन्य शामिल हैं.

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