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हिंदी देश को जोड़ने वाली है भाषाः प्रो देवशंकर नवीन

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हिंदी देश को जोड़ने वाली है भाषाः प्रो देवशंकर नवीन

हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर पीजी सेंटर में हुई एकदिवसीय संगोष्ठी सहरसा . हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को पीजी सेंटर पश्चिमी परिसर में हिंदी साहित्य, शिक्षा व राजनीतिक संस्कृति विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. लाला प्रवीण कुमार सिन्हा ने की. संगोष्ठी में भारतीय भाषा केंद्र, जेएनयू के अनुवाद विभाग के प्रोफेसर डॉ देवशंकर नवीन ने एकल व्याख्यान दिया. प्रो. नवीन ने कहा कि हिंदी भाषा तकनीकी व जन संचार की भाषा के साथ साहित्य-संस्कृति की भाषा है. लेकिन जनसंचार में इसका विरुपीकरण चरम पर है. हिंदी अब हिंग्लिश है व मीडिया सत्ता सापेक्ष हो चुकी है. मीडिया में अतिरंजित खबरों का प्रकाशन चिंता का विषय है. हिंदी ना केवल भारतीय अस्मिता के एकता अखंडता की भाषा है. बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत के पहचान की भाषा है. यह भारत को जोड़ने वाली भाषा है. इससे पहले इस अवसर पर प्रो. देवशंकर नवीन को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन डॉ लाला प्रवीण कुमार सिन्हा ने किया. जबकि संयोजन डॉ सिद्धेश्वर काश्यप व डॉ. अणिमा ने किया. संगोष्ठी का संचालन डॉ. जैनेन्द्र कुमार ने किया. मौके पर हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ उदय कुमार, मणिभूषण वर्मा, डॉ अरुण कुमार सिंह, डॉ प्रीति गुप्ता, डॉ श्याम मोहन मिश्रा, डॉ मयंक भार्गव, डॉ कुमारी सीमा, डॉ कविता, ममता रानी, प्रेम शंकर सिंह, सत्यप्रकाश, शिवजी, अमित सहित अन्य शिक्षक, विद्यार्थी एवं कर्मचारी मौजूद थे.

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