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Home बिहार सहरसा सहरसा के बाबा वाणेश्वर के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता, जानिए इसकी अद्भुत महिमा

सहरसा के बाबा वाणेश्वर के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता, जानिए इसकी अद्भुत महिमा

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सहरसा के बाबा वाणेश्वर के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता, जानिए इसकी अद्भुत महिमा
बाबा वाणेश्वर मंदिर

सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट

Aaj Ka Darshan: सावन का महीना आते ही बिहार के कई शिव मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है. लेकिन कोसी क्षेत्र में एक ऐसा प्राचीन शिवधाम भी है, जहां भक्त सिर्फ जल चढ़ाने नहीं, बल्कि अपनी अधूरी मनोकामनाओं के साथ पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि बाबा वाणेश्वर के दरबार से कोई भी सच्चा भक्त निराश होकर नहीं लौटता.

सहरसा जिले के कहरा प्रखंड के देवना गांव में स्थित बाबा वाणेश्वर मंदिर आज भी हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. वर्षों पुराना यह शिव मंदिर धार्मिक महत्व के साथ-साथ आध्यात्मिक शांति का भी बड़ा केंद्र माना जाता है. यही वजह है कि सावन, महाशिवरात्रि और विशेष पर्वों पर यहां श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं.

क्या है बाबा वाणेश्वर मंदिर की वह मान्यता, जो खींच लाती है हजारों भक्त?

देवना स्थित बाबा वाणेश्वर मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों के बीच गहरी आस्था है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं.

इसी विश्वास के कारण कोसी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि बिहार के कई जिलों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. सुबह की पहली आरती से लेकर देर शाम तक मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंजता रहता है.

पटना: बीएसएससी अभ्यर्थियों ने लंबित परीक्षाओं की तिथि जारी करने की मांग को लेकर आयोग कार्यालय में प्रदर्शन किया. 10-15 दिन में तारीख नहीं आने पर महाआंदोलन की चेतावनी दी.

Aaj Ka Darshan: सावन और महाशिवरात्रि में क्यों बदल जाता है पूरा माहौल?

सावन का महीना शुरू होते ही बाबा वाणेश्वर मंदिर का स्वरूप पूरी तरह बदल जाता है. दूर-दूर से कांवरिये जल लेकर पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला लगातार चलता रहता है.

महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष पूजा के साथ बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया जाता है. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होने वाले धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव कराते हैं. इसी अवसर पर कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है.

सिर्फ मंदिर नहीं, धार्मिक पर्यटन का भी बन चुका है बड़ा केंद्र

बाबा वाणेश्वर मंदिर अब सिर्फ पूजा-अर्चना का स्थान नहीं रह गया है. यह धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण स्थल बन चुका है. यहां आने वाले श्रद्धालु दर्शन के साथ-साथ मंदिर की प्राचीन परंपरा और शांत वातावरण का भी अनुभव करते हैं.

हाल के वर्षों में मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया है. इससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक वातावरण मिल रहा है और मंदिर की भव्यता भी बढ़ी है.

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आस्था के साथ जुड़ी है पूरे इलाके की पहचान

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा वाणेश्वर की कृपा से क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. यही कारण है कि परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ति के लिए लोग यहां विशेष पूजा-अर्चना करते हैं.

श्रावणी मेला हो या महाशिवरात्रि, बाबा वाणेश्वर मंदिर हर बार लाखों लोगों की आस्था का केंद्र बन जाता है. यह मंदिर न केवल धार्मिक विश्वास का प्रतीक है, बल्कि कोसी क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान भी है.

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