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Home बिहार पूर्णिया जनहित के लिए लड़ने वाले भोला बाबू हमें हमेशा बहुत याद आयेंगे!

जनहित के लिए लड़ने वाले भोला बाबू हमें हमेशा बहुत याद आयेंगे!

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जनहित के लिए लड़ने वाले भोला बाबू हमें हमेशा बहुत याद आयेंगे!

मनायी गयी दिवंगत भोलानाथ आलोक की तीसरी पुण्यतिथि

पूर्णिया. अपने शहर के अभिभावक कहे जानेवाले, कई श्रमिक संगठनों के कर्ताधर्ता रहे दिवंगत भोलानाथ आलोक की तीसरी पुण्यतिथि कचहरी चौक पर भोलानाथ आलोक स्मारक स्थल सह मिनी कम्युनिटी हॉल में मनाई गई. इस मौके पर पूर्णियावासियों ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया और कहा कि सदैव जनहित के लिए लड़ने वाले पूर्णिया जिले एवं आसपास के जिलों में होने वाले सभी साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं जनपयोगी सामाजिक आन्दोलनों में नेतृत्व कर्ता के रूप में वे बहुत याद आयेंगे. बुधवार को आयोजित पुण्यतिथि समारोह की अध्यक्षता आकाशवाणी पूर्णिया के सेवानिवृत्त केन्द्र निदेशक विजयनंदन प्रसाद कर रहे थे. मुख्य अतिथि के रूप में विधायक विजय कुमार खेमका और विशिष्ट आतिथि के रुप में प्रो. शिवमुनि यादव, अरविंद कुमार झा एवं डा.राम नरेश भक्त मौजूद थे. विषय प्रवेश एवं स्वागत संभाषण डा. के.के.चौधरी ने किया जबकि राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त प्रधान अध्यापक संजय कुमार सिंह संचालन कर रहे थे. वक्ताओं ने कहा कि साहित्यकार, समाजसेवी, पत्रकार संग सामाजिक आन्दोलनों के कार्यकर्ता व नेतृत्वकर्ता के रूप में अपनी विशेष पहचान बना चुके भोला बाबू किसी परिचय के मुंहताज नहीं थे. अपनी खनकती आवाज एवं ठसक के साथ जीने के आदी रहे भोला बाबू ने गरीबों के दुख-दर्द को शिद्दत से महसूस किया. विभिन्न मंचों पर उनकी बेहतरी के लिए आवाज उठायी. पुराने पूर्णिया जिले के सिकटी प्रखण्ड के क्लर्क के रूप में नियुक्त हुए. सरकारी सेवा के क्रम में ही वे पूर्णिया समाहरणालय में भी रहे. बाद में वे वार्ड आयुक्त भी रहे. वक्ताओं ने उनके स्वभाव की भी खीब चर्चा की और कहा कि अपने नाम के अर्थ को भी कविता में ही कहते थे ‘दूसरे के हिस्से का जहर पी जाना भोला होना है.जिसका कोई नहीं है,उसकी आवाज उठाना ही नाथ होना है. जहां सदियों से अंधेरा है,वहां दीया जलाना ही आलोक होना है. उनके जीवन से जुड़ी पांच प्रकाशित पुस्तकों पर भी चर्चा हुई. इस मौके पर अनंत लाल यादव,बाबा बैद्यनाथ,गिरिजा नंद मिश्र, श्याम लाल पासवान,गौतम वर्मा, अशोक कुमार सिंह गणवरिया व कविता देवी की खास उपस्थिति रही.

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