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Home बिहार पूर्णिया मारखीधार में ह्यूमपाइप देकर श्रमदान से ग्रामीणों ने बनाया चलने योग्य रास्ता

मारखीधार में ह्यूमपाइप देकर श्रमदान से ग्रामीणों ने बनाया चलने योग्य रास्ता

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मारखीधार में ह्यूमपाइप देकर श्रमदान से ग्रामीणों ने बनाया चलने योग्य रास्ता

अमौर. अमौर प्रखंड के विष्णुपुर पंचायत के मैत्रा गांव में मारखीधार नदी में ग्रामीणों ने स्वयं श्रमदान कर नदी में ह्यूमपाइप डालकर तथा मिट्टी भरकर रास्ते को चलने योग्य बना दिया है. श्रमदान में जुटे ग्रामीणों ने बताया कि विष्णुपूर पंचायत के वार्ड न. 02 मैत्रा गांव में पक्की सड़क का निर्माण हुआ है लेकिन सड़क के बीच बहने वाली मारखी धार नदी में पुल का निर्माण नहीं होने से गांव के हजारों की आबादी को आवागमन में घोर परेशापी का सामना करना पड़ता है. स्थानीय ग्रामीण अकबर अली, मो दाऊद, मो जुबेर, मो इसराइल, फकीर मोहम्मद आदि का कहना है कि यह गांव चारों तरफ से नदी से घिरा हुआ है और गांव से बाहर निकलने यही एकमात्र मार्ग है. इस महत्वपूर्ण गेपिंग पुल से गांव की एक हजार से अधिक की आबादी जुड़ी हुई है. इसी पुल मार्ग से होकर स्कूली बच्चे पढ़ाई के लिए साइकिल से स्कूल जाते हैं . बरसात के दिनों में नदी में पानी भर जाता है, जिससे बच्चों का स्कूल जाना दूभर हो जाता है. इसके अलावा पुल न होने से बारिश के दिनों में गांव के लोगों को गांव से बाहर निकलना दुश्वार हो जाता है. पुल नहीं रहने से सबसे अधिक परेशानी मरीजों को होती है. कई बार एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती और मरीजों को खटिया पर उठा कर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. गांव के लोग नदी में केले के पौधे का भूरा बनाकर नदी में आर पार करते हैं जिसमें हमेशा डूबने का खतरा बना रहता है . ग्रामीणों ने कहा कि इस गेपिंग पुल निर्माण को लेकर कई बार हरेक स्तर पर गुहार लगायी. आखिरकार गांव की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अब वे किसी के भरोसे नहीं रहेंगे . किसी ने फावड़ा उठाया, किसी ने कुदाल, तो किसी ने मिट्टी ढोने का काम संभाला. ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया और श्रमदान कर नदी में मिट्टी भरकर तथा ह्यूमपाइप डालकर क चलने लायक बना दिया . गांव की महिलाएं भी इस कार्य में पीछे नहीं रहीं .इस कार्य में मैत्रा गांव के अकबर अली, मो दाउद, मो जुबेर, मो इसराईल, मो जफरूल, मो मोइज, मोइन उद्दीन, मो एकहाल, मो हारूण, मो मजहर, मो याकूब, मो अकीद, मो सकील, मो तोहीद, महबूब आलम, मो अख्तर, फकीर मोहम्मद, समीम अख्तर, मो युनुश, मो मेराज सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी निभायी.

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