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Home बिहार पूर्णिया बारिश का पानी बह न जाए यूं ही, नदियां जोड़ने की जरूरत : सांसद

बारिश का पानी बह न जाए यूं ही, नदियां जोड़ने की जरूरत : सांसद

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बारिश का पानी बह न जाए यूं ही, नदियां जोड़ने की जरूरत : सांसद

जल शक्ति मंत्रालय की बैठक में पप्पू यादव ने दिया सुझाव कोशी क्षेत्र की बाढ़ समस्या पर जल शक्ति मंत्री को सौंपा ज्ञापन पूर्णिया. कोसी-सीमांचल क्षेत्र की बाढ़ से जुड़ी गंभीर समस्याओं और दीर्घकालिक समाधान की मांग को लेकर पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने शुक्रवार को जल शक्ति मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में भाग लिया. बैठक के दौरान उन्होंने जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा. इसमें कोसी उच्च बांध परियोजना (कोशी हाई डैम), तटबंधों की मरम्मत, नदियों के गाद निकासी और बिहार की जल योजनाओं की विफलता से संबंधित अहम मुद्दे उठाये. सांसद पप्पू यादव ने कहा कि नेपाल की सप्तकोशी और भारत की कोसी नदी पर प्रस्तावित बहुउद्देशीय कोशी उच्च बांध परियोजना वर्षों से लंबित है. यह परियोजना लगभग 3000 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन, सिंचाई सुविधा और दक्षिण पूर्व नेपाल व उत्तरी बिहार को बाढ़ नियंत्रण देने में सक्षम है. उन्होंने पूछा कि अब तक इसके निर्माण की शुरुआत क्यों नहीं हुई, जबकि इसकी आवश्यकता और संभावनाएं दोनों स्पष्ट हैं. उन्होंने कहा कि गंगा, कोशी, गंडक, बूढ़ी गंडक सहित बिहार की सभी नदियों को आपस में जोड़ना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वर्षा ऋतु के बाद सूखने वाली दक्षिण बिहार की नदियों में जल उपलब्ध हो सके. गंगा नदी में फरक्का बैराज बनने के बाद 1974 से ही भारी गाद जमा होने लगी है, जिससे कोसी नदी का प्रवाह धीमा हो गया है और पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, कटिहार, सुपौल, मधेपुरा जैसे जिले हर साल जलमग्न हो जाते हैं. पप्पू यादव ने बिहार में जल जीवन मिशन (हर घर नल का जल योजना) की विफलता का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि इस योजना पर राज्य में 25,904 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन आज भी कई गांवों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं है. साथ ही उन्होंने कोशी केनाल परियोजना (735 करोड़) और कोशी-मेची लिंक योजना में लगातार हो रही देरी और कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाये. सांसद ने बताया कि बाढ़ से बचाव के लिए केवल बड़े इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स नहीं, बल्कि वैकल्पिक, विकेन्द्रीकृत और प्राकृतिक समाधान यथा – कोसी-मेची लिंक योजना के माध्यम से अतिरिक्त पानी को महानंदा बेसिन तक ले जाने, तटबंधों की मजबूती और समय-समय पर मरम्मत, बैराजों का प्रभावी प्रबंधन और गाद निकासी, चाउर, तालाब, लिफ्ट इरिगेशन और चेक डैम जैसी स्थानीय व्यवस्थाएं आदि पर को जरुरी बताया. उन्होंने कहा कि चूंकि कोसी एक अंतरराष्ट्रीय नदी है और अधिकांश जल नेपाल से आता है, इसलिए भारत-नेपाल के बीच समन्वय और जल संसाधनों के साझा प्रबंधन के बिना बाढ़ समस्या का स्थायी समाधान असंभव है. ज्ञापन में बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली, चेतावनी तंत्र, आपदा प्रबंधन केंद्रों का निर्माण और बाढ़ क्षेत्र में निर्माण पर रोक जैसे गैर-संरचनात्मक उपायों पर भी बल दिया गया.

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