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Home बिहार पूर्णिया जलाने लगी है धूप, हीट स्ट्रोक से बचने की जरूरत

जलाने लगी है धूप, हीट स्ट्रोक से बचने की जरूरत

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जलाने लगी है धूप, हीट स्ट्रोक से बचने की जरूरत

विभाग हुआ सतर्क सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर विशेष व्यवस्था की चल रही तैयारी

पूर्णिया. अप्रैल माह के शुरू होते ही सूरज की तपिश बढ़ने लगी है. बीते मार्च माह तक जहां जिले में

वातावरण का माहौल कूल कूल था और सुबह हल्की चादर की जरूरत पड़ रही थी वहीं अब तेज धूप शरीर को जलाने लगी है. ऐसे में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है. चिकित्सकों का कहना है कि जाड़े की समाप्ति के बाद अमूमन अप्रैल माह से वातावरण की गर्मी और तेज धूप का असर लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा पड़ता है. मानव शरीर को मौसम के साथ एडजस्ट करने में थोड़ा वक्त लगता है. इस वजह से हीट स्ट्रोक का मामला इनदिनों बढ़ जाता है. इसलिए इनदिनों बेहद सतर्क रहने की जरुरत है. दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी इसके लिए तैयारियां की जा रही है ताकि ऐसे मरीजों को त्वरित राहत पहुंचाई जा सके. सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कनौजिया ने बताया कि जिले के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में इसकी व्यवस्था की जा रही है. इसके तहत अस्पतालों में विशेष लू वार्ड जहां कूलर, पंखे, आवश्यकतानुसार एसी आदि की व्यवस्था के साथ साथ ओआरएस की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है. जहां मरीजों की लगातार निगरानी की जायेगी और उनका उपचार किया जाएगा. इसके अलावा आरओ वाटर मशीन ठंडा पानी मशीन वगैरह के इंतजाम किये जा रहे हैं.

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लू से बचाव के उपाय

– खाली पेट घर से न निकलें

– दोपहर 12 बजे से लेकर 4 बजे के बीच बाहर जाने से परहेज करें

– पानी, नींबू पानी, छाछ आदि का सेवन करें

– पानी की अधिक मात्रा वाले फलों का इस्तेमाल करें

– सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनें

– सिर को कपड़े से ढक कर रखें

– छाता और धूप चश्मा का उपयोग करें

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लू लगने के लक्षण

– तेज बुखार आना

– त्वचा का शुष्क हो जाना,

– पसीना नहीं निकलना

– सिरदर्द या चक्कर का आना

– जी मिचलाना, उल्टी और धड़कन तेज होना

– बेहोश हो जाना

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लू लग जाने पर

– मरीज को छायादार स्थान पर रखकर ठंडक देना

– नींबू-पानी, ओआरएस का घोल पिलाना

– कच्चा आम पन्ना अथवा नारियल पानी देना

– शरीर में पानी की कमी न होने देना

– नजदीकी अस्पताल या चिकित्सक से सलाह लेना

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बोले सिविल सर्जन

बढती गरमी को देखते हुए जिले के सभी अस्पतालों में लू मरीजों के लिए विशेष डेडिकेटेड कक्ष बनाने का निदेश दिया गया है. जिनमें अनुमंडलीय अस्पतालों में 5 बेड एवं पीएचसी स्तर पर 3 बेड की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है. इसके अतिरिक्त विशेष रूप से ओआरएस काउंटर, आरओ एवं कूल वाटर की मशीनें, कूलर के साथ साथ आवश्यकतानुसार एसी का भी प्रावधान किया जा रहा है. आनेवाले दिनों में कुछ और भी विशेष व्यवस्था की जायेगी.

डॉ. प्रमोद कनौजिया, सिविल सर्जन

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