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Home बिहार पूर्णिया ठंड में सड़कों पर नहीं भटकेंगे बेसहारा, आश्रय गृह बनेगा सहारा

ठंड में सड़कों पर नहीं भटकेंगे बेसहारा, आश्रय गृह बनेगा सहारा

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ठंड में सड़कों पर नहीं भटकेंगे बेसहारा, आश्रय गृह बनेगा सहारा

शहर के आश्रय गृह में किये गये हैं रहने व ठंड से बचाव के पूरे उपाय

ठंड के मौसम में राहगीर भी ठहर सकते हैं, कोई शुल्क देय नहीं

पूर्णिया. ठंड का मौसम अब रफ्तार पकड़ रहा है. इसमें संतोष की बात यह है कि शहर के राहगीरों को अब भटकना या सड़क पर ठिठुरना नहीं पड़ेगा. नगर निगम ने जिला मुख्यालय में आश्रय स्थल की व्यवस्था की है, जो ठंड के इस मौसम में राहगीरों का सहारा बनेगा. जिला मुख्यालय में बेसहारा व जरूरतमंद लोगों के लिए नगर निगम ने शहर के दो जगहों पर आश्रय गृह बना रखा है. यहां रात में जरूरतमंद लोग ठहर सकेंगे और सर्दी से अपना बचाव कर सकेंगे. दोनों आश्रय गृह में रहने और ठंड से बचाव के पूरे उपाय किए गये हैं.

जरूरतमंद लोगों के लिए राहत भरी खबर है कि शहर में कोई राहगीर ठंड में ठिठुरे नहीं, इसके लिए शहर में दो स्थलों पर आश्रय गृह की व्यवस्था की गयी है. शहर के कोर्ट स्टेशन के नजदीक तीन मंजिला आश्रय गृह है, जबकि दूसरा आश्रय गृह खुश्कीबाग अब्दुलानगर में है. शहर में रिक्शा व ठेला चालक, जरूरतमंद लोगों या राहगीरों के लिए रात के समय ठहरने के लिए आश्रय गृह रामबाण साबित हो रहा है. अहम तो यह है कि इन आश्रय गृहों में ठहरने के लिए कोई शुल्क देय नहीं है. कोर्ट स्टेशन स्थित बने आश्रय गृह में 50 बेड लगाए गये हैं. इसमें ग्राउंड फ्लोर पर 19 बेड, फर्स्ट फ्लोर पर 23 बेड और सेकेंड फ्लोर पर 18 बेड की व्यवस्था है. इसके अलावा यहां पेयजल और शौचालय समेत कई सुविधाएं भी हैं. यहां महिलाओं के ठहरने के लिए अलग से व्यवस्था है. आश्रय गृह के तीन मंजिले इमारत के मिडिल फ्लोर में महिलाओं के लिए बेड लगे हुए हैं, जबकि आश्रय गृह के सबसे ऊपर और ग्राउंड फ्लोर पर पुरुषों के ठहरने के लिए व्यवस्था है.

सुविधा मुहैया कराने के लिए तत्पर रहते निगमकर्मी

नगर निगम के कर्मचारी यहां सुविधा मुहैया कराने के लिए हमेशा तत्पर हैं. भीषण ठंड का दौर शुरू हो गया है. भीषण ठंड में असहाय लोग और ठेला, रिक्शा चालक सबसे ज्यादा परेशान होते हैं. वे लोग शाम ढलते ही आशियाने के लिए इधर-उधर भटकते हैं. इनके लिए आश्रय गृह बहुत बेहतर जगह है. वहीं नगर निगम की ओर से भीषण ठंड शुरू होते ही चौक-चोराहे, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर असहाय लोगों को आश्रय गृह तक पहुंचाया जाता है. जानकारी के अभाव में जब असहाय लोगों को कहीं कोई ठौर नहीं मिलता है तो चौक-चौराहों के किसी दुकान के नीचे, रेलवे स्टेशन या मंदिर में किसी तरह रात बिताने की कोशिश करते हैं, लेकिन शाम ढलते ही भीषण ठंड के ठिठुरन असहाय लोगों को सोने भी नहीं देती. यही वजह है कि आश्रय गृह कर्मी घूम-घूम कर अहसाय लोगों को ढूंढ कर लाते हैं और उन्हें ठहराते हैं.

भोजन के लिए देना होगा ऑर्डर

आश्रय गृह में भोजन की व्यवस्था नहीं है, लेकिन यदि भोजन चाहिए, तो इसके लिए ऑर्डर देना पड़ता है. यदि ज्यादा लोग पहुंच गये और उन्हें भोजन चाहिए, तो आश्रय गृह में ही व्यवस्था की जाती है. इसका शुल्क देय है. इसके अलावा सभी सुविधाएं दी गयी हैं. आश्रय गृह में लोगों के ठहरने के लिए बेड के साथ-साथ ओढ़ने के लिए कंबल व तकिया की भी व्यवस्था है. मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी की भी व्यवस्था की गयी है. यहां के कर्मियों का दावा है कि निगम की ओर से प्रचार-प्रसार भी किया जाता है, ताकि जरूरतमंद लोग आश्रय गृह का लाभ उठा सकें. इन्हीं लोगों के लिए नगर निगम ने आश्रय गृह बना रखा है. उक्त आश्रय गृहों में लोग ठंड से अपनी सुरक्षा सहज रूप से कर सकते हैं. यहां ऐसे भी लोग रात में रह सकते हैं, जिन्हें देर रात कहीं जगह नहीं मिली. वे यहां आराम से रात बिता सकते हैं.

इस आश्रय गृह में जाने से कतराते हैं लोग

खुश्कीबाग अब्दुल्लानगर में बने आश्रय गृह में लोगों जाने से कतराते हैं. अब्दुल्लानगर का आश्रय गृह ऐसी जगह पर है, जहां लोग जाना पसंद नहीं करते हैं. रात हो गयी और जरूरत भी महसूस हो रही है, तो लोग इस तरफ झांकने से भी कतराते हैं. लोगों का कहना है कि अब्दुल्लानगर का आश्रय गृह सही मायने में रेड लाइट एरिया का इलाका पड़ता है, जहां का माहौल अलग किस्म का होता है. कई लोग उधर जाने से डरते भी हैं. आम लोग ही नहीं, यहां तक कि असहाय लोग भी इधर आना पसंद नहीं करते हैं.

आंकड़ों के आइने में

50 बेड लगाए गये हैं कोर्ट स्टेशन आश्रय गृह में23 बेड की व्यवस्था फर्स्ट फ्लोर पर दी गयी है

18 बेड की व्यवस्था सेकेंड फ्लोर पर है

19 बेड ग्राउंड फ्लोर पर लगाए गये हैंठंड से बचाव को लेकर रिक्शा, ठेला चालक, मजदूर, असहाय व जरूरतमंद लोगों के लिए शहर में दो आश्रय गृह हैं. कोर्ट स्टेशन और अब्दुल्लानगर में आश्रय गृह है. आश्रय गृह में ठहरने की उत्तम व्यवस्था है. बेड, कंबल से लेकर शौचालय व पेयजल तक की व्यवस्था है. ठंड से बचाव के लिए आश्रय गृह में लोग निशुल्क रूप से रहते हैं.

पवन कुमार पवन, सिटी मैनेजर, पूर्णियाB

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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