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Home बिहार पूर्णिया कड़क ठंड से अब खेती में भी खलल, किसानों की बढ़ी चिंता

कड़क ठंड से अब खेती में भी खलल, किसानों की बढ़ी चिंता

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कड़क ठंड से अब खेती में भी खलल, किसानों की बढ़ी चिंता

आलू में झुलसा तो सरसों समेत कई फसलों पर लाही का खतरा

पूर्णिया. लगातार पड़ रही ठंड, शीत लहर और मौसम के मिजाज से अब खेती किसानी में भी खलल की आशंका बढ़ गयी है, जिससे किसानों के माथे पर बल नजर आने लगे हैं. एक ओर जहां आलू उत्पादक किसान संभावित पिछात झुलसा को लेकर चिंतित हैं, वहीं तिलहनी सहित अन्य फसलों में भी लाही कीट की समस्या बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं. हालांकि रबी मौसम की सब्जियों सहित गेहूं और मक्का के लिए यह मौसम कुछ ठीक है, लेकिन आलू की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप बढ़ सकता है. इस मामले में बड़हरी के किसान बमशंकर मेहता बताते हैं कि उनकी सब्जी की खेती में लाभ हुआ है और फलन भी अच्छा है लेकिन यह मौसम आलू की फसल के लिए घातक साबित हो सकता है इसलिए पूर्व से ही इनपर सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए उन्होंने दवा का छिड़काव तेज कर दिया है.

दो हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में हो रही आलू की खेती

कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष पूरे जिले में लगभग दो हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की खेती हो रही है. खास तौर पर जिले के श्रीनगर एवं कृत्यानंद नगर सहित कुछ अन्य प्रखंडों में भी काफी बड़े भूभाग में किसान आलू की पैदावार में लगे हैं. कुछ किसानों ने बताया कि इस दफा खरीफ धान की कटनी के समय हुई बारिश की वजह से उनके आलू की पैदावार प्रभावित हुई थी, जबकि मक्का की फसल लगाने में भी थोड़ी विलंब हुई, जिस वजह से मक्का में इस मौसम का असर तो बच गया, लेकिन वर्तमान मौसम को देखते हुए उन्होंने आलू की जो भी तैयार फसल है, उसे खेतों से अब निकालने लगे हैं और उनमें अब मक्का लगाने की तैयारी कर रहे हैं.

कृषि वैज्ञानिक किसानों को दे रहे बचाव के लिए फसलों में स्प्रे करने की सलाह

कृषि वैज्ञानिकों का भी कहना है कि इस तरह का मौसम, समय की प्रतिकूलता आलू और तिलहन की फसलों को प्रभावित कर सकती हैं. ऐसे में किसानों को पूर्व से ही बचाव के उपाय के रूप में स्प्रे करने की सलाह दी जाती है, ताकि इन फसलों को नुकसान होने से किसान बचा सकें.

जिस प्रकार तापमान में गिरावट है और वातावरण में नमी की अधिकता है, उससे आलू की पैदावार में पिछात झुलसा का असर हो सकता है. इससे बचाव के लिए किसान भाई किसी भी फफूंदनाशी दवा का स्प्रे आलू की फसल पर करें. अभी के मौसम को देखते हुए प्रतिदिन खेत की निगरानी के साथ-साथ हर सप्ताह फफूंदी नाशक का इस्तेमाल करें और दवा बदल बदल कर करें. दवा की मात्रा और पानी का घोल दिए निर्देश के अनुसार ही तैयार करें. इसके अलावा सुबह के समय आलू में हल्की सिंचाई भी करते रहें. सरसों में येलो स्टीकी फंदा लगायें, इससे लाही कीट से बचाव होगा.

डॉ गोविंद कुमार, कृषि वैज्ञानिक, केवीके जलालगढ़

रबी मौसम में इन दिनों तापमान में गिरावट सामान्य बात है, लेकिन मौसम की वजह से अगर किसानों की फसल को नुकसान पहुंचता है, तो इसके लिए कृषि विभाग द्वारा मुआवजा सहायता राशि प्रभावित किसानों को दिए जाने की भी व्यवस्था है. विभाग के नियमानुसार निर्धारित फसल नुकसान की स्थिति में यह राशि किसानों को देय होगी.

डॉ राहुल कुमार, जिला उद्यान पदाधिकारीB

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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