मुख्य बातें:
पूर्णिया से अखिलेश चंद्रा की रिपोर्ट
Acharya Tulsi Mahaprayan Diwas: पूर्णिया शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र गुलाबबाग में तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के नौवें अधिशास्ता और अणुव्रत आंदोलन के प्रवर्तक, राष्ट्र संत आचार्य श्री तुलसी का 30वां महाप्रयाण दिवस बेहद श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया. ‘महाप्राण गुरुदेव’ के रूप में आयोजित इस विशेष धर्मसभा में जैन समाज के प्रबुद्ध जनों और स्थानीय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. इस पावन मौके पर उपस्थित जैन मुनिश्री प्रशांत कुमार जी और मुनिश्री कुमुद कुमार जी ने आचार्य श्री तुलसी के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुए उन्हें आधुनिक युग का महान समाज सुधारक और युगदृष्टा संत बताया.
कड़े अनुशासक भी थे और करुणा के सागर भी; मुनिश्री प्रशांत कुमार का प्रवचन
- विलक्षण व्यक्तित्व: आचार्य श्री तुलसी का जीवन अपने आप में अनूठा था. वे जितने कठोर अनुशास्ता और कुशल प्रशासक थे, उतने ही उनके भीतर करुणा और वात्सल्य की अमृत वर्षा होती थी, जो हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती थी.
- महिला उत्थान और समाज सुधार: आचार्य प्रवर ने रूढ़िवादिता के खिलाफ देश में बड़ी अलख जगाई. उन्होंने सामाजिक बंधनों और पुरानी रूढ़ियों में जकड़े महिला समाज को अपनी दिव्य प्रेरणा और पुरुषार्थ के बल पर प्रगतिशीलता के मुख्य पथ पर लाकर खड़ा किया.
- वैश्विक अवदान: मानव जाति के आंतरिक कल्याण, चरित्र निर्माण और मानसिक शांति के लिए उन्होंने ‘अणुव्रत’ और ‘प्रेक्षाध्यान’ (Preksha Meditation) जैसे रचनात्मक व वैज्ञानिक कार्यक्रम दुनिया को सौंपे.
भारतीय संत परंपरा के देदीप्यमान नक्षत्र थे गुरुदेव: मुनिश्री कुमुद कुमार
मुनिश्री कुमुद कुमार जी ने कहा कि आचार्य श्री तुलसी भारतीय संत परंपरा के एक उज्ज्वल नक्षत्र थे. वे केवल धार्मिक गुरु नहीं, बल्कि उच्च कोटि के साहित्यकार, प्रखर कवि और संगीतकार भी थे. उन्होंने राष्ट्रीय अखंडता और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए जीवन भर अथक प्रयास किए. तेरापंथ संघ को तेजस्वी बनाने के साथ-साथ संपूर्ण जैन समाज की एकता के लिए उनके द्वारा किए गए ऐतिहासिक प्रयास हमेशा चिरस्मरणीय रहेंगे.
Acharya Tulsi Mahaprayan Diwas: मंगलाचरण से हुई शुरुआत; समाज के दिग्गजों ने गीतों से दी भावांजलि
- इन्होंने व्यक्त किए श्रद्धासुमन: इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल द्वारा प्रस्तुत सुमधुर मंगलाचरण से हुआ. इसके बाद तेरापंथ सभा के अध्यक्ष मनोज पुगलिया, महिला मंडल अध्यक्ष बबिता मालू, अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज डागा, कटिहार से पधारे समागम जगत खटेड, युवा शक्ति गुलाबबाग से मोहित संचेती और स्थानीय युवती मंडल के सदस्यों ने अपने वक्तव्य और भजनों के माध्यम से गुरुदेव तुलसी को भावभीनी अंजलि अर्पित की.
- संचालन और आभार प्रदर्शन: इस आध्यात्मिक गोष्ठी का कुशल संचालन मुनि श्री कुमुद कुमार जी ने किया, जबकि कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी अतिथियों, आढ़तियों और श्रावक-श्राविकाओं के प्रति रेखा डागा ने धन्यवाद और आभार ज्ञापित किया.
