पूर्णिया. हाल के वर्षों में प्राइवेट आर्म्स गार्ड रखने का पूर्णिया में काफी प्रचलन बढ़ा है. बड़े व्यवसायी हों या जमीन के कारोबारी, गार्ड रखना इनके लिये मजबूरी बन गयी है. यूं कहें कि अब प्राइवेट गार्ड रखना ‘स्टेटस सिंबल’ बन गया है. बॉडीगार्ड का यह दायित्व है कि हर हाल में अपने ऑनर की सुरक्षा का ध्यान रखना. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि बॉडीगार्ड की आंखों के सामने उसके ऑनर की हत्या हो जाये, तो ऐसे गार्ड के रखने की क्या आवश्यकता है. बीते 27 जनवरी को गुलाबबाग के युवा व्यवसायी सूरज बिहारी की हथियारबंद लोगों ने उनके प्राइवेट गार्ड की उपस्थिति में गोली मार कर हत्या कर दी. इस घटना के बाद प्राइवेट गार्ड के औचित्य को लेकर शहर में चर्चा गर्म है. हलांकि घटना के बाद मक्का व्यवसायी के गार्ड ने अपनी सफाई में कहा कि उन्हें ऑनर ने ही हथियार को गाड़ी में रख देने को कहा था. अगर थोड़ी देर के लिए उसकी बात मान भी ली जाये तो क्या सुरक्षा के ख्याल से सतर्कता बरतना उसका काम नहीं था? लोगों का कहना है कि अगर वह ऑनर के पीछे हथियार लेकर खड़ा रहता तो ऐसी नौबत नहीं आती. घटना के समय जब तक गार्ड गाड़ी से हथियार लाने दौड़ा, तबतक बहुत देर हो चुकी थी.