पत्नी बनीं गुरु, भवानीपुर के रवि कुमार राहुल बने ग्रामीण विकास पदाधिकारी
दो बार बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा में असफल होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारने वाले भवानीपुर के रवि कुमार राहुल ने आखिरकार 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता हासिल कर ग्रामीण विकास पदाधिकारी (आरडीओ) का पद प्राप्त किया. रेलवे की नौकरी के साथ सेल्फ स्टडी और पत्नी रितु के मार्गदर्शन ने उनकी सफलता की राह आसान बनाई.
भवानीपुर (पूर्णिया) से इंदेश्वरी यादव की रिपोर्ट
Purniya News : नगर पंचायत भवानीपुर निवासी अनिता देवी एवं अर्जुन सहनी के पुत्र तथा स्वर्गीय मणिलाल सहनी के पौत्र रवि कुमार राहुल ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता प्राप्त करते हुए ग्रामीण विकास पदाधिकारी (आरडीओ) के पद पर चयनित होकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है. उनकी इस उपलब्धि से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है. घर पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया और सम्मान समारोह आयोजित कर उन्हें सम्मानित किया. रवि अपनी सफलता का श्रेय अपनी मेहनत, अनुशासित तैयारी और अपनी पत्नी रितु के मार्गदर्शन को देते हैं.
कठिन दौर में पत्नी ने बढ़ाया मनोबल
रवि की सफलता का सफर आसान नहीं रहा. सिविल सेवा की तैयारी के दौरान उन्हें लगातार दो बार बीपीएससी परीक्षा में असफलता का सामना करना पड़ा. हालांकि उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमजोरियों को पहचाना और नई रणनीति के साथ तैयारी जारी रखी. इस कठिन दौर में उनकी पत्नी रितु ने न केवल उनका मनोबल बढ़ाया, बल्कि एक गुरु और मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हुए सही दिशा भी दिखाई.
पटना में सिविल सेवा की तैयारी के दौरान रवि की मुलाकात रितु से हुई थी. उस समय दोनों प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। वर्ष 2018 में रवि का चयन रेलवे में स्टेशन मास्टर के पद पर हुआ, जबकि रितु इंडियन बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर (पीओ) बनीं. बाद में दोनों ने परिवार की सहमति से विवाह किया. विवाह के बाद रितु ने 67वीं बीपीएससी परीक्षा भी उत्तीर्ण की, लेकिन निजी कारणों से उन्होंने बैंक की नौकरी जारी रखने का निर्णय लिया. बीपीएससी परीक्षा का अनुभव होने के कारण उन्होंने रवि को तैयारी की रणनीति, समय प्रबंधन और उत्तर लेखन की बारीकियों से अवगत कराया.
रेलवे की शिफ्ट ड्यूटी के कारण नियमित पढ़ाई करना रवि के लिए चुनौतीपूर्ण था. इसके बावजूद उन्होंने हर दिन निर्धारित समय निकालकर सेल्फ स्टडी की. उन्होंने लक्ष्य आधारित अध्ययन, निरंतर अभ्यास और अनुशासित दिनचर्या को अपनी सफलता का आधार बनाया. आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और बीपीएससी की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में उनका चयन ग्रामीण विकास पदाधिकारी के रूप में हो गया.
दादा की प्रेरणा का परिणाम : रवि
रवि का परिवार एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार है. उनके पिता अर्जुन सहनी किसान हैं, जबकि माता अनिता देवी आंगनबाड़ी सेविका हैं. उनके दादा स्वर्गीय मणिलाल सहनी सामाजिक कार्यकर्ता एवं राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे. वे हमेशा रवि को सिविल सेवा में जाने के लिए प्रेरित करते थे. अपनी सफलता को दादा की प्रेरणा का परिणाम बताते हुए रवि भावुक हो उठे. उन्होंने कहा कि यदि आज उनके दादा जीवित होते तो सबसे अधिक खुशी उन्हें ही होती. उन्होंने अपनी यह सफलता अपने दिवंगत दादा को समर्पित की.
रवि की शैक्षणिक यात्रा भी प्रेरणादायक रही है. वर्ष 2007 में उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय से मैट्रिक तथा वर्ष 2009 में डीएवी पब्लिक स्कूल, रांची से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद बेंगलुरु स्थित ग्लोबल एकेडमी ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक किया. इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया और पटना में रहकर तैयारी शुरू की.
ग्रामीणों ने किया सम्मान समारोह का आयोजन
रवि की सफलता पर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है. सम्मान समारोह में प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि बिट्टू यादव, पूर्व प्रमुख दीपक कुमार सुमन, मुख्य पार्षद सावन कुमार, पूर्व प्रमुख अवधेश मंडल, समाजसेवी कमलेश्वरी मंडल, डॉ. ब्रह्मदेव यादव, पैक्स अध्यक्ष रूपा रानी, बिंदेश्वरी विमल, ललित कुमार सहनी, शिक्षक अरविंद कुमार मंडल, सुनील कुमार मंडल, समाजसेवी सदानंद सहनी, शंकर सहनी, रवि कुमार सहित अनेक लोगों ने उन्हें सम्मानित करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं. ग्रामीणों ने कहा कि रवि की सफलता क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा है और यह साबित करती है कि कठिन परिश्रम, धैर्य और सही मार्गदर्शन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.
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