मुख्य बातें:
पूर्णिया से अभिषेक भास्कर की रिपोर्ट
Purnia University: पूर्णिया विश्वविद्यालय (Purnea University) के परीक्षा विभाग से लापरवाही और विसंगति का एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा पास कर चुके एक मेधावी छात्र के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं. सीमांचल के जिस छात्र ने कड़े परिश्रम के बल पर बीपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में परचम लहराया और राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) के पद पर चयनित हुआ, उसे पूर्णिया विश्वविद्यालय ने अब आधिकारिक दस्तावेजों में फेल घोषित कर दिया है. इस खुलासे के बाद जहां पीड़ित छात्र और उसके परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई है, वहीं विश्वविद्यालय की परीक्षा मूल्यांकन और अंकपत्र संधारण प्रणाली की भारी गोपनीयता और लापरवाही उजागर हो गई है.
मूल प्रमाणपत्र लेने पहुंचे छात्र की खुशियां हुईं काफूर; परीक्षा नियंत्रक ने की पुष्टि
- सफलता के बाद लगा झटका: चयनित अभ्यर्थी अपनी आगामी जॉइनिंग और सिविल सेवा की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए आवश्यक मूल प्रमाणपत्र (डिग्री) प्राप्त करने विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग पहुंचा था.
- विवि का व्यवहार और चौंकाने वाला रिकॉर्ड: इस संबंध में जब पूर्णिया विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. अमरकांत सिंह से पूछताछ की गई, तो उन्होंने मामले की आधिकारिक पुष्टि की. उन्होंने बताया कि बीपीएससी में रेवेन्यू ऑफिसर के पद पर चयनित छात्र जब कार्यालय आया, तो उसकी राष्ट्रीय स्तर की सफलता को देखते हुए परीक्षा विभाग में उससे काफी सम्मानपूर्वक व्यवहार किया गया.
- रिकॉर्ड जांच में हुआ खुलासा: परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि जब मूल प्रमाणपत्र निर्गत करने के लिए विवि के मुख्य परीक्षा डेटाबेस और भौतिक दस्तावेजों (डॉक्युमेंट्स) का गहन अवलोकन किया गया, तो संधारित रिकॉर्ड में उक्त छात्र को स्नातक (Graduation) में अनुत्तीर्ण (फेल) पाया गया.
औपबंधिक और अंकपत्र के आधार पर दी थी परीक्षा; सवालों के घेरे में व्यवस्था
इस पूरे मामले ने अब एक बड़े कानूनी और प्रशासनिक विवाद का रूप ले लिया है, जिसकी कड़ियां नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट की गई हैं:
| घटनाक्रम और प्रक्रिया | वर्तमान स्थिति एवं बड़ा सस्पेंस |
| पूर्व की व्यवस्था | पूर्णिया विवि की नियमावली के अनुसार, अंतिम परीक्षा परिणाम के तुरंत बाद छात्रों को औपबंधिक प्रमाणपत्र (Provisional Certificate) और अंकपत्र (Marksheet) देने की व्यवस्था है. |
| BPSC में आवेदन | प्रतीत होता है कि विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में जारी किए गए इसी पासिंग मार्कशीट और प्रोविजनल सर्टिफिकेट के आधार पर छात्र ने बीपीएससी में आवेदन किया, परीक्षा दी और इंटरव्यू पास कर चयनित हुआ. |
| अब उपजा मुख्य विवाद | अगर छात्र विवि के मुख्य रिकॉर्ड में फेल था, तो उसे पूर्व में ‘उत्तीर्ण’ दिखाकर प्रोविजनल सर्टिफिकेट और पासिंग मार्कशीट कैसे और किस अधिकारी के हस्ताक्षर से जारी कर दी गई? |
Purnia University: सपनों पर फिरा पानी; छात्र के सत्र और कोर्स को बताने से मुकरे परीक्षा नियंत्रक
राजस्व अधिकारी के पद पर चयन के बाद जहां छात्र अपनी प्रशासनिक सेवा शुरू करने की तैयारी कर रहा था, वहीं विवि के इस फैसले से उसके सारे सपने टूटते नजर आ रहे हैं.
यह मामला पूरी तरह से उच्च स्तरीय जांच का विषय बन गया है कि विवि के परीक्षा विभाग में चल क्या रहा है. जब मीडिया कर्मियों द्वारा परीक्षा नियंत्रक प्रो. अमरकांत सिंह से पीड़ित छात्र के शैक्षणिक सत्र (Session) और उसके संबंधित पाठ्यक्रम (Course) के बारे में विस्तार से पूछा गया, तो वे इस तकनीकी खराबी की जिम्मेदारी लेने के बजाय मामले को टाल गए और कुछ भी स्पष्ट बताने से इनकार कर दिया.
इस गंभीर विसंगति के बाद अब विश्वविद्यालय के भीतर यह जांच तेज हो गई है कि क्या यह कोई तकनीकी (डिजिटल) ग्लिच है या फिर पूर्व में अंकपत्र जारी करने के समय कोई बड़ा फर्जीवाड़ा या मानवीय भूल हुई थी. बहरहाल, इस पूरे मामले में यदि विश्वविद्यालय स्तर से समय रहते सुधार या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, तो बीपीएससी में चयनित होने के बावजूद छात्र को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है, जिससे छात्र अब राजभवन और कुलाधिपति से न्याय की गुहार लगाने की तैयारी में है.
