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Home बिहार पूर्णिया सेंट्रल पैथोलॉजी लैब में 150 से अधिक जांच की सुविधा, रविवार को भी मिल रही सेवा

सेंट्रल पैथोलॉजी लैब में 150 से अधिक जांच की सुविधा, रविवार को भी मिल रही सेवा

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सेंट्रल पैथोलॉजी लैब में 150 से अधिक जांच की सुविधा, रविवार को भी मिल रही सेवा
जीएमसीएच पूर्णिया की सेंट्रल पैथोलॉजी
पूर्णिया से सत्येन्द्र सिन्हा गोपी की रिपोर्ट

Purnia GMCH: पूर्णिया और आसपास के जिलों के गरीब व मध्यमवर्गीय मरीजों के लिए राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) का सेंट्रल पैथोलॉजी विभाग एक बड़ा लाइफलाइन साबित हो रहा है. अस्पताल प्रशासन द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जीएमसीएच की सेंट्रल पैथोलॉजी लैब में अब 150 से अधिक प्रकार की पैथोलॉजिकल जांच की विश्वस्तरीय व्यवस्था मुस्तैद की गई है. सबसे बड़ी और राहत की बात यह है कि निजी लैब्स के विपरीत, यह सरकारी सेवा रविवार (साप्ताहिक अवकाश) सहित सप्ताह के सातों दिन चौबीसों घंटे मरीजों के लिए खुली रहती है. वर्तमान में इस अत्याधुनिक लैब का लाभ उठाते हुए प्रतिदिन औसतन 700 से अधिक मरीज अपनी विभिन्न प्रकार की खून, यूरिन व अन्य शारीरिक जांचें करा रहे हैं.

2012 की घोषणा से मेडिकल कॉलेज के अस्तित्व तक का सफर; जांच का दायरा बढ़ा

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 में बिहार सरकार ने तत्कालीन पूर्णिया सदर अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में अपग्रेड करने की घोषणा की थी. इसके बाद केंद्र व राज्य सरकार के संयुक्त वित्तीय व प्रशासनिक सहयोग से वर्ष 2019 में यह राजकीय मेडिकल कॉलेज पूरी तरह अस्तित्व में आया. तब से लेकर अब तक यहां पैथोलॉजी सेवाओं को सुदृढ़ और हाईटेक बनाना अस्पताल प्रबंधन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है.
  • नया कल्चर विंग शुरू: हाल के महीनों में लैब के भीतर ‘यूरिन कल्चर’ और ‘ब्लड कल्चर’ की नई सुविधाएं शुरू होने से गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों को काफी लाभ मिल रहा है. इसके अलावा, रक्त के थक्के जमने की सटीक अवधि का पता लगाने के लिए पीटीआईएनआर (PTINR) जांच की विशेष सुविधा भी चालू की गई है, जिससे दिल और नसों के मरीजों का सटीक इलाज संभव हो पा रहा है.

कैंसर, टीबी और थायराइड जैसे घातक रोगों की जांच अब घर के पास सुलभ

निजी सेंटरों की महँगी लूट पर लगाम: जीएमसीएच की इस सेंट्रल लैब की बदौलत अब स्थानीय मरीजों को महँगी जांचों के लिए सिलीगुड़ी, पटना या निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते. अस्पताल में मुख्य रूप से निम्नलिखित गंभीर व सामान्य रोगों की कड़क प्रामाणिकता के साथ जांच हो रही है:

  • अंगों की कार्यप्रणाली: किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) और लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT).
  • हार्मोनल व मौसमी बीमारियां: थायराइड (Thyroid), मलेरिया, डेंगू, और टाइफाइड.
  • घातक व दीर्घकालिक रोग: टीबी (Tuberculosis), एचआईवी (HIV) और कैंसर स्क्रीनिंग से जुड़ी जटिल जांचें.

एडवांस मशीनों से बढ़ा भरोसा; समय की बचत और 100% एक्यूरेसी

जीएमसीएच प्रबंधन के अनुसार, पैथोलॉजी लैब में स्थापित सभी उपकरण और मशीनें ‘हाई क्वालिटी’ (उच्च गुणवत्ता) वाले आधुनिक और एडवांस श्रेणी की हैं. ऑटोमैटिक एनालाइजर्स की मदद से होने वाली इन जांचों के कारण जहां एक तरफ रिपोर्ट तैयार होने में समय की भारी बचत होती है, वहीं दूसरी तरफ जांच की प्रामाणिकता, विश्वसनीयता और एक्यूरेसी (सटीकता) भी 100 प्रतिशत बनी रहती है.

अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि पैथोलॉजी में सातों दिन और रविवार को भी सुचारू रूप से स्टाफ की तैनाती की जाती है, ताकि ओपीडी के साथ-साथ इमरजेंसी वार्ड में आने वाले किसी भी मरीज की गंभीर जांच रिपोर्ट में देरी न हो. इस मुस्तैद व्यवस्था से सीमांचल के गरीब मरीजों की जेब पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी कम हो गया है.

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