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Home बिहार पूर्णिया मौसम की मार से इस साल बेजार दिख रहा गर्म कपड़ों का बाजार

मौसम की मार से इस साल बेजार दिख रहा गर्म कपड़ों का बाजार

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मौसम की मार से इस साल बेजार दिख रहा गर्म कपड़ों का बाजार

ठंड कम पड़ने के कारण प्रभावित हुई गर्म कपड़ों की बिक्री

शहर के व्यापारियों को सताने लगी है अभी से पूंजी फंसने की चिंता

पूर्णिया. ठंड का मौसम नवम्बर से फरवरी के बीच अमूमन चार महीने का होता है पर पूर्णिया में पिछले चार दिनों से ठंड पड़ रही है. बाजार के मौसमी कारोबारियों की परेशानी है कि चार महीने के स्टॉक की खपत भला चार दिन में कैसे हो. इस बार ठंड ने जोर तब पकड़ा है जब इसकी विदाई का समय आया है. समझा जाता है कि अगले 10 से 15 दिनों में ठंड का मौसम खत्म हो जाएगा और वसंत पंचमी के बाद लोग होलियाना मूड में आ जाएंगे. यही वजह है कि इस साल मौसम की मार से गर्म ऊनी कपड़ों एवं अन्य संसाधनों का बाजार बेजार हो गया है. पिछले नवम्बर से सजी इन मौसमी दुकानों पर सन्नाटा होने के कारण दुकानदार निराश नजर आ रहे हैं. कारोबारियों को पूंजी फंसने की चिंता सताने लगी है. गौरतलब है कि दीपावली के बाद या मध्य नवम्बर से ही ठंड को लेकर गर्म ऊनी कपड़ों का अलग बाजार आबाद हो जाता है जबकि स्थायी दुकानदार भी अपना अतिरिक्त स्टॉक कर लेते हैं. . गर्म कपड़ों के विक्रेता दीपावली के बाद से ही ऊनी कपड़ों का स्टाक मंगवा लेते हैं. हमेशा से यही होता आ रहा है. कभी-कभी तो स्टॉक बीच मौसम में खत्म हो जाता है जिससे अलग से आर्डर देने पड़ते हैं. मगर, इस बार मौसम दगा दे गया. जिस तरह ठंड पड़ती थी वैसी ठंड इस बार आयी ही नहीं. अव्वल तो यह कि मकर संक्रांति के दिन अमूमन जिस तरह की ठंड का लोग शुरू से पूर्वानुमान लगाते आ रहे थे वैसा इस बार कुछ भी नहीं दिखा और यह दिन भी अपेक्षाकृत गर्म रहा. बाजार का आलम यह है कि इस दौरान लगन तेज होने के बाद भी गर्म कपड़ों की बिक्री उस तरह से नहीं हुई, जैसे आमतौर पर ठंड में होती है.

मुरझाए हुए हैं दुकानदारों के चेहरे

यह विडम्बना है कि पिछले चार दिनों से कड़ाके की ठंड पड़ रही है और इसके बावजूद गर्म कपड़ों का बाजार उम्मीद के अनुसार नहीं गर्म हो पाया है. नवम्बर-दिसम्बर यूं ही बीत गया और अब जनवरी के आखिरी सप्ताह में भी गर्म कपड़ों की अधिक मांग न होने पर दुकानदारों के चेहरे मुरझाए हुए हैं. दुकानदारों को गर्म कपड़ों की बिक्री न होने की चिंता सता रही है. पिछले वर्ष भी बिक्री कम होने के कारण व्यापारी नुकसान उठा चुके हैं. इस बार स्टाक पर्याप्त है. अमूमन यही हाल सीजन में गीजर और हीटर के दुकानदारों की है. इनका कारोबार पिछले साल बेहतर था और इसी को देखकर इस बार पूरी पूंजी लगा दी थी पर अब उन्हें लग रहा है कि उनकी यह पूंजी फंस गई है. इलेक्ट्रानिक सामानों के विक्रेता विक्रम जैन व इलेक्ट्रिक सामानों के कारोबारी अभय सिन्हा बताते हैं कि इस बार मौसम के कारण घोर निराशा मिली है. लाखों की लागत पूंजी फंस गयी है.

ठंडा पड़ा है गर्म कपड़ों का बाजार

शहर में सड़क किनारे मौसमी दुकान लगाने वाले सलील अहमद का कहना है कि इस बार ठंड के कम हो जाने से बाजार एक दम ठप पड़ा है. आने वाले दिनों में भी अगर मौसम के साथ ग्राहकों का रुख नहीं बदलता है तो लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा. सलील अहमद बताते हैं कि पिछले साल की तुलना में इस बार 40 फीसद भी गर्म कपड़ों की बिक्री नहीं हुई है. इसी तरह फोर्ड कंपनी चौक के समीप दुकान लगाने वाले कारोबारी निजाम अंसारी बताते हैं कि पिछले साल की तुलना में इस बार बिक्री काफी कम है. इसका कारण समय से ठंड न पड़ना है. जब ठंड शुरू हुई तो जनवरी आ गया. जनवरी में वैसे भी गर्म कपड़ों की बिक्री कम होती है. नवंबर-दिसंबर में ठंड पड़ती तो बिक्री में तेजी आती और उसका लाभ भी मिलता.

गर्म कपड़ों के बाजार पर पड़ी है मार

भट्ठा बाजार के कपड़ा कारोबारी सुरेन्द्र जैन और सुशील कुमार ने बताया कि इस साल ज्यादा ठंड न पडऩे से गर्म कपड़ों का बाजार काफी प्रभावित हुआ है. स्वेटर, जैकेट तो दूर मफलर, टोपी तक कम बिक रही है. बीते सालों में 15 दिसंबर के बाद फिर स्टाक मंगाना पड़ता था, लेकिन इस बार तो पहला स्टाक निकल जाए इसी की चिंता बनी हुई है. इस बार अभी तक 30 से 40 फीसद ही कारोबार हुआ है. खुश्कीबाग के कारोबारी सुरेश कुमार ने बताया कि इस बार ठंड अधिक पड़ने की उम्मीद थी. इसलिए मैंने सात लाख का माल मंगाया था. इनमें कश्मीर से स्वेटर, लेडीज व पुरुष गाउन, शाल तथा मफलर शामिल हैं. पंद्रह नवंबर से दुकान बिक्री के इंतजार में हूं लेकिन अभी तक सिर्फ 30 फीसद ही माल की बिक्री हुई है .

————————–आंकड़ों पर एक नजर30 से 40 फीसदी तक इस साल मुश्किल से हुआ है कारोबार07 लाख सिर्फ एक दुकानदार की पूंजी इस साल फंसी पड़ी है14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन भी इस साल नहीं पड़ी ठंड250 से अधिक अस्थायी गर्म कपड़ों की दुकानें अलग-अलग सजी हैं 2022-23 में अधिक बिक्री के कारण दुबारा मंगाना पड़ा था स्टॉक

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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