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Home बिहार पूर्णिया रमजान में अकीदत के साथ तिलावत व इबादत कर रहे नन्हें रोजेदार

रमजान में अकीदत के साथ तिलावत व इबादत कर रहे नन्हें रोजेदार

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रमजान में अकीदत के साथ तिलावत व इबादत कर रहे नन्हें रोजेदार

कई ने पहली दफा रखा है रोजा पर खुशी के साथ जोश से नजर आ रहे लवरेज

इबादत कर अल्लाह तआला से मांग रहे देश में अमन चैन की दुआ नन्हें रोजेदार

पूर्णिया. रमजान के इस पाक महीने में तिलावत और इबादत में रोजेदारों का वक्त गुजर रहा है. कुछ नन्हे रोजेदारों ने पहली बार रोजा रखना शुरू किया है. ऐसे रोजेदारो में कोई मायूस दिख रहा है तो कोई जोश से लवरेज नजर आ रहा है.रोजा रखने से वे काफी खुश नजर आ रहे हैं. वे कहते हैं कि अल्लाह तआला से रोजा रख कर अमन चैन कायम करने के लिए दुआ मांगते हैं. कहते हैं, नन्हे रोजेदारों पर अल्लाह की रहमतों की बारिश होती है और यही वजह है कि नन्हें रोजेदारों का हौसला बुलंद है. वे रोजा रख कर काफी खुश हैं और नमाज अदा कर रहे हैं. अपने अभिभावकों को देख बच्चे भी इस बार शामिल हुए हैं.

शहर के रामबाग स्थित कालोनी में रहने वाले नन्हे रोजेदार अरहान शरीक बताते हैं किपहली दफा रोजा रखा है. भूख तो सह लेते हैं पर प्यास लगने पर दिक्कत होती है पर खुदा का रहम है कि रोजा पूरा होता है और इफ्तार भी करते हैं. इस साल खास तौर पर सबकी खुशी और अमन चैन के लिए रोजा रख कर इबादत कर रहे हैं. रोजा रखने से मन अंदर से बुलंद रहता है. हमने सोचा कि जब घर में सभी बड़े रोजा रखते हैं तो हम क्यों नहीं रख सकते. मधुबनी की ताबिया फिरदौस का कहना है कि बचपन से अब्बू और अम्मीजान को रोजा करते देखती थी. उन्हें देख मैं भीरोजा रखने लगी. यह मेरा दूसरा साल है. उसका कहना है कि हमको पूरा भरोसा है कि रमजान के पाक महीने में अल्लाह तआला हमारी दुआ कबूल करेंगे.

खुदा की बंदगी से मन को मिलता है सुकून

वे भले ही कम उम्र में रोजा रख रहे हैं पर उनकी समझ कम नहीं है. पूछने पर नन्हा सा दिखने वाले अर्शमान कहते हैं कि खुदा की बंदगी और तिलावत से मन को सुकून मिलता है. पढाई में भी खूब मन लगता है. शरीर में ताजगी महसूस होती है. सुबह से शाम तक स्कूल और घरवालों के साथ इबादत में वक्त इस तरह गुजर जाता है कि पता ही नहीं चलता. पोखरिया के मो. जावेद और मो. सादिक का कहना है कि रोजा का यह दूसरा साल है. हम ही नहीं, मेरे घर में सभी रोजा रखते हैं. हमें कोई दिक्कत नहीं होती. नमाज की अदा करते है. इबादत करने से अच्छा लगता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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