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Home बिहार पूर्णिया सात समुंदर पार से कथासंग्रह का हुआ भव्य लोकार्पण

सात समुंदर पार से कथासंग्रह का हुआ भव्य लोकार्पण

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सात समुंदर पार से कथासंग्रह का हुआ भव्य लोकार्पण

पूर्णिया. साहित्य विभाग कलाभवन के तत्वावधान में कथा लेखिका डॉ निरुपमा राय के कथासंग्रह सात समुंदर पार से का भव्य लोकार्पण संपन्न हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता केबी झा कॉलेज कटिहार के प्राचार्य और प्रसिद्ध कहानीकार डॉ संजय कुमार सिंह ने की. मुख्य अतिथि थीं एमएल आर्य कॉलेज कसबा की प्राचार्या डॉ रीता सिन्हा. वहीं विशिष्ट अतिथि और वक्तागण में डॉ प्रभात नारायण झा, प्रो विजयारानी, डॉ उषा शरण, रीता सिन्हा, अर्चना मिश्रा, डॉ केके चौधरी और सुमित प्रकाश शामिल रहे. आयोजन का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ. इसके पश्चात आगत अतिथियों का स्वागत और पुस्तक का लोकार्पण किया गया. डॉ. निरुपमा राय ने अपने लेखकीय संबोधन में कहा कि कहानी और यथार्थ का गहरा रिश्ता होता है कहानी लिखना मानो अपने आप में कई जन्मों को जीना होता है. उन्होंने कहा आज अपने संकलन को सुधी श्रोताओं और आलोचकों के मध्य सौंपते हुए अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. संजय कुमार सिंह ने लेखिका को बधाई देते हर कहा कि सभी कहानियां आंसू और फूलों की कहानियां हैं. भाव प्रवाह और संवेदना से भरी हुई कहानियों में कहीं भी बनावटीपन नहीं दिखता. कहानियों की धूरी है परिवार और संबंधों की गरिमा. उन्होंने सात समंदर पार से, बंधन स्पर्श की भाषा, आकृति पांच मुट्ठी मिट्टी और जब बचपन था आदि कहानियों पर विस्तार से चर्चा करते हुए लेखिका को शुभकामनाएं दी. मुख्य अतिथि डॉ रीता सिन्हा ने कहा जीवन में घटित घटनाओं पर आधारित सरल सुंदर और प्रभावी कहानियों का संकलन है सात समंदर पार से. स्त्री की भूमिका से अलग हटकर पिता के महत्व पर लिखी गयी सारी कहानियां पठनीय हैं. डॉ प्रभात नारायण झा ने कहा सात समुंदर पार से एक उत्कृष्ट कथा संग्रह है. जब बचपन था, संबंधों के टूटने की कहानी है जो मन को झकझोर जाती है. सर्वश्रेष्ठ कहानी उन्होंने आशीर्वाद कहानी को बताया. प्रो विजयारानी ने तुलसी के दोहे के साथ अपनी बात का प्रारंभ किया और कहा कि डॉ निरुपमा ने पितृ प्रधान चरित्रों को अपनेपन और अनुराग से सजाया है अति संवेदनशील कथा स्पर्श की भाषा निरुपमा की सुंदर विचारधारा का निदर्शन और युग को बदलने की क्षमता रखने वाली कहानी है. राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षाविद रीता सिन्हा ने विस्तार से कहानियों पर चर्चा करते हुए लेखिका को इतनी सुंदर परिवारिक सामाजिक और अद्भुत कहानियां के लिए बधाई दी. डॉ उषा शरण ने कहा इस संकलन की सभी 18 कहानियों में जो सूक्ष्म तत्व और विचारधारा प्रतिबिंबित हुई है उसके लिए लेखिका को हृदय से बधाई. डॉ केके चौधरी ने विस्तार से सभी कहानियों पर प्रकाश डालते हुए लेखिका की पूर्व रचनाओं पर भी प्रकाश डाला और कहा मुझे तो ऐसा लगता है जैसे 18 कहानियों में 18 पुराण की सकारात्मक बातों को लेखिका ने पिरो दिया है. अर्चना मिश्रा ने भी सात समुंदर पार से, यह सपना क्यों नहीं टूटता, बंधन, आंगन की तुलसी, चलो एक बूढ़े की कथा सुनते हैं, चरण स्पर्श, आकृति आदि कहानियों पर विस्तार से चर्चा की. सुमित प्रकाश ने कहा कहानियों से मुझे भी अपने जीवन में बहुत सीख मिली है. मैं लौटूंगा बाबूजी एक ऐसे युवा की कहानी है जो मन को झकझोर देती है. कार्यक्रम में डॉ उषा शरण, डॉ. मृदुलता, वंदना कुमारी, जोशिता परमार, विमल कुमार, शरद कुमार, मनोज कुमार, मुकेश कुमार, शंभू नाथ झा, मधु व्रत राय, डॉ सरोज कुमार मिश्रा, डॉ निशा प्रकाश, अधिवक्ता किरण सिंह आदि उपस्थित थे मंच संचालन कर रही थीं बबीता किशोरी, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ निशा प्रकाश ने किया.

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