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Home बिहार पूर्णिया कबीर व्यक्ति नहीं एक विचारधारा थे, उनके विचार सदियों तक रहेगी प्रासंगिक : महापौर

कबीर व्यक्ति नहीं एक विचारधारा थे, उनके विचार सदियों तक रहेगी प्रासंगिक : महापौर

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कबीर व्यक्ति नहीं एक विचारधारा थे, उनके विचार सदियों तक रहेगी प्रासंगिक : महापौर

जीवन ज्योति केंद्र संत कबीर नगर में तीन दिवसीय 45 वां सद्गुरु महाकुंभ महोत्सव शुरू पूर्णिया. गुरुवार से जीवन ज्योति केंद्र संत कबीर नगर में तीन दिवसीय 45 वां सद्गुरु महाकुंभ महोत्सव शुरू हो गया. महोत्सव का उद्घाटन महापौर विभा कुमारी ने किया. उन्होंने महोत्सव में पधारे जीवन ज्योति केंद्र पूर्णिया के आचार्य सद्गुरू जितेंद्र साहेब जी और तमाम सत्संग समिति के सदस्यगण, तमाम लोगों और कबीर परंपरा से जुड़े भक्तगण का नगर निगम पूर्णिया की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन किया. उन्होंने कहा कि सबसे पहले कबीर परंपरा के महान संत धर्मस्वरूप साहेब को श्रद्धा सुमन अर्पित करती हूं जो अब ब्रह्मलोक में विलीन हो चुके हैं. मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं कि मुझे भी उनका सानिध्य मिला था. महापौर ने कहा कि 600 वर्ष पूर्व जन्म लेने वाले महान संत, समाज सुधारक और उपदेशक संत कबीर जी के विचारों को जब भी सुनती हूं तो ऐसा लगता है कि आज भी उनकी बातें प्रासंगिक है. सच तो यही है कि कबीर व्यक्ति नहीं एक विचारधारा थे. उनके विचार भविष्य में भी सदियों तक प्रासंगिक रहेगी. महापौर विभा कुमारी ने कहा कि कबीर स्वभाव से संत थे लेकिन प्रकृति से समाज सुधारक थे। उन्होंने धार्मिक कट्टरता का विरोध करते हुए कहा कि ईश्वर को मंदिर-मस्जिद में ढूंढने की जरूरत नहीं खुद में ढूंढने की जरूरत है. कहा कि ईश्वर एक हैं भले ही उनके नाम अलग-अलग हैं और कोई भी धर्म आपस में बैर करना नहीं सिखाता है. कहा कि कबीर मानवतावाद के पक्षधर थे. उन्होंने न केवल जन्म के आधार पर भेदभाव का विरोध किया बल्कि आडम्बर, कुरीति, अंधविश्वास, पाखंड, जात-पात का भी विरोध किया. कबीर मानवीय मूल्यों के हिमायती थे, उन्होंने धैर्य, सहिष्णुता, गुरु का सम्मान, आत्मा की पवित्रता, दिन-दुखियों की सेवा और नैतिकता के पालन को मानवीय धर्म बताया। कहा कि,तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में जो विद्वान संत आएं हैं वे आप सबों को जीवन की वास्तविकता से अवगत कराएंगे. तीन दिवसीय 45वां सद्गुरु महाकुंभ महोत्सव में रानीपतरा मटिया से सद्गुरु जयस्वरूप साहेब, जीवन ज्योति केंद्र पूर्णिया के आचार्य रतनस्वरूप साहेब शास्त्री, रामपुर तिलक के महंथ अनुपम स्वरूप साहेब, कटिहार के संत संजीववन साहेब, संत श्री सागर साहेब, डेगराहा से संत विनम्र साहेब, भट्ठी से संत भीष्म नारायण साहेब, सेमापुर से संत चिदानंद स्वरूप साहेब जी पधारे हैं। जबकि समारोह के आयोजन में चंद्रभूषण चांद, नीरज कुमार, सुबोध जी, तीर्थानंद मेहता, राजू परदेशी, अमरकांत जी आदि का सराहनीय सहयोग है। मौके पर मुख्य रूप से वार्ड पार्षद अमित कुमार सोनी,वार्ड पार्षद प्रतिनिधि मनोज साह, मुरारी झा, संजीव यादव, झंटू यादव आदि मौजूद थे.

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