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Home बिहार पूर्णिया सेवानिवृत्ति से पहले प्रधानाध्यापक नूर आलम को अनोखा सम्मान; जमनीगुरी स्कूल में ‘तिथि भोजन’ बना भावनाओं का उत्सव

सेवानिवृत्ति से पहले प्रधानाध्यापक नूर आलम को अनोखा सम्मान; जमनीगुरी स्कूल में ‘तिथि भोजन’ बना भावनाओं का उत्सव

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सेवानिवृत्ति से पहले प्रधानाध्यापक नूर आलम को अनोखा सम्मान; जमनीगुरी स्कूल में ‘तिथि भोजन’ बना भावनाओं का उत्सव
तिथि भोजन

Retirement: ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट: शिक्षा की लौ जलाकर समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले एक सच्चे शिक्षक की विदाई कितनी गरिमामयी और भावुक हो सकती है, इसका साक्षात उदाहरण ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय जमनीगुरी में देखने को मिला. विद्यालय के सम्मानित प्रधानाध्यापक नूर आलम जी आगामी 31 मई 2026 को अपनी लंबी और बेदाग सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त (Retire) होने जा रहे हैं. इस ऐतिहासिक पल को यादगार बनाने और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए बुधवार को विद्यालय परिसर में एक भव्य ‘तिथि भोजन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अनूठे आयोजन में विद्यालय शिक्षा समिति के सदस्यों, शिक्षकों, अभिभावकों सहित भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

स्कूल परिसर में रहा उत्सवी माहौल; बच्चों को परोसे गए विशेष व्यंजन

बुधवार की सुबह से ही जमनीगुरी विद्यालय परिसर का नजारा किसी उत्सव जैसा नजर आ रहा था. प्रधानाध्यापक नूर आलम जी के सम्मान में विद्यालय शिक्षा समिति और ग्रामीणों के आपसी सहयोग से बच्चों के लिए एक विशेष और सुरुचिपूर्ण सामूहिक भोज (तिथि भोजन) की व्यवस्था की गई थी.

सभी छात्र-छात्राओं ने पंक्तिबद्ध होकर पूरी आत्मीयता और अनुशासन के साथ भोजन ग्रहण किया. इस दौरान बच्चों के चेहरों पर अपने प्रिय ‘हेडमास्टर सर’ के प्रति आदर, स्नेह और उनके जाने का गम साफ दिखाई दे रहा था. यह तिथि भोजन केवल एक औपचारिक प्रशासनिक आयोजन न बनकर विद्यालय परिवार, समाज और गुरु के बीच अपनत्व का एक अटूट दस्तावेज बन गया.

“सरल, सौम्य और समर्पित” — शिक्षा को नई पहचान देने वाले नूर आलम

कार्यक्रम में उपस्थित प्रबुद्ध नागरिकों, शिक्षाविदों और अभिभावकों ने नूर आलम जी के लंबे और गौरवशाली सेवा काल को याद करते हुए उनके योगदान की सराहना की. लोगों ने बताया:

  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: नूर आलम जी ने अपने कार्यकाल के दौरान ग्रामीण क्षेत्र के इस विद्यालय को एक नई और अनुकरणीय पहचान दिलाने के लिए भगीरथ प्रयास किए.
  • अटूट सामाजिक सहभागिता: ड्रॉपआउट (पढ़ाई छोड़ने वाले) बच्चों को दोबारा स्कूल की मुख्यधारा से जोड़ने, बाल संसद को मजबूत करने और अभिभावकों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर उन्होंने शिक्षा के स्तर को काफी ऊंचा उठाया.
  • अभिभावक जैसा स्नेह: ग्रामीणों ने कहा कि उनकी कार्यशैली हमेशा अत्यंत सरल, सौम्य, पारदर्शी और पूरी तरह विद्यार्थियों के हित में केंद्रित रही. वे केवल एक प्रशासनिक प्रधान नहीं, बल्कि पूरे गांव के सुख-दुख के साथी और बच्चों के लिए अभिभावक जैसे थे.

विदाई की बेला में भावुक हुए सहकर्मी और ग्रामीण; याद रहेगा यह समर्पण

जैसे-जैसे कार्यक्रम अपने समापन की ओर बढ़ा, विद्यालय के कई सहकर्मी शिक्षक, शिक्षिकाएं और बुजुर्ग ग्रामीण अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और माहौल पूरी तरह भावुक हो गया. विदाई की इस बेला में शिक्षकों ने कहा कि नूर आलम जी का स्थान विद्यालय में हमेशा खाली रहेगा, उनका अनुशासन और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के शिक्षकों के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत का कार्य करेगा.

आयोजन का मुख्य संदेश: पूरे आयोजन के दौरान बच्चों की निश्चल मुस्कान, शिक्षकों की आत्मीयता और ग्रामीणों का एकजुट सहयोग यह साफ संदेश दे रहा था कि विद्यालय सिर्फ चारदीवारी और किताबों का केंद्र नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को एक सूत्र में पिरोने वाला सबसे मजबूत और पवित्र मंच है. जमनीगुरी विद्यालय में आयोजित यह गरिमामयी तिथि भोजन कार्यक्रम और नूर आलम जी की विदाई लंबे समय तक कोसी-सीमांचल के इस इलाके के लोगों के दिलों-दिमाग में जिंदा रहेगी.

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दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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