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Home बिहार पूर्णिया असीम श्रद्धा का केन्द्र है माता चौक स्थित दुर्गा मंदिर

असीम श्रद्धा का केन्द्र है माता चौक स्थित दुर्गा मंदिर

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असीम श्रद्धा का केन्द्र है माता चौक स्थित दुर्गा मंदिर

पूर्णिया. न्यू सिपाही टोला का माता चौक स्थित दुर्गामंदिर आज न केवल असीम श्रद्धा का केन्द्र है बल्कि शहर और गांव का संगम भी है. ऐसी मान्यता है कि पूरे शहर में मां के दर्शन के बाद एक बार माता चौक के दुर्गा मंदिर में पूजा करना अनिवार्य हो जाता है. शायद यही वजह है कि इस मंदिर में पूरी भीड़ उमड़ पड़ती है. इस मंदिर से एक तरफ पूरा शहर और दूसरी ओर बक्साघाट, मरंगा पश्चिम समेत आस पास के गांवों की आस्था जुड़ी हुई है. यहां प्रशासन के अधिकारी भी देवी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

पूजा शुरू होने से पहले ही चौक का नाम रखा गया था माता चौक

पूजा कमेटी के अध्यक्ष अशोक सिंह गनवरिया बताते हैं कि आदमपुर स्थित माता स्थान के प्रति उनकी गहरी आस्था रही है अपने मित्र निरंजन सिंह के साथ वे हमेशा वहां जाया करते थे. उस वक्त इस चौक का नामकरण नहीं हुआ था. उन्ही दोनों के प्रस्ताव पर 90 के दशक में माता चौक नाम पर लोगों की सहमति बनी और तभी से इस चौक का नाम माता चौक हो गया. नामकरण के दो तीन वर्षों बाद ही सभी के मत से यहां दुर्गा पूजा का आयोजन भी होने लगा. इस घटना को वे माता का ही आशीर्वाद मानते हैं.

क्या है मंदिर का इतिहास

इस मंदिर का इतिहास पुराना नहीं है. स्थानीय बुजुर्गों की मानें तो खुद देवी ने यहां पूजा और मंदिर निर्माण की प्रेरणा दी थी. कहते हैं पूजा समिति के एक सदस्य को पूजा शुरु करने की बातें सपने में आयी जबकि स्थानीय लोग पहले से पूजा करना चाहते थे. यहां के महेश त्रिवेदी और राजेन्द्र देव समेत कई पुराने लोगों ने यहां देवी की पूजा का मन बनाया. मुहल्ले में इस बात पर सहमति बनी और 2002 में यहां विधिवत पूजा की परम्परा शुरु हो गयी. स्थानीय लोगों का कहना है कि न्यू सिपाही टोला चूंकि शहर से थोड़ा हट कर बसा हुआ है और पूजा करने के लिए दूर जाना पड़ता था, इसलिए मुहल्ले के लोगों ने आपस में विचार कर यहां दुर्गा पूजा शुरु कर दी. श्रद्धालुओं का जुड़ाव इस कदर रहा कि 2008 में मंदिर का निर्माण भी आरम्भ हो गया. तबसे यहां पूरी आस्था व निष्ठा के साथ पूजा की जा रही है.

ग्रामीण संस्कृति की झलक

माता चौक दुर्गा मंदिर की पूजा की एक बड़ी खासियत यह है कि यहां एक साथ गांव और शहर की संस्कृति की झलक मिलती है. गांव की महिलाएं जब बाजा गाजा के साथ पूजा करने आती हैं तो वह दृश्य काफी आकर्षक होता है. महिलाओं के कंठ से निकलती देवी गीत की स्वरलहरियां और जयकारा भक्ति का समा बांध जाती हैं. वहीँ प्रतिमा विसर्जन के क्रम में स्थानीय महिलायें बड़ी संख्या में माता को बिदाई देने कचहरी तक पैदल ही गीत गाते हुए जाती हैं और वहां से वापस लौटती हैं जबकि पुरुष सदस्य सिटी स्थित सौरा नदी में जाकर प्रतिमा का विसर्जन करते हैं.

मंदिर में स्थापित है संगमरमर की प्रतिमा

माता चौक पर वर्ष 2002 से शुरू हुई पूजा में 2019 तक बंगाल के मूर्तिकार यहां आकर मूर्ति का निर्माण किया करते थे. लेकिन 2020 में माता के एक स्थानीय भक्त रणजीत चौबे उर्फ बौआ दा ने राजस्थान के जयपुर से संगमरमर की प्रतिमा मंगवाकर पूजा समिति के माध्यम से पूर्ण विधि विधान के साथ मंदिर मे स्थापित कराया. इसके बाद से पूजन और विसर्जन के लिए स्थानीय खुश्कीबाग़ से छोटी प्रतिमा को लाकर पूजा आयोजन के पश्चात उसे विसर्जित किया जाता है.

बेहतर साज- सज्जा के साथ की जाती है माता के वैष्णवी रूप की पूजा

न्यू सिपाही टोला सिथत माता चौक का यह दुर्गा मंदिर बेहतरीन डेकोरेशन के लिए जाना जाता है. लम्बी दूरी तक बिजली के रंग-बिरंगे बल्ब लगाए जाते हैं. बिजली के जगमगाते बल्बों के साथ आकर्षक डेकोरेशन किया जाता है जिससे दूर से ही लोगों को यह आभास हो जाता है कि आगे कहीं दुर्गा की पूजा हो रही है. दस दिनों के इस पर्व में कला और संस्कृति के रंग निखर उठते हैं. पूजा शूरु होते ही प्रति दिन संध्याकाल में महिलायें गीत और भजन गाकर मैय्या को मनाती हैं. पुरोहित आचार्य कृष्णानंद मिश्र बताते हैं कि माता चौक स्थित देवी वैष्णवी रूप हैं. पूर्ण वैदिक पद्धति से माता के इसी रूप की पूजा की जाती है जिसमें बलि के तौर पर नारियल या कोहड़े की बलि दी जाती है.

बोले समिति के लोग

मुख्य रूप से वर्ष 2010 से मंदिर निर्माण तथा पूजा के आयोजन को लेकर कमेटी के सदस्यों ने कार्य शुरू किया. धीरे धीरे लोगों का सहयोग मिलता गया कार्य आगे बढ़ता रहा. अब मंदिर और प्रतिमा स्थायी तौर पर है प्रत्येक दिन की पूजा के साथ साथ दशहरे में भव्य आयोजन किया जाता है. नवमी को शाम से ही माता के खिचडी भोग का वितरण अनवरत चलता रहता है.

अशोक सिंह गनगरिया, अध्यक्ष पूजा समिति

फोटो. 14 पूर्णिया 1

महिलाओं को पूजा के लिए दूर जाने में होने वाली परेशानियों को देखते हुए निकट के तौर पर उक्त स्थान पर दुर्गा पूजा के आयोजन को शुरू किया गया. हर वर्ष मोहल्ले के लोगों द्वारा काफी सहयोग मिलता है. बाहर नौकरी पेशा वाले भी इस मौके पर यहां आते हैं और अपना सहयोग देते हैं. इस वर्ष मंदिर के स्थायी कार्यालय का भी निर्माण कार्य संपन्न करा लिया गया है.

महेश पासवान, कार्यालय प्रभारी पूजा समिति.

फोटो. 14 पूर्णिया 2फोटो. 14 पूर्णिया 3-न्यू सिपाही टोला माता चौक स्थित दुर्गा मंदिर

4- माता चौक मंदिर दुर्गा प्रतिमा

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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